मध्य प्रदेश: जल्द शुरू होगी किचन गार्डन योजना, एक जून को कैबिनेट में पेश होगी पोषण नीति
भोपाल, 31 मई। मध्य प्रदेश के लोगों को स्वस्थ और बीमारी के खिलाफ मजबूत इम्यून सिस्टम देने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सराहनीय कदम उठाया है। प्रदेश में स्वास्थ्य और पोषण के स्तर में सुधार लाने के लिए सरकार दस साल के लिए पोषण नीति लागू करेगी। किसान परिवारों में कुपोषण को मिटाने के लिए पौष्टिक आहार उगाने के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा और परिवार की महिलाओं को जागरूक किया जाएगा। किचन गार्डन योजना के तहत किसानों को फल-सब्जी के पौधे व बीज बांटे जाएंगे। शहरी क्षेत्रों में स्व-सहायता समूहों को पोषण जागरुकता तथा अन्नपूर्णा पंचायत जैसे कार्यक्रमों में शामिल किया जाएगा। नीति एक जून को प्रस्तावित कैबिनेट बैठक में प्रस्तुत की जाएगी।

महिला एवं बाल विकास विभाग ने कुपोषण की रोकथाम के लिए पोषण नीति 2020-30 तैयार की है। इसमें किसानों को कुपोषण मिटाने के लिए बड़ी भूमिका देना प्रस्तावित किया गया है। इसके तहत किसान परिवार की महिलाओं को प्रशिक्षण देकर पोषाहार के बारे में जागरूक किया जाएगा ताकि महिला के साथ-साथ घर के बच्चों का शारीरिक व मानसिक विकास हो सके।
किचन गार्डन को बढ़ावा देने के लिए कृषि और उद्यानिकी विभाग फल और सब्जी के पौधे एवं बीज वितरित करेगा। अनुसूचित जनजाति परिवारों को प्राथमिकता से शामिल किया जाएगा। इन्हें नियमित प्रशिक्षण के माध्यम से पौष्टिक आहार उगाने एवं ग्रहण करने के लिए जागरूक किया जाएगा।
जैविक खेती को बढ़ावा देने रासायनिक खाद एवं कीटनाशक के उपयोग को कम करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। इसके अलावा नगर निगम के अंतर्गत आने वाले स्कूलों को पोषण जागरुकता आधारित शिक्षा के कार्यक्रमों में शामिल किया जाएगा। दीनदयाल अंत्योदय राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के अंतर्गत संचालित लगभग 25 हजार समूहों को पोषण जागरुकता तथा अन्नपूर्णा पंचायत जैसे कार्यक्रमों में भागीदार बनाया जाएगा।
यह भी पढ़ें: मध्य प्रदेश की शिवराज सिंह चौहान सरकार ने राष्ट्रीय पेंशन योजना में अपना योगदान चार प्रतिशत बढ़ाया
विभागीय अधिकारियों ने बताया कि प्राकृतिक आपदा व कोविड-19 जैसी महामारी की स्थितियों में आंगनवाड़ी सेवा और सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था के माध्यम से पोषण की देखभाल के लिए गाइडलाइन तैयार की जाएगी। अन्नपूर्णा पंचायतों के माध्यम से सामुदायिक पोषण को ध्यान में रखकर स्थानीय स्तर पर मनाए जाने वाले त्योहारों एवं उत्सवों की रसोई व व्यंजन को साझा करने की पहल की जाएगी। मनरेगा के माध्यम से कुपोषित बच्चों के परिवारों को सार्थक रोजगार सुनिश्चित किया जाएगा। अति कुपोषित बच्चों के परिवार को कम से कम दो सौ दिन का रोजगार भी सुनिश्चित किया जाएगा।












Click it and Unblock the Notifications