इंडिया गेट से: कांग्रेस में खलबली क्यों मची है?
पंजाब में एक एक कर लगभग सभी प्रभावशाली कांग्रेस नेता भाजपा में शामिल हो गए हैं। कांग्रेस के सांसद मनीष तिवारी अपने घर का दरवाजा लांघ चुके हैं, लेकिन वह भाजपा में शामिल नहीं हो सकते क्योंकि दलबदल क़ानून में उनकी लोकसभा सदस्यता खत्म हो जाएगी। पिछले दिनों रक्षा मामलों की संसदीय समिति में उन्होंने विपक्ष के उस ज्ञापन पर दस्तखत करने से इंकार कर दिया था, जिसमें अग्निवीर योजना का विरोध किया गया था। कांग्रेस ने सेना में चार साल के लिए युवाओं की भर्ती वाली इस योजना का विरोध किया है, लेकिन मनीष तिवारी ने बाकायदा ट्विट करके सरकार की इस योजना का समर्थन किया है।

अभी संसद भवन की निर्माणाधीन नई इमारत पर लगे राष्ट्रीय प्रतीक चिन्ह के स्वरुप पर शुरू हुए विवाद में भी उन्होंने कांग्रेस पार्टी से अलग लाईन ली है। कांग्रेस यह कह कर विरोध कर रही है कि अब तक सौम्य दिखने वाले सिंहों का चेहरा दिखाया जाता रहा है, वही चेहरा भारत की मुद्रा पर भी इस्तेमाल होता है। लेकिन नई इमारत पर लगाए प्रतीक चिन्ह में सिंहों का मुहं खुला दिखाई दे रहा है, जिससे वह खूंखार दिख रहा है। इस पर मनीष तिवारी ने अपने ट्विट में लिखा कि शेर को बांधा नहीं जा सकता।
पंजाब का पड़ौसी राज्य हिमाचल प्रदेश दलबदल की अगली प्रयोगशाला बनने जा रहा है। भाजपा ने हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस का मनोबल गिराने के लिए चुनावों से पहले बड़े पैमाने पर दलबदल करवाने के प्रयास शुरू कर दिए हैं। प्रदेश के तीन कांग्रेस विधायकों से भाजपा की बातचीत चल रही है। वे विधानसभा के मानसून सत्र के बाद कभी भी भाजपा में शामिल हो सकते हैं, क्योंकि मानसून सत्र मौजूदा विधानसभा का आख़िरी सत्र होगा। पिछले दिनों आनन्द शर्मा के भी भाजपा में आने की बात चली थी। उन्होंने भाजपा अध्यक्ष जे. पी. नड्डा से मुलाक़ात भी थी। हालांकि आनन्द शर्मा ने भाजपा में शामिल होने की खबरों का खंडन किया था, लेकिन सूत्रों के मुताबिक़ उन्होंने राज्यसभा की सदस्यता माँगी थी जिस पर भाजपा सहमत नहीं हुई।
कांग्रेस ने भी अपना दांव चलते हुए भाजपा में खलबली मचा दी है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रहे खीमी राम ने भाजपा छोड़ कर कांग्रेस का दामन थाम लिया है। इस तरह अब दो पूर्व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं। सुरेश चन्देल पहले ही कांग्रेस में चले गए थे, हालांकि उनकी वापसी की चर्चाएँ भी गर्म हैं। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा उन्हीं के जिले बिलासपुर के ही हैं और पिछले दिनों दोनों की कई मुलाकातें हुई हैं। भाजपा एक तरफ चुनावी तैयारियां कर रही है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस का राष्ट्रीय स्तर पर मनोबल गिराने में जुट गई है।
राष्ट्रपति पद के चुनाव में भाजपा ने सिर्फ कांग्रेस ही नहीं बल्कि समूचे विपक्ष का मनोबल गिराने का सफलतापूर्वक काम किया। उसने विपक्ष से बातचीत शुरू की, लेकिन अपने प्रत्याशी का नाम नहीं बताया। विपक्ष को अपना उम्मीदवार खड़ा करने के लिए उकसा कर आदिवासी महिला का तुरुप का पत्ता चल दिया।
अब यह सरकार की ही रणनीति हो सकती है कि ईडी ने संसद सत्र के दौरान सोनिया गांधी को तलब कर लिया है। ईडी ने सोनिया गांधी को 21 जुलाई को तलब किया है, संसद सत्र 18 जुलाई से शुरू हो रहा है। कांग्रेस ने रणनीति बनाई है कि 21 जुलाई तक संसद में हंगामा किया जाए। सोनिया गांधी को तलब करने के लिए पहले भी तीन बार नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन उन्हें ईडी ने खुद ही रद्द कर दिया था क्योंकि सोनिया गांधी को अस्पताल में भर्ती थीं। इस बार सोनिया गांधी ने ईडी के सामने पेश होने का मन बना लिया है।
कांग्रेस के पदाधिकारियों की बैठक में तय किया गया है कि उस दिन देश भर में प्रदर्शन रैलियां की जाएंगी। कांग्रेस ने संसद में विपक्ष का सहयोग हासिल करने के प्रयास भी शुरू कर दिए हैं। राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड्गे और लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी विपक्षी दलों से बात कर रहे हैं। सत्र के पहले दिन राष्ट्रपति के चुनाव के लिए वोटिंग है। राहुल गांधी 17 जुलाई को भारत वापस लौट रहे हैं और वही दिल्ली के प्रदर्शन का नेतृत्व करेंगे। ईडी उन से पहले ही पांच दिन तक नेशनल हेराल्ड मामले में पूछताछ कर चुकी है।
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(इस लेख में व्यक्त विचार, लेखक के निजी विचार हैं. आलेख में दी गई किसी भी सूचना की तथ्यात्मकता, सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है. इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं।)












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