हरियाणा सरकार गरवा में बनवाएगी मछली पालन केंद्र, 25 एकड़ भूमि पर ऐसे होगा तैयार
भिवानी। हरियाणा के भिवानी जिले में बहल के निकट गांव गरवा में 25 एकड़ भूमि पर मछली पालन के लिए उत्कृष्ट केंद्र बनाया जाएगा। इस केंद्र को बनाने में 25 करोड़ की लागत आएगी। राज्य सरकार की ओर से बताया गया है कि, इस केंद्र में मछली पालन के प्रशिक्षण के साथ साथ फीड मैनेजमेंट, बीज तथा कोल्ड स्टोरेज व प्रोसेसिग यूनिट की व्यवस्था की जाएगी।

कृषि एवं पशुपालन मंत्री जेपी दलाल रविवार को बहल में 55 लाख रुपये की लागत से बनाई गई मिट्टी-पानी जांच लैब के उद्घाटन अवसर पर ग्रामीणों को संबोधित कर रहे थे। इससे पूर्व उन्होंने सिवानी स्थित श्रीकृष्ण प्रणामी धर्मशाला में मत्स्य पालन विभाग द्वारा झींगा मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए आयोजित किए गए प्रशिक्षण शिविर उद्घाटन किया।
कृषि एवं पशुपालन मंत्री जेपी दलाल ने कहा कि प्रदेश की दस लाख एकड़ बंजर भूमि पर मछली पालन से आय बढ़ाने व रोजगार की अपार संभावनाएं है। इसलिए राज्य सरकार प्रदेश में ऐसी जमीन पर मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए कारगर कदम उठा रही है। विभाग द्वारा प्रदेश में गैर कृषि क्षेत्र भूमि पर मत्स्य पालन से जुड़ी अनेक महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को शुरू किया जाएगा ताकि बेरोजगार युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के साथ मत्स्य पालक किसानों की वर्ष 2022 तक आमदनी को दोगुना किया जा सके।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा प्रदेश में नीली क्रांति को बढ़ावा देने के लिए तथा प्रधान मंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत आधुनिक तकनीक पर आधारित विभिन्न योजनाओं एवं कार्यक्रमों को शुरू किया गया है। इस रेतीले क्षेत्र में झींगा मछली पालन की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने बताया कि सिवानी क्षेत्र के गांव गरवा में 25 करोड़ रुपये की लागत से 25 एकड़ भूमि पर झींगा मछली पालन का कार्य शुरू किया जाएगा। जींद, झज्जर, चरखी दादरी, रोहतक, सोनीपत, पलवल, हिसार, फतेहाबाद तथा भिवानी इस तरह की योजनाएं शुरू की जाएंगी।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा मत्स्य पालन से जुड़ी विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत सामान्य वर्ग के मत्स्य पालक किसानों को 40 फीसद तथा अनुसूचित जाति के किसानों को 60 प्रतिशत तक का अनुदान दिया जा रहा है।
कृषि मंत्री ने सिधनवा से रोढा सड़क मार्ग को 18 फुट चौड़ा करने के लिए निर्देश दिए। कार्यक्रम में लाहली से मत्स्य संस्थान से डा. पंकज, श्रीधरन, उप निदेशक ईश्वर सिंह, डीएफओ जींद दिलबाग सिंह, पूर्व सरपंच राजेंद्र खेड़ा, सुनील मिठ्ठी, कुलदीप पायल झुप्पा तथा आईआईटी के इंजीनियर पुरोहिल ने अपने विचार रखे।












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