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Navratri 2025: नवरात्रि के नौ दिन मां दुर्गा को लगाएं ये अलग-अलग भोग

Chaitra Navratri 2023

Navratri 2025 Bhog: शारदीय नवरात्रि इस बार पूरे नौ दिनों की है। वैसे तो हर भक्त अपने पूरे सामार्थ्य के हिसाब से मां की पूजा करता है लेकिन माना जाता है कि नवरात्रि में मां के नौ रूपों को उनके रूप के हिसाब से ही अलग-अलग भोग लगाया जाना चाहिए, ऐसा करने से भक्त को व्रत का दूना फल मिलता है।

मां के अलग-अलग रूप को लगाएं अलग-अलग भोग

  • प्रथम रूप- मां शैलपुत्री - देसी घी से बनी मिठाई
  • दूसरा रूप- मां ब्रह्मचारिणी-चीनी और फल
  • तीसरा रूप- मां चंद्रघंटा-दूध, मिठाई और खीर
  • चौथा रूप- मां कुष्मांडा-मालपुए या दही
  • पांचवां रूप- मां स्कंदमाता-केला, पेड़ा, सौंफ
  • छठां रूप- मां कात्यायनी- शहद, लड्डू, दही
  • सातवां रूप- मां कालरात्रि- गुड़, पेड़ा, दही
  • आठवां रूप- मां महागौरी -नारियल, पेड़ा
  • नवां रूप- मां सिद्धिदात्री -तिल, सफेद लड्डू

इन बातों का रखें ख्याल

नवरात्रि की पूजा करने वाले भक्तों को नौ दिनों तक साफ-सफाई का खास ख्याल रखना चाहिए। घर में प्याज-लहसुन का प्रयोग नहीं करना चाहिए। मांसाहार भोजन ना खाना चाहिए और ना ही पकाना चाहिए। हो सके तो उपवास का भोजन और मां दुर्गा की भोग का प्रसाद घर में और खुद के हाथों से बनाना चाहिए।

भोग लगाते वक्त इन मंत्रों का करें जाप

  • त्वदीयं वस्तु गोविन्द तुभ्यमेव समर्पये ।
  • गृहाण सम्मुखो भूत्वा प्रसीद परमेश्वर ।।
  • सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते।।
  • ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी। दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते।।

इसके बाद मां की पूजा के लिए करें इन मंत्रों का जाप

  • या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता,
  • नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
  • या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता,
  • नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
  • या देवी सर्वभूतेषु तुष्टिरूपेण संस्थिता,
  • नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
  • या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता,
  • नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
  • या देवी सर्वभूतेषु दयारूपेण संस्थिता,
  • नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
  • या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता,
  • नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
  • या देवी सर्वभूतेषु शांतिरूपेण संस्थिता,
  • नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
  • सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
  • शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते।।

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