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पुत्र की दीर्घ आयु के लिए महिलाएं करती हैं बछबारस व्रत

By Pt. Gajendra Sharma
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नई दिल्ली। भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि को बछबारस या गोवत्स द्वादशी या वत्स द्वादशी कहा जाता है। इस माह बछबारस 27 अगस्त 2019 मंगलवार को आ रहा है। इस दिन पुत्रवती स्त्रियां व्रत रखती हैं और अपने पुत्रों के सुख और दीर्घायु की कामना करती हैं। इस दिन पुत्रों की पसंद के व्यंजन बनाए जाते हैं और उन्हें उपहार भी दिए जाते हैं। कहीं- कहीं माताएं पु़त्रों की नजर भी उतारती हैं। इस दिन स्त्रियां मंूग, मोठ और बाजरा अंकुरित कर गाय के बछड़े को खिलाती हैं। व्रती स्त्रियों को भी आहार में यही अन्न लेना होता है। इस दिन गाय का दूध सर्वथा वर्जित माना जाता है, केवल भैंस का दूध ही उपयोग में लिया जाता है।

बछबारस पर्व

बछबारस पर्व

बछबारस पर्व को मनाने के पीछे मान्यता है कि इस दिन श्रीकृष्ण पहली बार गाय चराने घर से बाहर निकले थे। यह माता यशोदा और पुत्र कृष्ण के बीच प्रेम के जीवंत उदाहरण का प्रतीक पर्व है। जैसा कि सभी जानते हैं, श्री कृष्ण माता यशोदा की आंख के तारे थे। माता यशोदा अपने प्यारे पुत्र को देखे बिना पल भर भी ना रह पाती थीं। पुत्र कृष्ण भी माता पर पूर्णभक्ति रखते थे और खेलने के बीच थोड़ी- थोड़ी देर में उनके पास एक चक्कर लगाना, उनसे दुलार पाना और प्यार जताना नहीं भूलते थे। ऐसे ही मां- बेटे के दिन प्रेम से कट रहे थे।

श्री कृष्ण ने भी गाय चराने जाने की हठ पकड़ ली

इस बीच श्री कृष्ण बड़े हो गए और उनके सारे मित्र ग्वाले गाय चराने जंगल में जाने लगे। अपने मित्रों को देख श्री कृष्ण ने भी गाय चराने जाने की हठ पकड़ ली। माता यशोदा इस सत्य से परिचित थीं कि आयु के अनुरूप पुत्र को घर से बाहर भेजना ही होगा। अपने पुत्र को इतनी देर बाहर भेजने के नाम से भी वे चिंतित थीं। ढेर टालमटोल के बाद आखिरकार भाद्रपद की कृष्ण पक्ष की द्वादशी को श्री कृष्ण का जंगल में गाय चराने जाना निश्चित किया गया।

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 माता यशोदा ने लाख जतन किए

माता यशोदा ने लाख जतन किए

पुत्र की चिंता में, उसे हर कष्ट से बचाने के लिए माता यशोदा ने लाख जतन किए। उनका लाडला इतनी देर घर से बाहर रहने वाला था इसलिए माता ने अपने पुत्र के पसंद के सारे व्यंजन बनाए। श्री कृष्ण मात्र माता यशोदा के लाड़ले ही ना थे। सारा गोकुल उन पर जान छिड़कता था। इसीलिए श्री कृष्ण के प्रथम वन गमन पर गोकुल गांव की प्रत्येक माता ने कृष्ण के प्रति दुलार प्रकट करने के लिए उनके पसंद के व्यंजन बनाए। श्री कृष्ण के साथ वन जाने वाली गायों और बछड़ों के लिए भी मूंग, मोठ और बाजरा अंकुरित किया गया।

गायों और बछड़ों का भी श्रंगार हुआ...

गायों और बछड़ों का भी श्रंगार हुआ...

सुबह यशोदा ने श्री कृष्ण को हर तरह से सुंदर सजाया और काला टीका लगाया। उन्होंने पूरे दिन खाने के लिए ढेर सारे व्यंजन श्री कृष्ण के साथ बांधे। उनके साथ ही ब्रज की सारी माताओं ने श्री कृष्ण के लिए व्यंजनों का ढेर लगा दिया। गायों और बछड़ों का भी श्रंगार हुआ और पूजा के बाद उन्हें अंकुरित अनाज खिलाया गया। इस तरह मां की ममता से ओत- प्रोत श्री कृष्ण का पहला गोवत्साचरण संपूर्ण हुआ। श्री कृष्ण के वापस आने तक गांव की किसी महिला ने उनकी चिंता में भोजन नहीं किया। गायों के लिए अंकुरित किए हुए अन्न पर ही उनका दिन कट गया। इस तरह बछबारस का व्रत अस्तित्व में आ गया।

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English summary
Bach Baras is a unique Hindu festival that is dedicated to worshipping the cows as a thanksgiving gesture for their help in sustaining the human life. It is also popularly known as Nandini Vrat and is observed on the Dwadashi of the Krishna Paksha in the Ashwin.
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