उत्तराखंड सरकार की 'नो पेंडेसी' की नीति, सीएम की 200 में से 138 घोषणाओं में शासनादेश

देहरादून, 7 सितंबर: विकास योजनाओं के क्रियान्वयन और आमजन की समस्याओं के निस्तारण के मद्देनजर धामी सरकार की 'नो पेंडेसी' की नीति को अमल में उतारने के लिए सिस्टम भी सक्रिय हो गया है। इस कड़ी में मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव आनंद वर्द्धन ने सोमवार को शहरी विकास से संबंधित मुख्यमंत्री की घोषणाओं की समीक्षा की। बताया गया कि शहरी विकास विभाग के तहत 200 घोषणाएं हुई, जिनमें से 138 में शासनादेश जारी किए जा चुके हैं। 62 घोषणाओं में कार्यवाही चल रही है और इनमें से 15 के प्रस्ताव शासन को प्राप्त हो चुके हैं। अपर मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि मुख्यमंत्री कार्यालय को संदर्भित छह घोषणाओं के शासनादेश एक सप्ताह के भीतर जारी कर दिए जाएं।

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अपर मुख्य सचिव ने विभिन्न नगर निकायों के गठन व विस्तारीकरण से संबंधित घोषणाओं पर समयबद्ध रूप से प्रस्ताव तैयार करने पर जोर दिया, ताकि इस बारे में सक्षम स्तर से निर्णय लिया जा सके। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि शासन स्तर से घोषणाओं के क्रियान्वयन की कार्यवाही तीन माह में पूरी कर ली जाए। उन्होंने कहा कि नगर निकायों में प्रस्तावित नाली निर्माण से जुड़ी बड़ी लागत परियोजनाओं के लिए सिंचाई विभाग को कार्यदायी संस्था नामित करते हुए कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि शहरी विकास विभाग को आवंटित ऐसी घोषणाएं, जो अन्य विभागों को स्थानांतरित की जानी हैं, उन्हें तीन दिन के भीतर स्थानांतरित कर दिया जाए।

ट्रेंचिंग ग्राउंड का शासनादेश माहभर में

अपर मुख्य सचिव ने ऋषिकेश में कूड़ा निस्तारण के लिए ट्रेंचिंग ग्राउंड की व्यवस्था संबंधी घोषणा पर एक माह के भीतर शासनादेश निर्गत करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने खांड गांव को नगर पालिका क्षेत्र में शामिल करने पर सहमति दी। साथ ही कृष्णानगर के मामले में कहा कि यह वन क्षेत्र में बसा है और राजस्व ग्राम नहीं है। इसे पालिका क्षेत्र में शामिल किया जा सकता है या नहीं, इस बारे में सप्ताहभर के भीतर मुख्यमंत्री कार्यालय को अवगत कराया जाए।

धारचूला के आपदा प्रभावित क्षेत्र के लिए कार्ययोजना 15 दिन में

अपर मुख्य सचिव ने सिंचाई विभाग से संबंधित मुख्यमंत्री की घोषणाओं की समीक्षा भी की। उन्होंने पिथौरागढ़ जिले के अंतर्गत धारचूला के आपदा प्रभावित क्षेत्र में बाढ़ सुरक्षा के लिए अविलंब कार्ययोजना बनाने के निर्देश सिंचाई विभाग को दिए। साथ ही कहा कि 15 दिन के भीतर कार्ययोजना की वित्तीय एवं प्रशासनिक स्वीकृति सुनिश्चित की जाए। उन्होंने टिहरी के विधायक से समन्वय स्थापित कर कोटी (टिहरी) में घाट निर्माण संबंधी घोषणा का क्रियान्वयन कराने को भी कहा। साथ ही भगवानपुर क्षेत्र में पानी की निकासी के लिए प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए।

समीक्षा के दौरान अपर मुख्य सचिव को बताया गया कि सिंचाई विभाग के तहत मुख्यमंत्री की 222 घोषणाएं हुई हैं, जिनमें से 133 में शासनादेश हो चुके हैं और 90 में कार्यवाही चल रही है। अपर मुख्य सचिव ने नाबार्ड से वित्त पोषित घोषणाओं में इसी माह शासनादेश जारी करने, 50 फीसद से अधिक भौतिक प्रगति वाली घोषणाओं को नवंबर तक पूर्ण कराने, 25 फीसद से अधिक और 50 फीसद से कम भौतिक प्रगति वाली घोषणाओं को मार्च 2022 तक पूर्ण कराने और शेष घोषणाओं की वित्तीय व प्रशासनिक स्वीकृति इसी माह के अंत तक निर्गत कराने संबंधी निर्देश भी दिए।

अपर मुख्य सचिव ने कहा कि ऐसी घोषणाएं, जिनमें बजट की व्यवस्था उपलब्ध नहीं है और अन्य स्रोतों से भी वित्त पोषण नहीं हो रहा है एवं लागत एक करोड़ के लगभग हो तो ऐसे प्रस्ताव मुख्यमंत्री घोषणा सेल को प्रेषित किए जाएं।

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