Vaishakh Amavasya 2020: लॉकडाउन में घर में ही प्राप्त करें नदियों में स्नान का पुण्य फल
नई दिल्ली। वैशाख माह का हिंदू धर्म में विशेष महत्व होता है। यह माह भगवान विष्णु की आराधना भक्ति का माह होता है। इसमें किए गए पुण्य कर्म व्यक्ति को जीवित रहते हुए समस्त सांसारिक सुख प्रदान करते हैं और मृत्यु के बाद बैकुंठधाम की प्राप्ति करवाते हैं। कहा जाता है इसी माह से त्रेता युग का आरंभ हुआ था, इसलिए इस माह की महत्ता और भी बढ़ जाती है। इस माह का प्रत्येक दिन विशेष पुण्यदायी होता है और अमावस्या तो अपने आप में अत्यंत फलदायी होती है। वैशाख अमावस्या के दिन दान-पुण्य, स्नान, दीपदान और पितरों के निमित्त तर्पण करने का खास महत्व होता है। साथ ही कालसर्प दोष से मुक्ति, शनि की शांति, अन्य ग्रह दोषों से मुक्ति के लिए इस दिन पूजा आदि करना चाहिए। वैशाख अमावस्या 22 अप्रैल 2020 बुधवार को आ रही है।

कैसे करें घर में स्नान
कोरोना वायरस के कारण चल रहे लॉकडाउन के चलते बाहर किसी नदी में स्नान करना तो संभव नहीं होगा। इसलिए अपने घर में ही वैशाख अमावस्या का पूर्ण फल प्राप्त किया जा सकता है। इसके लिए प्रातःकाल सूर्योदय के समय उठें। दैनिक शौचादि से निवृत्त होकर अपने नहाने के जल में नर्मदा, गंगा आदि जिस भी पवित्र नदी का जल आपके घर में उपलब्ध हो, वो डाल लें। साथ में थोड़े से तिल भी डाल लें। यदि आपके घर में किसी भी पवित्र नदी का जल उपलब्ध ना हो तो निम्न मंत्र का उच्चारण करें-
गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वती नर्मदे सिंधु कावेरी जलेस्मिन् सन्निधिं कुरु।।
इसका अर्थ है हमारे जल में गंगा, यमुना, गोदावरी, सरस्वती, नर्मदा, सिंधु और कावेरी इन सप्त नदियों का जल समाहित हो जाए।

क्या करें वैशाख अमावस्या के दिन
- वैशाख अमावस्या के दिन व्रत करना चाहिए। इससे संयम, आत्मबल और आत्मविश्वास प्राप्त होता है।
- इस अमावस्या के दिन स्नान के जल में तिल डालकर स्नान करने से शनि के दोषों से मुक्ति मिलती है।
- इस दिन नहाते समय जल में यदि अपने दाहिने हाथ की तर्जनी अंगुली से त्रिकोण बनाया जाए तो धन की कमी दूर होती है।
- इस दिन पितरों के निमित्त तर्पण करना चाहिए। इससे उन्हें मुक्ति मिलती है।
- पितृ दोष के निवारण के लिए वैशाख अमावस्या के दिन पितरों के नाम से गरीबों को भोजन करवाएं।
- इस दिन स्नान करके सूर्य को जल में तिल डालकर अर्घ्य देने से ग्रह दोष दूर होते हैं।
- दक्षिण भारत में वैशाख अमावस्या पर शनि जयंती भी मनाई जाती है। इसलिए इस दिन शनि की पूजा आराधना करना चाहिए।
- वैशाख अमावस्या के दिन प्रदोषकाल में दीपदान करने से अकाल मृत्यु को टाला जा सकता है।
- वैशाख अमावस्या पर प्रदोषकाल में पीपल के पेड़ के नीचे सात दीपक जलाने से रोग मुक्ति होती है।

वैशाख अमावस्या से जुड़ी पौराणिक कथा
प्राचीन काल में धर्मवर्ण नाम का एक ब्राह्मण था। वह बहुत ही धार्मिक और ऋषि-मुनियों का आदर करने वाला व्यक्ति था। एक बार उसने किसी महात्मा के प्रवचन में सुना कि कलयुग में भगवान विष्णु के नाम स्मरण से ज्यादा पुण्य किसी भी कार्य में नहीं है। धर्मवर्ण ने इस बात को आत्मसात कर लिया और सांसारिक जीवन छोड़कर संन्यास ले लिया। एक दिन भ्रमण करते हुए वह पितृलोक पहुंच गया। वहां धर्मवर्ण के पितर बहुत कष्ट में थे। पितरों ने उसे बताया कि उनकी ऐसी हालत तुम्हारे संन्यास के कारण हुई है। क्योंकि अब उनके लिए पिंडदान करने वाला कोई शेष नहीं है। यदि तुम वापस जाकर गृहस्थ जीवन की शुरुआत करो, संतान उत्पन्न करो तो हमें मुक्ति मिल सकती है। साथ ही वैशाख अमावस्या के दिन विधि-विधान से पिंडदान करो। धर्मवर्ण ने उन्हें वचन दिया कि वह उनकी अपेक्षाओं को अवश्य पूर्ण करेगा। इसके बाद धर्मवर्ण ने संन्यासी जीवन छोड़कर पुनः सांसारिक जीवन को अपनाया और वैशाख अमावस्या पर विधि विधान से पिंडदान कर अपने पितरों को मुक्ति दिलाई।












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