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Choti Diwali 2021: जानिए शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, मंत्र और नरक चतुर्दशी का महत्व

नई दिल्ली, 03 नवंबर। 5 दिवसीय दीपों के पर्व का दूसरा दिन छोटी दिवाली यानी नरक चतुर्दशी कहलाता है, जो कि आज है। इस दिन लोग अपने-अपने घरों में साफ-सफाई करते हैं और मेन डोर यानी कि मुख्य द्वार पर यम दीपक यानी कि तेल के दीपक जलाते हैं। कुछ पुराणों के मुताबिक नरक चतुर्दशी को प्रभु हनुमान का जन्मदिन माना जाता है, इसलिए आज के दिन बजरंगबली की भी पूजा की जाती है। आज के दिन मंदिरों में हनुमान जी का विशेष श्रृंगार होता है और लोग भजन-कीर्तन करते हैं।

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     Choti Diwali 2021: जानिए मुहूर्त और नरक चतुर्दशी का महत्व

    छोटी दिवाली का शुभ मुहूर्त

    • अनुष्ठान करने के लिए शुभ समय सुबह 05.40 बजे से 06.03 बजे तक है।
    • हनुमान जयंती की पूजा सुबह 9 बजकर 02 मिनट के बाद पूरे दिन कर सकते हैं।
    • यम दीपक जलाने के लिए शुभ समय शाम 6 बजे से लेकर रात 8 बजे तक।

    छोटी दिवाली पूजा विधि

    • नरक चतुर्दशी पर भक्त भगवान कृष्ण, मां काली, यम और प्रभु हनुमान से प्रार्थना करते हैं कि वो उन्हें अपने पिछले पापों की आत्मा को शुद्ध करने में मदद करें ताकि आने वाले जीवन में वो नरक में जाने से बच पाएं।
    • कहीं-कहीं नरकासुर का पुतला दहन भी किया जाता है।
    • भारत के विभिन्न हिस्सों में विभिन्न संस्कृतियों के बीच अनुष्ठान अलग-अलग हैं।
     Choti Diwali 2021: जानिए मुहूर्त और नरक चतुर्दशी का महत्व

    क्या है दिवाली' का अर्थ?

    दिवाली दीपों का पर्व है। दिवाली 'दिवाली' संस्कृत के दो शब्दों से मिलकर बना है । ये दो शब्द हैं 'दीप' और 'आवली' । 'दीप' का मतलब दीपक से है और 'आवली' का मतलब श्रृंखला से होता है। इसलिए दिवाली पर लोग दीपों को बहुतायत में जलाते हैं। दिवाली रोशनी और ज्ञान का त्योहार है। कहते हैं कि दीपक के जरिए इंसान को अपने अंदर की सारी निगेटिव चीजों का खत्म कर देना चाहिए और अपने अंदर ज्ञान का प्रकाश विद्यमान करना चाहिए।

     Choti Diwali 2021: जानिए मुहूर्त और नरक चतुर्दशी का महत्व

    नरक चतुर्दशी पर इन मंत्रों से कीजिए बजरंगबली को प्रसन्न

    • हनुमान बीज मंत्र: ॐ ऐं भ्रीम हनुमते, श्री राम दूताय नम:.
    • मनोजवं मारुतुल्यवेगं जितेंद्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्. वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये..
    • अतुलित बलधामं, हेमशैलाभदेहमं. दनुजवनकृशानुं, ज्ञानिनामग्रगण्यम्.
    • सकलगुण निधानं, वानराणामधीशम्. रघुपतिप्रिय भक्तं वातजातम् नमामि..
    • ओम नमो हनुमते रुद्रावतराय वज्रदेहाय वज्रनखाय वज्रसुखाय वज्ररोम्णे वज्रनेत्राय वज्रदंताय वज्रकराय वज्रभक्ताय रामदूताय स्वाहा.
    • ओम नमो हनुमते रुद्रावताराय सर्वशत्रुसहांरणाय सर्वरोगाय सर्ववशीकरणाय रामदूताय स्वाहा.
    • हनुमान अष्टदशाक्षर मंत्र: 'नमो भगवते आन्जनेयाये महाबलाये स्वाहा.

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