Bihar Cabinet Expansion: बिहार की सम्राट सरकार में नए चेहरों की एंट्री, 7 मई को शपथ लेंगे कितने नए मंत्री?
Bihar Cabinet Expansion: बिहार की सियासत में एक बार फिर बदलाव की बयार बहने वाली है। सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली नई एनडीए सरकार के गठन के करीब तीन हफ्ते बाद, सबकी निगाहें अब 7 मई पर टिक गई हैं। राजधानी पटना का ऐतिहासिक गांधी मैदान इस दिन एक भव्य और ऐतिहासिक कैबिनेट विस्तार समारोह का गवाह बनेगा।
यह आयोजन केवल एक औपचारिक शपथ ग्रहण मात्र नहीं है, बल्कि इसे आगामी चुनावों से पहले एनडीए के 'शक्ति प्रदर्शन' और एकजुटता के बड़े राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। सरकार बनने के बाद से ही इस विस्तार का बेसब्री से इंतजार हो रहा था।

अब जबकि प्रशासन तैयारियों को अंतिम रूप दे रहा है, नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच उत्साह चरम पर है। इस मेगा इवेंट में देशभर के दिग्गज वीवीआईपी और शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी बिहार की राजनीति को एक नई दिशा देने का संकेत दे रही है।
Bihar Cabinet Expansion: गांधी मैदान में भव्य आयोजन की तैयारी
7 मई को पटना के गांधी मैदान में मंत्रियों का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित होगा। आमतौर पर राजभवन में होने वाले ऐसे कार्यक्रमों के उलट, इसे सार्वजनिक मैदान में बड़े स्तर पर आयोजित किया जा रहा है। इस बार की खास बात यह है कि मुख्यमंत्री नहीं, बल्कि सिर्फ मंत्रियों का सामूहिक शपथ ग्रहण होगा, जो इसे अपने आप में एक अलग और खास आयोजन बनाता है।
VVIP मेहमानों का लगेगा जमावड़ा
समारोह की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के शामिल होने की पूरी संभावना है। इनके अलावा पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री और कई केंद्रीय मंत्री भी इस समारोह की शोभा बढ़ाएंगे। प्रशासन ने सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम किए हैं और गांधी मैदान में आम लोगों की एंट्री फिलहाल सीमित कर दी गई है।
क्यों टला था विस्तार?
मंत्रिमंडल विस्तार में देरी का मुख्य कारण हाल ही में पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव थे। शीर्ष नेतृत्व की व्यस्तता और चुनावी व्यस्तताओं के चलते इसे टाल दिया गया था। अब चुनावों के नतीजों और एनडीए की मजबूती के बाद, गठबंधन इस विस्तार के जरिए एक नई ऊर्जा फूंकना चाहता है।
नए चेहरों और सोशल इंजीनियरिंग पर जोर
सूत्रों के अनुसार, इस कैबिनेट विस्तार में 27 नए मंत्रियों को शपथ दिलाई जा सकती है।
- भाजपा और जदयू का फॉर्मूला: गठबंधन में संतुलन बनाए रखने के लिए भाजपा से 12 और जदयू से 11 मंत्रियों के शपथ लेने की चर्चा है।
- सहयोगी दलों की भूमिका: लोजपा (रामविलास) से 2, जबकि 'हम' और 'आरएलएम' से एक-एक मंत्री बनाए जा सकते हैं।
- युवा जोश और अनुभव का मेल: कई पुराने चेहरों की छुट्टी हो सकती है और उनकी जगह जातिगत व क्षेत्रीय समीकरणों को साधते हुए नए चेहरों को मौका मिल सकता है।
एक बड़ा राजनीतिक संदेश
इस आयोजन को आगामी रणनीतियों की एक झलक माना जा रहा है। सरकार यह संदेश देना चाहती है कि वह विकास और सुशासन के साथ-साथ सभी वर्गों को साथ लेकर चलने के लिए तैयार है। मंत्रियों के विभागों में फेरबदल की भी संभावना है, जिससे शासन व्यवस्था में नई गति आने की उम्मीद जताई जा रही है।












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