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Diwali 2025: दिवाली की पूजा इत्र के बिना है अधूरी, लक्ष्मी जी को खुश करने के लिए जान लें सुगंध का महत्व

Diwali 2025: दिवाली को रोशनी और खुशहाली का पर्व माना जाता है। यह त्योहार सिर्फ दीपों और सजावट तक ही सीमित नहीं। इस अवसर पर इत्र का प्रयोग भी घर और शरीर को खुशबू से भरने के लिए किया जाता है। धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से, इत्र का प्रयोग शुद्धता, सुख और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। ऐसी मान्यता भी है कि लक्ष्मी माता को सफाई और अच्छी खुशबू बहुत पसंद है। इसलिए जरूरी है कि इस दिन पूजा में इत्र की शीशी जरूर रखी जानी चाहिए।

हिंदू धर्म में इत्र का प्रयोग सदियों से होता रहा है। दिवाली के दिन इत्र लगाने से मन और वातावरण दोनों स्वच्छ और सकारात्मक बने रहते हैं। माना जाता है कि खुशबू नकारात्मक ऊर्जा को दूर करती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, लक्ष्मी माता की पूजा के समय घर में खुशबू फैलाना शुभ होता है और इससे धन और समृद्धि आती है।

Diwali 2025

Diwali 2025 की पूजा में करें इत्र का इस्तेमाल

⦁ दिवाली के दिन सुबह स्नान के बाद, स्वच्छ और सुगंधित इत्र लगाना शुभ माना जाता है। महिलाओं और पुरुषों दोनों के लिए यह परंपरा समान रूप से महत्वपूर्ण है।

⦁ इत्र केवल शरीर पर नहीं, बल्कि घर में भी लगाया जा सकता है। घर के मुख्य द्वार, पूजा स्थल और कमरे में इत्र की खुशबू से सकारात्मक वातावरण बनता है।

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⦁ ऐसी मान्यता है कि लक्ष्मी माता को भी इत्र की खुशबू पसंद है और इसलिए इस दिन घर में सुगंधी का छिड़काव किया जाता है। दिवाली पूजा की थाली में इत्र की शीशी रखनी चाहिए।

⦁ पूजा के बाद परिवार के सभी सदस्यों के शरीर पर इत्र का छिड़काव किया जाना चाहिए और घर के कोनों और अंतरों में भी इत्र जरूर छिड़कना चाहिए।

Itra का सनातन परंपरा में रहा है विशेष महत्व

विज्ञान के दृष्टिकोण से भी इत्र का प्रयोग फायदेमंद है। खुशबू मन को ताजगी देती है, मानसिक तनाव कम करती है और उत्सव का अनुभव और आनंद बढ़ाती है। इस प्रकार, इत्र न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि मानसिक और सामाजिक दृष्टि से भी दिवाली के लिए महत्वपूर्ण है। दिवाली पर इत्र लगाने की परंपरा शुद्धता, सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक सुकून का प्रतीक है। यह केवल एक खुशबू नहीं, बल्कि त्योहार के उल्लास और समृद्धि का प्रतीक भी है।

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