CSU और माधव गणित केन्द्र के बीच भारतीय प्राचीन गणित पर शोध को लेकर अकादमिक समझौता
केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय दिल्ली तथा माधव गणित केन्द्र ,शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास ,नयी दिल्ली के बीच एक आकादमिक करार संपन्न हुआ। कुलपति प्रो वरखेड़ी ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि इसका लक्ष्य विविध विद्या शाखाओं को भारतीय ज्ञान परम्परा की दृष्टि से विशेष कर भारत की प्राचीन गणित परम्परा को प्रकाश में लाना है।
उन्होंने यह भी कहा कि इससे जुड़ी सामग्री संकलन के व्यय के अतिरिक्त इससे जुड़े शोध छात्र छात्राओं को द्वीगुणित छात्रवृत्ति ₹16000 प्रति माह दी जाएगी। इसके कार्यान्वयन हेतु सीएसयू के गुरुवायूर परिसर (केरला) को इपिक केन्द्र बनाया जाएगा, जो केरल के लब्धप्रतिष्ठ गणितज्ञ माधव के नाम पर स्थापित एनजीओ संचालित 'माधव शोध केन्द्र ' मिल कर कार्य करेगा।

प्रो वरखेड़ी ने आगे यह भी कहा कि यह मेरा तथा केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय का दृढ़ संकल्प है कि भारतीय ज्ञान परम्परा को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक रुप में उजागर किया जा सके । अपने इस विश्वविद्यालय में गंभीर शास्त्र ,उसकी गहन शिक्षा तथा इन दोनों की मूल समन्वित संस्कृति का जीवन्त वातावरण भी है । उसी का परिणाम है कि इसे नैक द्वारा ए++ ग्रेड दिया गया है जो भारत के संस्कृत विश्वविद्यालयों में यह सर्वोत्कृष्ट है।
उन्होंने यह भी कहा कि जब लोग मुझ से संस्कृत की सुरक्षा की बातें करते हैं तो मैं उन्हें स्पष्ट कहता हूं कि ऐसी चिंता किसी को करने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि संस्कृत में ही भारत के साथ साथ विश्व का भविष्य सन्निहित है । अतः यह सोचने की बात है कि जब संस्कृत ही नहीं रहेगी तो देश या दुनिया का क्या होगा ?
शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सचिव तथा जाने माने शिक्षाविद् डा अतुल कोठारी ,मुख्य अतिथि के रुप में बोलते हुए कहा कि आईकेएस पर कार्य करने से एन.ई .पी.2020 के अधिकांश लक्ष्यों को पूरा किया जा सकता है जिसके लिए संस्कृत बहुत ही महत्त्वपूर्ण है और सच तो यह है कि संस्कृत भाषा के बिना सही अर्थों में भारतीय ज्ञान परम्परा का कार्य हो ही नहीं सकता ।
उन्होंने आगे यह भी कहा कि यह बहुत ही हर्ष का विषय है संस्कृत का देश का सबसे बड़ा तथा लब्धप्रतिष्ठ केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय , दिल्ली के साथ यह करार किया गया है । उन्होंने यह भी कहा कि विगत लगभग दो सौ वर्षों से भारत की इस दुर्लभ ज्ञान परम्परा को ओझल करने का पूरा प्रया किया । लेकिन राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के कारण न केवल भारत , अपितु दुनिया का फिर से इस ओर ध्यान गया है। डा कोठारी ने अपनी भाषा में ही भारतीय ज्ञान परम्परा को लेकर कार्य करने पर पर्याप्त बल दिया और आगे कहा कि संस्कृत ही आईकेएस को दुनिया में ले जा सकती है।
प्रो पंकज मित्तल ,सदस्य सचिव ,एआईयू सारस्वत अतिथि के रुप कहा कि बच्चों को शुरुआती कक्षा से आईकेएस की दृष्टि निर्मित किया जाना चाहिए । उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि वे स्वयं गणित विषय से जुड़ी रहीं हैं । लेकिन उन्हें अपनी बीए (प्रतिष्ठा) तक न माधव और न ही रामानुजम जैसे महान् भारतीय उपलब्धियों की जानकारी नहीं थी। आचार्य विनोद करुवरकुन्डु ,माधव केन्द्र के निदेशक ने बताया कि माधव 14वीं शताब्दी के केरल में जन्मे एक लब्धप्रतिष्ठ गणितज्ञ थे जिनकी पृष्टभूमि 32 ग्रामों का एक संगम ग्राम था जो अपने आप में ज्योतिष विज्ञानों का एक चर्चित केन्द्र था।
प्रो एम.एम .झा ने अतिथियों का वाचिक स्वागत करते हुए कहा कि शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास का संस्कृत तथा संस्कृति के विकास में बहुत ही महत्त्वपूर्ण योगदान है । सीएसयू के गुरुवयूर परिसर के निदेशक प्रो के.के. षैन् ने इस समझौते के लक्ष्य को स्पष्ट किया तथा प्रो मधुकेश्वर भट्ट ,निदेशक( योजनाएं )और डा पवन व्यास ,उप निदेशक ने क्रमशः धन्यवाद ज्ञापन तथा मंच का संचालन किया।
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