Bihar News: मिट्टी जांच में बिहार अग्रणी, दो वर्षों में 8 लाख नमूनों की जांच
बिहार 25 जिलों में 32 नई मिट्टी परीक्षण प्रयोगशालाओं, मोबाइल इकाइयों और सभी 38 जिलों में जिला-स्तरीय सुविधाओं के साथ मिट्टी स्वास्थ्य प्रबंधन में एक बड़ी प्रगति की रिपोर्ट करता है। यह पहल मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड के माध्यम से किसानों का समर्थन करती है, जिससे उर्वरकों का सटीक उपयोग, लागत की बचत और उच्च कृषि उपज संभव होती है।
बिहार ने मिट्टी जांच के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। कृषि विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, पिछले दो वित्तीय वर्षों में राज्य में करीब 8 लाख मिट्टी के नमूनों की जांच की गई है। इसमें वित्तीय वर्ष 2024-25 में 5 लाख और 2025-26 में 3 लाख नमूनों की जांच शामिल है। इस प्रदर्शन के साथ बिहार देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है, जहां मिट्टी के स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी जा रही है।

राज्य सरकार द्वारा कृषि विकास को गति देने के लिए मिट्टी जांच सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। वर्ष 2025-26 में 25 जिलों में अनुमंडल स्तर पर 32 नई मिट्टी जांच प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं, जबकि पहले से 14 प्रयोगशालाएं कार्यरत हैं।
किसानों को स्थानीय स्तर पर सुविधा उपलब्ध कराने के लिए राज्य के सभी 38 जिलों में जिला स्तरीय मिट्टी जांच प्रयोगशालाएं संचालित हैं। इसके अलावा प्रत्येक प्रमंडल में कुल 9 चलंत (मोबाइल) मिट्टी जांच प्रयोगशालाएं भी कार्यरत हैं। ग्राम स्तर पर 72 प्रयोगशालाओं के माध्यम से भी नमूनों की जांच की जा रही है।
मिट्टी जांच की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय प्रयोगशाला के साथ-साथ राज्य के कृषि विश्वविद्यालयों की प्रयोगशालाओं को रेफरल लैब के रूप में अधिसूचित किया गया है, जिससे जांच की विश्वसनीयता बनी रहे।
किसानों के लिए फायदेमंद पहल
मृदा स्वास्थ्य कार्ड किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज साबित हो रहा है। इसके माध्यम से उन्हें अपनी जमीन में मौजूद पोषक तत्वों की सटीक जानकारी मिलती है। इसी आधार पर संतुलित उर्वरक उपयोग की सलाह दी जाती है, जिससे अनावश्यक रासायनिक खादों के प्रयोग में कमी आती है। इससे न केवल फसल उत्पादन में वृद्धि हो रही है, बल्कि कृषि लागत भी घट रही है और किसानों की आय में इजाफा हो रहा है। यह पहल राज्य में कृषि क्षेत्र में एक सकारात्मक बदलाव के रूप में उभर रही है।
12 पैरामीटर पर जांच
राज्य की प्रयोगशालाओं में मिट्टी के नमूनों का विश्लेषण 12 मानकों—pH, EC, OC, नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश, जिंक, कॉपर, मैंगनीज, आयरन, सल्फर और बोरॉन—पर किया जाता है। नमूना संग्रह प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए सॉफ्टवेयर आधारित प्रणाली अपनाई गई है, जिसमें खेत की लोकेशन और फोटो सहित सभी विवरण दर्ज किए जाते हैं।
मोबाइल पर मिल रहा मृदा स्वास्थ्य कार्ड
किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड अब डिजिटल माध्यम से भी उपलब्ध कराया जा रहा है। व्हाट्सएप के जरिए भेजे जा रहे इस कार्ड में 100 से अधिक फसलों के लिए उर्वरक संबंधी सिफारिशें दी जाती हैं। इस कार्ड की वैधता तीन वर्षों तक होती है, जिससे किसान समय-समय पर अपनी खेती की योजना बेहतर तरीके से बना सकें।












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