धनतेरस से ही शुरू करें लक्ष्मी पूजन

इस साल धनतेरस सेमवार को यानी 24 अक्तूबर को पड़ रहा है। माना जाता है कि मां लक्ष्मी उसी के घर पर आती हैं, जिसका द्वार एवं अंदर से घर सबसे स्वच्छ एवं सुंदर दिखे। लिहाजा धनतेरस के दिन ही अपने घर के द्वार को सजा देना चाहिये। द्वार पर जितनी रौशनी हो उतना अच्छा है। धनतेरस के दिन घर के मुख्य द्वार पर केसर के तिलक से सतिया बनायें। साथ ही द्वार के ऊपर की ओर बीच में 'श्री' लिखें।
घर की तिजोरी या लॉकर जिसमें आप धन व गहने रखते हों उन्हें दक्षिण-पश्चिम कोने में होना चाहिये। लॉकर के अंदर शीशे लगे हों तो उसमें सकारात्मक ऊर्जा (पॉजिटिव एनर्जी) बनी रहती है और साल भर तक घर में धन की कमी नहीं होती।
धनतेरस के दिन घर का कोना-कोना रौशन होना चाहिये। ऐसी वस्तुएं जो काम की नहीं रही हैं जैसे पुराना लोहा, रद्दी, कबाड़, आदि, उन्हें धनतेरस से पहले ही बाहर निकाल देना चाहिये। घर के मुख्य द्वार या खिड़की के दरवाजों, कुर्सी, मेज, सोफा, आदि से चर-चर की आवाज़ नहीं आनी चाहिये। लिहाजा साफ-सफाई के साथ इसमें या तो तेल डालना चाहिये या फिर उसकी मरम्मत करवायें। ऐसा इसलिए क्योंकि लक्ष्मी माता को आवाज़ पसंद नहीं होती।
घर को पीले रंग के फूलों से सजायें। घर में चमेली या चंपा के फूलों की खूशबू का इस्तेमाल करें। यदि आप घर में अष्टलक्ष्मी श्रीयंत्र लगाना चाहते हैं तो वो सोने या स्फटिक का होना चाहिये। चांदी का कतई नहीं होना चाहिये।
ताम्बे की तश्तरी पर किसी भी अनाज (चावल का इस्तेमाल सबसे उत्तम) से अष्टदल कमल बनायें और उसके बीच में लक्ष्मी चरण रखें। अब इस थाली को पूजाघर में रख दें। धनतेरस के दिन से दीवाली तक रोज़ाना सुबह-शाम लक्ष्मी माता की आरती करें। दाहिनावर्ती शंख में जल डालकर पूरे घर में छिड़कें।
पूजन एवं खरीददारी के मुहूर्त
इस मंत्र के साथ पूजन करने से अच्छे फल प्राप्त होते हैं। इस बार धन त्रयोदशी 24 अक्टूबर दिन सोमवार को मध्यान्ह 12:31 बजे से 25 अक्टूबर दिन मंगलवार को प्रातः 9:02 बजे तक है। प्रदोष व्यापनी त्रयोदशी 24 अक्टूबर को मनाई जायेगी परन्तु उदयव्यापनी त्रयोदशी 25 अक्टूबर को है।
खरीददारी का शुभ मुहूर्त- 24 अक्टूबर 2011, प्रातः 6:30 बजे से रात्रि 12:40 बजे तक है।
व्यवसाय के लिए शुभ मुहूर्त- 24 अक्टूबर 2011, मध्यान्ह 12:30 बजे से सांय 6:30 बजे तक।












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