सड़क सुरक्षा प्राधिकरण वाला भारत का दूसरा राज्य बना गुजरात, लोगों को क्या होंगे फायदे? जानिए
अहमदाबाद। गुजरात सड़क सुरक्षा प्राधिकरण का गठन करने वाला दूसरा राज्य बना है। ऐसा गुजरात सडक़ सुरक्षा प्राधिकरण विधेयक-2018 पारित होने के लगभग तीन साल बाद संभव हुआ है। दरअसल, उस दौरान राज्य विधानसभा में इसे लेकर एक विधेयक पारित किया गया था। फिर कार्यकारी समिति के सदस्यों की नियुक्ति के साथ, प्राधिकरण का गठन दिसंबर 2020 गुजरने के दौरान किया गया। सरकार की ओर बताया गया है कि, गुजरात कैडर के सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी एल पी पडलिया को इसके पहले प्रमुख के रूप में नियुक्त किया गया है। विशेषज्ञों ने कहा कि, केरल के बाद, गुजरात भारत में दूसरा राज्य बन गया, जिसने रोड सेफ्टी प्राधिकरण की स्थापना की। यह सरकार के विभिन्न तंत्रों के बीच एक सेतु का काम करेगा।
बता दिया जाए कि, जिस वक्त विधानसभा में ये विधेयक लाया गया, तो विधेयक को पेश करते हुए परिवहन मंत्री आर.सी. फळदू ने कहा था कि, इसमें ऐसे प्रावधान हैं कि दोषी पर एक लाख रुपए तक का दंड लगाया जा सकता है। उन्होंने बताया था कि, इस विधेयक से राज्य में सडक़ सुरक्षा कार्यक्रमों के अमलीकरण के लिए सुरक्षा प्राधिकरण का गठन करने तथा सडक़ सुरक्षा के लिए मुख्य एजेंसी के रूप में कार्य करने के लिए, सडक़ सुरक्षा फंड की स्थापना के लिए तथा इससे जुड़ी अन्य मुद्दों का प्रावधान किया गया है। अतः इस कानून का मकसद फोर-ई नियम से सड़क सुरक्षा सुनिश्चित कराना है। इसके अंतर्गत इंजीनियरिंग, प्रवर्तन, शिक्षा, पर्यावरण और आपातकालीन सेवाएं भी आएंगी।
पडलिया ने कहा कि, इस प्राधिकरण के प्रयासों के माध्यम से सरकार राज्य में सड़क यातायात दुर्घटनाओं और मृत्यु दर को कम करने के लिए प्रतिबद्ध है।'

गौरतलब है कि, राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार, 2019 में गुजरात में 16,503 दुर्घटनाओं में 7,428 लोगों की मौत दर्ज की गई थी, जबकि 15,976 लोग घायल हुए थे। बढ़ते हादसों की वजह से सरकार की अक्सर आलोचना होती थी। आलोचना अक्सर इस तथ्य की ओर इशारा करती थी कि विभाग के अधिकारी सड़कों और इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर नहीं हैं। सड़कों से संबंधित मुद्दों की बात करते वक्त पुलिस पर भी सवाल उठते थे।
प्राधिकरण के एक सदस्य ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि, यह प्राधिकरण गठित होने के बाद से हम उम्मीद कर रहे हैं कि शहरी क्षेत्रों में उच्च यातायात घनत्व और राजमार्गों पर बेहतर समन्वय और सामंजस्यपूर्ण नियोजन होगा। जहां घातक घटनाएं सामने आती हैं, वे कम होंगी।''
उन्होंने कहा कि, अब नागरिक अपनी समस्याओं के बारे में जिला-स्तर की समितियों या प्राधिकरण से सीधे संपर्क कर सकते हैं।'












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