Virat Kohli: विश्व कप में ‘विराट अवतार’
Virat Kohli: वनडे विश्व कप में न्यूजीलैंड से हार का सिलसिला आखिरकार 20 साल बाद टूट गया। 2003 विश्व कप के बाद से भारत को 50 ओवर के महाकुंभ में कीवियों से एक अदद जीत का इंतजार था। वनडे विश्व कप में न्यूजीलैंड के खिलाफ भारत की ये महज दूसरी जीत है। टीम को जीत दिलाने में अहम रोल निभाने वाले विराट कोहली 2003 में सिर्फ 15 बरस के थे, जब ब्लैक कैप्स भारत से हारे थे। हालांकि दिलचस्प बात ये है कि उस वक्त 53 रन की पारी खेलकर भारत की जीत तय करने वाले राहुल द्रविड़ अब टीम इंडिया के कोच हैं।
न्यूजीलैंड के खिलाफ धर्मशाला में विराट कोहली ने मैदान पर 95 रनों की पारी इस अंदाज में खेली, मानों अपने विरोधियों से कह रहे हों कि रोक सको तो रोक लो। मुकाबले में रोहित शर्मा और शुभमन गिल का विकेट 100 रन के भीतर खोने के बाद विराट कोहली ने जिस क्लीनिकल अंदाज में अपनी पारी से टीम की जीत तय की वह बताता है कि आखिर क्यों विश्व कप 2023 में मैच दर मैच कोहली का कद 'विराट' होता जा रहा है।

इस विश्व कप में कोहली का 'विराट अवतार' देखकर 2011 वनडे विश्व कप की एक तस्वीर जेहन में ताजा हो जाती है। श्रीलंका के खिलाफ फाइनल मुकाबले में सचिन तेंदुलकर आउट होकर पवेलियन वापस लौट रहे थे और 18 नंबर की जर्सी पहने विराट कोहली बल्लेबाज़ी के लिए जा रहे थे। तब कहा गया था- एक सचिन जा रहा है और एक सचिन आ रहा है। विराट ने इस बात को अपने बल्ले से सचिन तेंदुलकर के एक के बाद एक रिकॉर्ड तोड़कर साबित भी किया। इसी सिलसिले को उन्होंने इस बार के विश्व कप में भी बरकरार रखा है। क्रिकेट को जुनून की हद तक पसंद करने वाले देश के करोड़ों लोगों की विश्व कप जीतने की उम्मीदों का बोझ उन्होंने अपने कंधों पर उठा रखा है।
आंकड़े इस बात की गवाही दे रहे हैं। वनडे विश्व कप 2023 के पांच मैचों की पांच पारियों में 118 के औसत से उन्होंने टूर्नांमेंट में सबसे ज्यादा 354 रन बनाए हैं। इसमें एक शतक और तीन अर्द्धशतक शामिल हैं और स्ट्राइक रेट 90.53 का है। इतना ही नहीं न्यूजीलैंड के खिलाफ 95 रन की उनकी पारी ने उन्हें आईसीसी व्हाइट बॉल टूर्नामेंटों में 3000 रन पूरा करने वाला पहला बल्लेबाज भी बना दिया है।
क्रिकेट की दुनिया में विराट कोहली की पहचान चेज मास्टर की भी है। मतलब ये कि वनडे मुकाबलों में टीम इंडिया जब भी लक्ष्य का पीछा करने उतरती है तो ये लगभग तय ही माना जाता है कि विराट कोहली टीम को जीत दिलाकर ही मैदान से वापस लौटेंगे। उनके लिए ये बात मायने नहीं रखती कि सामने विरोधी टीम कौन सी है, मैदान घरेलू है या फिर विदेशी और कंडीशंस कैसी हैं। विराट को तो बस अर्जुन की तरह मछली की आंख दिखाई देती है यानी अपनी टीम को लक्ष्य के पार पहुंचाना ही उनका लक्ष्य नजर आता है। धर्मशाला में न्यूजीलैंड जैसी मजबूत टीम के खिलाफ भी उन्होंने ये काम बखूबी किया।
रिकॉर्ड भी बताते हैं कि विराट ये काम मैच दर मैच और साल दर साल करते चले आए हैं। विराट ने अब तक कुल 286 वनडे मैच खेले हैं। इनमें से 102 मैच ऐसे रहे जिसमें भारतीय टीम ने बाद में बल्लेबाजी करते हुए जीत हासिल की। टीम इंडिया की इस जीत में कोहली की हिस्सेदारी काफी बड़ी है। इन 102 वनडे मुकाबलों में विराट ने 23 शतक और 25 अर्द्धशतक समेत 5786 रन बनाए हैं और सर्वश्रेष्ठ स्कोर 183 रनों का है।
धर्मशाला में न्यूजीलैंड के खिलाफ विराट कोहली 12वें ओवर में रोहित शर्मा के आउट होने के बाद मैदान पर उतरे और टीम की जीत तय कर 48वें ओवर में पवैलियन वापस लौटे। उनकी इस मैच जिताऊ पारी से फैन्स अर्श पर थे। उन्हें मलाल सिर्फ इस बात का रह गया कि विराट इस बार नॉटआउट पवैलियन लौटने के बजाय टीम के लिए विनिंग शॉट लगाए बिना ही आउट हो गए। फैन्स को अफसोस है कि काश हेनरी की गेंद पर मिडविकेट पर खड़े फिलिप विराट का कैच न लपकते तो वो न सिर्फ वो अपना शतक पूरा करते और एक बार फिर टीम को जीत दिलाकर वापस लौटते।
वनडे क्रिकेट में अब तक 32 बार ऐसा मौका आया है जब वे टीम को जीत दिलाने के बाद नाबाद पवेलियन वापस लौटे हैं। धर्मशाला में वो ये कारनामा करते-करते रह गए। यानी विराट धर्मशाला में एक और रिकॉर्ड अपने नाम करने से बस थोड़ा सा ही चूक गए। विराट वनडे क्रिकेट में शतक लगाने के मामले में क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर के साथ संयुक्त तौर पर पहले नंबर पर होते। विराट के नाम फिलहाल 48 और सचिन के नाम पर 49 शतक वनडे क्रिकेट में दर्ज हैं।
दिलचस्प बात ये भी है कि सचिन तेंदुलकर का 49वां वनडे शतक इंटरनेशनल क्रिकेट में उनका सौंवा इंटरनेशनल शतक भी था। उससे भी दिलचस्प ये कि सचिन का ये ऐतिहासिक शतक 2011 वनडे विश्व कप में बांग्लादेश के खिलाफ मीरपुर में बना था। अब सबसे ज्यादा वनडे शतकों के सचिन के इस रिकॉर्ड को विराट कोहली 12 साल बाद विश्व कप मुकाबलों में ही पार करने की दहलीज पर खड़े हैं।
बल्लेबाजी को लेकर बदली हुई विराट कोहली की सोच क्रिकेट के हर फॉर्मेट में उनकी कामयाबी की फेहरिस्त को दिनों-दिन लंबी करती जा रही है। अपनी बेहतरीन और बदली हुई तकनीक से वे न तो लेफ्ट आर्म स्पिनरों की घूमती गेंदों पर विकेट गंवाते हैं और न ही तेज गेंदबाज़ों की शॉर्ट गेंदों पर शिकार बनते हैं। इस साल मार्च में उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अहमदाबाद में शतक जड़कर 2019 से टेस्ट क्रिकेट में शतक के सूखे को खत्म किया। इतना ही नहीं टेस्ट के साथ-साथ वनडे क्रिकेट में दस हजार रनों का आंकड़ा भी उन्होंने इसी साल पार किया है। इस साल आईपीएल में भी उनका बल्ला जमकर बोला। आरसीबी के लिए उन्होंने 639 रन बनाए।
विरोधी टीमों के कप्तान भी मौजूदा वनडे विश्व कप में विराट कोहली के बदले अंदाज और मैदान पर रन बनाने की उनकी भूख को साफ तौर पर महसूस कर रहे हैं। टीम इंडिया से मिली हार के बाद न्यूजीलैंड के कप्तान टॉम लेथम कहते दिखे कि विराट कोहली के पास उनकी बनाई हर रणनीति का जवाब था। ये इंग्लैंड, श्रीलंका, दक्षिण अफ्रीका और नीदलैंड्स के कप्तानों के लिए एक चेतावनी भी है, जिनके खिलाफ भारत को विश्व कप में अपने बाकी मुकाबले खेलने हैं। इन मुकाबलों के बाद बारी सेमीफाइनल और फाइनल मुकाबले की आएगी और विराट के बारे में कहा जाता है कि वो बड़े मैचों के बड़े खिलाड़ी हैं। क्रिकेट क्रेजी करोड़ों भारतीयों को विराट अवतार का फिर इंतजार रहेगा।
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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