बिहार में बच्चों की बेहतर शिक्षा सुविधा के लिए नीतीश सरकार का बड़ा कदम

पटना। भारत सरकार की नई शिक्षा नीति में बजट का 6 फीसदी हिस्सा शिक्षा पर खर्च करने की बात है, लेकिन बिहार एक ऐसा राज्य है जहां कुल बजट का 20 फीसदी हिस्सा शिक्षा पर खर्च होता है। बावजूद प्राथमिक स्कूलों में खासकर क्लास 3 तक के बच्चों की पढ़ाई और उनके सीखने की क्षमता पर सवाल उठ रहे हैं। अब शिक्षा विभाग ने तीन एजेंसियों के साथ समझौता किया है। आज सेंटर फॉर हेल्थ पॉलिसी, मंत्रा फॉर चेंज और सेंट्रल स्कवॉयर फांउडेशन के बीच समझौता हुआ है। अब तीनों एजेंसियां बिना किसी शुल्क के बिहार के बच्चों के बीच अपने अनुभव साझा करेंगी।

nitish government take bog step for education

शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार के मुताबिक, बजट का एक बड़ा हिस्सा शिक्षा पर खर्च होता है। बावजूद प्राथमिक स्कूलों के बच्चों में गुणात्मक सुधार नहीं देखा गया है। अब ये तीनों एजेंसियां अपने अनुभव का लाभ बच्चों को देंगी।

दरअसल, बिहार के स्कूलों में 2 करोड़ से अधिक छात्र और छात्राएं पढ़ाई करते हैं, लेकिन इनमें लाखों की संख्या में ऐेसे बच्चे हैं जिनके माता-पिता पढ़े नहीं होते हैं। लिहाजा प्राथमिक शिक्षा खासकर क्लास तीन के बच्चे सीखने और पढ़ने में पीछे रह जाते हैं। अब शिक्षा विभाग ने तीन एजेंसियों से समझौता किया है।

ये तीन एजेंसियां हैं
पहला- आंद्री स्थित सेंटर फॉर हेल्थ पॉलिसी यानि सीएचपी
दूसरा- बैंगलुरू स्थित एनजीओ मंत्रा फॉर चेंज
तीसरा- सेंट्रल स्कवॉयर फांउडेशन

एक नजर शिक्षा विभाग के बजट पर
बिहार सरकार अपने बजट का 20 फीसदी हिस्सा शिक्षा पर खर्च करती है। साल 2020-21 में शिक्षा विभाग का बजट करीब 37 हजार करोड़ रूपए है। 61 प्रतिशत प्राथमिक शिक्षा पर खर्च करती है और उच्च शिक्षा पर मात्र 14 प्रतिशत ही खर्च किए जाते हैं।

CHP देगी शोध व विश्लेषणवादी सलाह
इन तीनों एजेंसियों के बीच काम बांट दिया गया है जिसके हिसाब से सीएचपी मुख्य रूप से शिक्षा विभाग के जरिए वित्तपोषित या स्वास्थ्य और जेंडर संबंधी योजना पर काम करेगा। इसके साथ ही सीएचपी (CHP) विभाग को जरूरत के मुताबिक शोध और विश्लेषणवाली सलाह देगा।

मंत्रा फॉर चेंज मुख्य रूप से शिक्षा विभाग के जरिए जिला शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों यानि डाइट में कार्यरत शिक्षकों की क्षमता बढ़ाएगा। इसके लिए टीचर ट्रेनिंग मॉड्यूल (Teacher Training module) में सहयोग लिया जाएगा भाषा ज्ञान और अंक ज्ञान पर होगा काम।

तीसरी एजेंसी सेंट्रल स्कवॉयर फांउडेशन (Central square Foundation) शिक्षा विभाग के जरिए प्राथमिक स्कूलों खासकर क्लास एक से लेकर तीन के बच्चों को भाषा ज्ञान और अंक ज्ञान विकसित करने की जानकारी देगा। बच्चों को गणित की नई विधाओं से जवाब देने की क्षमता बढ़ाने का काम भी सेंट्रल स्कवॉयर फांउडेशन करेगा।

शिक्षा विभाग में माध्यमिक शिक्षा विभाग के उपनिदेशक अमित कुमार के मुताबिक, तीनों एजेंसियां बिना किसी फीस के ही अपने तजुर्बे बिहार के बच्चों के बीच बांटेंगी। काफी दिनों से हम ऐसा चाह रहे थे। निश्चित रूप से बिहार में बजट का बड़ा हिस्सा शिक्षा पर खर्च करते हैं लेकिन हम छोटे बच्चों को किसी भी रूप में कमजोर नहीं होना देना चाहते हैं।

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