Dev Deepawali 2024: कार्तिक पूर्णिमा पर क्यों होता है दीपदान? क्या है मुहूर्त और महत्व?
Deepdaan Significane: आज कार्तिक पूर्णिमा है, आज का दिन बहुत पावन है, माना जाता है कि आज के दिन काशी के घाट पर सभी देवतागण उतरते हैं और मिलकर दीपक जलाते हैं, इसी कारण इसे 'देव दीपावली' का पर्व भी कहते हैं।
मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर नामक राक्षस का वध किया था, जिससे देवता अत्यंत प्रसन्न हुए और दीप प्रज्वलित करके उत्सव मनाया था इसी कारण इस दिन दिवाली बनाने की प्रथा है।

- आज के दिन हर किसी को दीपदान करना चाहिए,ऐसा करने से हर किसी को पुण्य प्राप्त होता है। इसे करने से व्यक्ति के पापों का नाश होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
- जल में दीपदान करने से पितरों को मुक्ति मिलती है और उनके आशीर्वाद से घर में सुख-शांति का वास होता है।
- दीपदान करने से परिवार में सौभाग्य आता है, आर्थिक समृद्धि होती है और स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं में सुधार होता है।
दीपदान मुहूर्त ( Deepdaan Muhurat)
आज दीपदान का मुहूर्त शाम को 5 बजकर 38 मिनट से 7 बजकर 03 मिनट तक है।
दीपदान कैसे करें?
- देव दीपावली के दिन गंगा या किसी पवित्र नदी में दीपदान करने की परंपरा है।
- घर के मंदिर में भी दीप जलाना शुभ माना जाता है।
- इसके लिए घी या तिल के तेल के दीपक का प्रयोग करना शुभ माना जाता है।
- इस प्रकार, देव दीपावली पर दीपदान करने से भगवान की कृपा प्राप्त होती है, और जीवन में सुख, शांति, एवं समृद्धि का आगमन होता है।
मां लक्ष्मी की आरती (Lakshmi ji ki Aarti)
- ओम जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
- तुमको निशिदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता॥
- ओम जय लक्ष्मी माता॥
- उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता।
- सूर्य-चंद्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥
- ओम जय लक्ष्मी माता॥
- दुर्गा रुप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता।
- जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥
- ओम जय लक्ष्मी माता॥
- तुम पाताल-निवासिनि, तुम ही शुभदाता।
- कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता॥
- ओम जय लक्ष्मी माता॥
- जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता।
- सब सम्भव हो जाता, मन नहीं घबराता॥
- ओम जय लक्ष्मी माता॥
- तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता।
- खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता॥
- ओम जय लक्ष्मी माता॥
- शुभ-गुण मंदिर सुंदर, क्षीरोदधि-जाता।
- रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता॥
- ओम जय लक्ष्मी माता॥
- महालक्ष्मीजी की आरती, जो कोई जन गाता।
- उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता॥
- ओम जय लक्ष्मी माता॥
DISCLAIMER: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है इसलिए किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले कृपया किसी जानकार ज्योतिष या पंडित की राय जरूर लें।












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