RBI का ₹2.87 लाख करोड़ ‘खजाना’ बना सियासी संग्राम! हरपाल चीमा बोले- राज्यों का हिस्सा छीन रही BJP सरकार

Harpal Singh Cheema: भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI द्वारा केंद्र सरकार को रिकॉर्ड ₹2.87 लाख करोड़ का डिविडेंड ट्रांसफर किए जाने के बाद अब इस मुद्दे पर राजनीति तेज हो गई है। पंजाब के वित्त मंत्री और आम आदमी पार्टी नेता Harpal Singh Cheema ने केंद्र सरकार पर बड़ा हमला बोला है।

उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार RBI को "अपना निजी खजाना" बनाकर इस्तेमाल कर रही है, जबकि राज्यों को उनका उचित हिस्सा नहीं दिया जा रहा। चीमा ने कहा कि इतनी बड़ी रकम का लगातार ट्रांसफर देश के संघीय ढांचे और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए खतरे की घंटी है।

Harpal Singh Cheema

RBI का रिकॉर्ड डिविडेंड क्यों बना बड़ा मुद्दा? (Why RBI Dividend Has Sparked Political Row)

दरअसल, RBI ने मार्च 2026 में खत्म हुए वित्त वर्ष के लिए केंद्र सरकार को ₹2.87 लाख करोड़ का सरप्लस ट्रांसफर मंजूर किया है। यह अब तक का सबसे बड़ा डिविडेंड माना जा रहा है। मध्य पूर्व में जारी युद्ध, बढ़ती आयात लागत और सप्लाई चेन संकट के बीच यह रकम केंद्र सरकार के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है।

लेकिन विपक्षी दलों का सवाल है कि आखिर इतनी बड़ी राशि का फायदा सिर्फ केंद्र को ही क्यों मिले? हरपाल चीमा ने दावा किया कि 2014 से अब तक केंद्र सरकार RBI से करीब ₹14.29 लाख करोड़ ले चुकी है और इसमें आधे से ज्यादा पैसे पिछले तीन साल में निकाले गए हैं।

'राज्यों को उनका हक नहीं मिल रहा'

चीमा ने कहा कि भारत की आर्थिक व्यवस्था संघीय ढांचे पर आधारित है। हर राज्य टैक्स और आर्थिक गतिविधियों के जरिए देश की अर्थव्यवस्था में योगदान देता है। ऐसे में RBI के सरप्लस पर सिर्फ केंद्र का अधिकार नहीं हो सकता।

उन्होंने कहा कि राज्यों पर भी महंगाई, कल्याणकारी योजनाओं और बढ़ते खर्च का दबाव है। इसलिए इस तरह के "असाधारण आर्थिक लाभ" को राज्यों के साथ भी साझा किया जाना चाहिए। AAP नेता के मुताबिक, अगर राज्यों को उनका हिस्सा नहीं मिलता, तो इससे सहकारी संघवाद की भावना कमजोर होगी।

तीन साल में रिकॉर्ड ट्रांसफर ने बढ़ाई चिंता

हरपाल चीमा ने RBI से लगातार बढ़ते ट्रांसफर पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा:

  • 2023-24 में RBI ने ₹2.10 लाख करोड़ ट्रांसफर किए
  • 2024-25 में यह रकम ₹2.68 लाख करोड़ पहुंची
  • 2025-26 में यह बढ़कर ₹2.87 लाख करोड़ हो गई

उनका कहना है कि पहले इतनी बड़ी निकासी सिर्फ आर्थिक संकट या असाधारण परिस्थितियों में होती थी, लेकिन अब यह लगातार सामान्य प्रक्रिया बनती जा रही है। चीमा ने चेतावनी दी कि इससे RBI की दीर्घकालिक वित्तीय मजबूती और नीतिगत स्वतंत्रता पर असर पड़ सकता है।

'महंगाई कम नहीं हुई तो पैसा कहां गया?'

पंजाब के वित्त मंत्री ने केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि RBI से बार-बार बड़ी रकम मिलने के बावजूद आम लोगों को राहत नहीं मिली।

चीमा ने पूछा कि अगर केंद्र के पास इतना पैसा आ रहा है, तो फिर पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतें लगातार ऊंची क्यों बनी हुई हैं? महंगाई पर नियंत्रण क्यों नहीं दिख रहा? उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार देश के संघीय ढांचे को कमजोर कर रही है और आर्थिक मॉडल को पूरी तरह केंद्रीकृत बनाने की कोशिश कर रही है।

RBI की स्वायत्तता पर भी उठे सवाल

हरपाल चीमा ने कहा कि RBI सिर्फ एक बैंक नहीं, बल्कि देश की आर्थिक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है। संकट के समय यही संस्था अर्थव्यवस्था को स्थिर रखने में मदद करती है। उन्होंने कहा कि अगर लगातार RBI के रिजर्व से बड़ी रकम निकाली जाती रही, तो भविष्य में उसकी वित्तीय क्षमता कमजोर हो सकती है। इससे देश की आर्थिक "इम्युनिटी" पर असर पड़ सकता है।

चीमा ने RBI नेतृत्व से संस्थान की स्वायत्तता बचाने की अपील करते हुए कहा कि कमजोर केंद्रीय बैंक और आर्थिक रूप से दबाव झेल रहे राज्यों के साथ भारत मजबूत अर्थव्यवस्था नहीं बना सकता। अब RBI का यह रिकॉर्ड डिविडेंड सिर्फ आर्थिक मामला नहीं, बल्कि केंद्र बनाम राज्य की नई राजनीतिक बहस बन चुका है।

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