उत्तराखंड सरकार का बड़ा फैसला, मेडिकल फैकल्टी के 501 नए पद मंजूर
देहरादून, 15 जुलाई: उत्तराखंड के तीन सरकारी मेडिकल कालेजों में एमबीबीएस व पीजी सीटों को बढ़ाने के साथ ही इलाज की सुविधाएं बेहतर बनाने के लिए पुष्कर सिंह धामी मंत्रिमंडल ने बड़ा कदम उठाया है। तीनों कॉलेजों श्रीनगर, देहरादून और हल्द्वानी में मेडिकल फैकल्टी के 501 नए पद मंजूर किए गए हैं। साथ ही श्रीनगर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सुपर स्पेशिलिटी सेवाएं शुरू करने का अहम निर्णय भी लिया गया है।

कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने बताया कि श्रीनगर, दून और हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस के साथ ही पीजी की सीटों को बढ़ाया जाना है। राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) के मानकों के मुताबिक पीजी सीट के लिए 30 फीसद अतिरिक्त पदों का सृजन आवश्यक है। इसके मुताबिक प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर व असिस्टेंट प्रोफेसर के पद बढ़ाए गए हैं। उन्होंने बताया कि श्रीनगर मेडिकल कॉलेज के लिए 122, देहरादून के लिए 250 जबकि हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज के लिए 129 पद फैकल्टी के मंजूर किए गए हैं।
श्रीनगर बेस अस्पताल में अब मिलेंगी सुपर स्पेशलिटी सेवाएं
मंत्रिमंडल ने श्रीनगर मेडिकल कॉलेज के बेस अस्पताल में सुपर स्पेशिलिटी सेवाएं शुरू करने के लिए 44 पद स्वीकृत किए गए हैं। इसमें प्रोफेसर के पांच, एसोसिएट प्रोफेसर के पांच, असिस्टेंट प्रोफेसर के पांच, सीनियर रेजीडेंट के पांच, सीनियर रेजीडेंट न्यूरो एनेस्थीसिया का एक, सीनियर रेजीडेंट एनेस्थीसिया का एक, सिस्टर इंचार्ज के पांच, स्टाफ नर्स के दस, एक्सरे टेक्नीशियन के तीन, ओटी टेक्नीशियन के दो और टेक्नीशियन का एक पद स्वीकृत हुआ है।
मेडिकल कॉलेजों में स्वीकृत 501 पदों का ब्यौरा
प्रोफेसर के 41, एसोसिएट प्रोफेसर के 97, असिस्टेंट प्रोफेसर के 165, सीनियर रेजीडेंट के 92, जूनियर रेजीडेंट के 59, ट्यूटर के 35, रिसर्च साइंटिस्ट के छह और मेडिकल आफिसर के भी छह पद मंजूर किए गए हैं।
कैबिनेट के अन्य फैसले
- लखवाड़ व्यासी जल विद्युत परियोजना को रेशम विभाग की 14.50 एकड़ भूमि का आवंटन निरस्त, यह भूमि रेशम विभाग के पास रहेगी।
- जिला बार एसोसिएशन बागेश्वर को जिला न्यायालय परिसर में अधिवक्ता चैंबर्स निर्माण को न्याय विभाग की 40.80 वर्ग मीटर की भूमि निश्शुल्क लीज पर देने को स्वीकृति।
- कैंपा अधिसूचना के अंतर्गत प्राधिकरण के वार्षिक लेखा वित्तीय वर्ष 2013-14, 2014-15, 2015-16, 2016-17 को विधानमंडल के पटल पर रखने का निर्णय।












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