Bhagwat week 2022: भागवत सप्ताह 4 सितंबर से,जीवन के संकटों से मुक्ति दिलाती है भागवत
नई दिल्ली, 02 सितंबर। भागवत महापुराण हमारे 18 पुराणों में सर्वाधिक चर्चित और काम, क्रोध, लोभ, मोह से मुक्ति दिलाने वाली है। भागवत का श्रवण प्राणिमात्र को न केवल भौतिक जगह के झंझावातों से मुक्ति दिलाता है, बल्कि मनुष्य को सद्मार्ग पर ले जाकर ईश्वरीय सत्ता से निकटता का अनुभव भी करवाता है।

इसीलिए भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष में अष्टमी से पूर्णिमा तक भागवत सप्ताह का आयोजन किया जाता है। इस वर्ष भागवत सप्ताह 4 सितंबर 2022 से 10 सितंबर तक रहेगा। इन सात दिनों तक घरों, मंदिरों, मठों आदि जगह भागवत सप्ताह का आयोजन किया जाता है। भागवत सप्ताह का आयोजन पितृपक्ष में भी किया जाता है। इसके श्रवण-पठन से पितरों को शांति प्राप्त होती है।
भागवत महापुराण का महत्व
श्रीमद्भागवत महापुराण को सभी ग्रंथों का सार कहा गया है। भागवत को मुक्ति प्रदाता कहा गया है। इसकी कथा का श्रवण, पठन, मनन, दूसरों को सुनाने का बड़ा महत्व है। यह आत्मा को मुक्ति का मार्ग बताती है। भागवत के बारे में यहां तक कहा गया है कियदि कोई व्यक्ति किसी तीसरे व्यक्ति को भी भागवत कथा सुनने के लिए प्रेरित करता है तो पहले वाले व्यक्ति को भी पुण्य प्राप्त होता है। भागवत महापुराण में स्वयं महर्षि वशिष्ठ और महर्षि विश्वामित्र कहते हैं किभागवत सुनने का फल सभी पुण्यों, तप, तीर्थो की यात्रा के फल से भी अधिक प्राप्त होता है। भागवत कथा सुनने वाले के समस्त पितरों की शांति होती है। पितृ दोष समाप्त होता है। पृथ्वी पर जीवित रहते हुए उसे भगवत कृपा प्राप्त होती है और वह मनुष्य समस्त भोग करता है। मृत्यु के उपरांत पर परमधाम को प्राप्त होता है। भागवत पुराण का पठन-श्रवण करने से सभी 18 पुराणों का फल प्राप्त हो जाता है।
भागवत महापुराण के बारे में कुछ तथ्य
भागवत महापुराण में 12 स्कंध हैं और इनमें 332 अध्याय हैं। इसमें लगभग 18 हजार सूत्र बताए गए हैं।












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