धनतेरस पर खुला काशी अन्नपूर्णा मंदिर प्रतिमा का कपाट, स्वर्णमयी मां के दरबार में धन, सेहत पाने आए श्रद्धालु

वाराणसी, 2 नवंबर। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में मौजूद श्री अन्नपूर्णा मंदिर में धनतेरस के दिन मां अन्नपूर्णा के स्वर्णमयी प्रतिमा का कपाट खुल गया। यह मंदिर पूरे वर्ष में महज 4 दिनों के लिए ही खोला जाता है जिसकी शुरुआत धनत्रयोदशी ( धन्वन्तरि जयंती) से होती है। मन्दिर के प्रथम तल पर स्वर्णमयी मां अन्नपूर्णा का मंदिर है जिसके गर्भगृह में मां अन्नपूर्णा की प्रतिमा के साथ लक्ष्मी देवी की स्वर्ण प्रतिमा और भूमि देवी की स्वर्ण प्रतिमा विराजमान है। मंगलवार भोर 4 बजे मंगला आरती के बाद मंदिर के कपाट खुले जिसके बाद से मंदिर में एक तरफ लोगों ने तीनों देवियों का दर्शन किये। ऐसी मान्यता है कि धनत्रयोदशी के दिन इस स्वर्णमयी दरबार मे आने से लोगों को धन और आरोग्य की प्राप्ति होती है। इसी कामना से भक्त माता के दरबार मे दर्शन करने के बाद महंत से प्रसाद लेकर अपने घर लौट गए।

Doors of Annpurna temple opened on Dhanteras

भगवान शिव ने मांगी थी भिक्षा
अन्नपूर्णा मठ मन्दिर के महंत दिगम्बर शंकर पूरी बताते है कि यह मंदिर हजारो वर्षो पुराना है। यहां भगवान शिव ने मां पार्वती के अन्नपूर्णा स्वरूप में काशी सहित पूरी सृष्टि के लिए भिक्षा मांगी थी। यह स्वर्ण प्रतिमा गद्दी परम्परा में यहां आई है क्योंकि आज के दिन ही धन्वन्तरि जिनका जन्म हुआ था जो अपने दोनों हाथों में अमृत कलश लेकर लोगो को आरोग्य बांट रहे थे। लेकिन कई गद्दी पुरानी परम्परा की कड़ी में धनत्रयोदशी के दिन यह से धन ( अलग - अलग तरीके के सिक्के) और अन्न (धान का लावा) बांटने की परम्परा चली आ रही है। इसे लेकर लोग अपने घर जाते हैं। घरों के भंडार में अन्न रखा जाता है और तिजोरी में धन रखा जाता है।

Doors of Annpurna temple opened on Dhanteras

अन्नकूट महोत्सव तक चलती है परम्परा
आज से शुरू इस महोत्सव की शुरुआत होती है जो अन्नकूट के दिन ( दीपावली के दूसरे दिन तक) चलती है। अन्नकूट के दिन माँ के गर्भगृह में छप्पन भोग से श्रृंगार किया जाता है और उसके बाद यह अन्न लोगों को प्रसाद के रूप में बांटे जाते हैं। इसमें अलग-अलग पकवान बनाने के लिए मन्दिर परिसर में महीनों पहले से तैयारी होती है और यहीं के भण्डार में मिठाइयां, नमकीन, पपड़ी, खीर, कच्चे भोजन बनते है। इस बार मंदिर के गर्भगृह में लड्डू से विशेष शृंगार किया जाएगा। इसमे मोती चूर लड्डू, काजू लड्डू, बेसन लड्डू, पंचमेवा लड्डू, अलग अलग मेवों के लड्डू, जैसे करीब दर्जनों प्रकार के लड्डू श्रृंगार में इस्तेमाल किया जाएगा। इस बार लोगों की भी़ड़ बढ़ी हुई दिख रही थी।

Doors of Annpurna temple opened on Dhanteras

राजा देबोदास की आराधना से दोबारा प्रकट हुई थी माता
श्री काशी अन्नपूर्णा मदिर के आचार्य प्रोफेसर राम नारायण द्विवेदी बताते हैं कि हजारों साल से यहां भक्त आते हैं। दरअसल अनादिकाल में जब काशी का राजपाट देवकाल में यहां राजा देबोदास देख रहे थे तब यह एक बार अकाल जैसे हालात हो गए थे। सभी देवी देवता काशी छोड़ वापस चले गए थे तब इस सृष्टि को बचाने के लिए राजा देबोदास ने मां अन्नपूर्णा की कई वर्षों तक तपस्या की थी, जिसके बाद मां पार्वती देवी ने अन्नपूर्णा के रूप में यहां दर्शन देकर उन्हें आशीर्वाद दिया कि अब कभी भी काशी में कोई भूखा नही सोएगा।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+