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Pandit Ganeshwar Shashtri: कौन हैं रामलला की प्राण प्रतिष्ठा करवाने वाले पंडित गणेश्वर शास्त्री द्राविड़?

Pandit Ganeshwar Shashtri: अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर बन रहे मंदिर में 22 जनवरी को विशेष मुहूर्त में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा हो गयी। रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के लिए निकाला गया विशेष मुहूर्त केवल 84 सैकेंड का था।

यह विशिष्ट मुहूर्त काशी की पंडित परंपरा के सुख्यात विद्वान पंडित गणेश्वर शास्त्री द्रविड़ ने निकाला था। उन्होंने ही राममंदिर के शिलान्यास का भी मुहूर्त निकाला था।

Who is Pandit Ganeshwar Shastri Dravid

काशी के रामघाट इलाके में गंगा किनारे रहने वाले गणेश्वर शास्त्री के पुरखे दक्षिण भारत से बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी में आकर बस गए थे। उनके बड़े भाई पंडित विश्वेश्वर शास्त्री भी काशी में ही रहते हैं, जो प्रतिष्ठित विद्वान हैं।

बंगाल में जन्मे मनुस्मृति के सुविख्यात टीकाकार कुल्लूक भट्ट (1150-1300 ईसवी) के मत से 'मुहूर्त' शब्द सामान्यत: समय का ही द्योतक है। प्रत्येक मुहूर्त 48 मिनट का होता है। एक विभाजन के अनुसार 24 घण्टे के दिन को 30 मुहूर्तों में बांटा गया है। मनुस्मृति (1/64) में आया है कि 18 निमेष एक काष्ठा के, 30 काष्ठाएं एक कला के, 30 कलाएं एक मुहूर्त के और 30 मुहूर्त एक अहोरात्र (रात-दिन) के बराबर हैं।

रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के लिए विशेष मुहूर्त पर खास विचार-विमर्श किया गया। इस महत्वपूर्ण काम में मदद की है आचार्य गणेश्वर शास्त्री द्राविड ने। वेदमूर्ति पंडित दत्तात्रेय नारायण रटाटे बताते हैं कि पद्मभूषण से सम्मानित पुरातन राजनीति शास्त्र के महान विद्वान पंडित राजेश्वर शास्त्री के द्वितीय पुत्र गणेश्वर शास्त्री द्राविड वेदों और पुराणों सहित अनेक शास्त्रों के विद्वान हैं। धर्मप्रचार के लिए वे भारत वर्ष में भ्रमण करते रहते हैं और काशी में रहने पर विद्याथियों के लिए अध्यापन करते हैं।

इन दिनों वल्लभराम शालिग्राम सांग-वेद विद्यालय में वे परीक्षा अधिकारी हैं। 'गीर्वाणवाग्वर्धिनी सभा' में वे निर्णायक के रूप में प्रतिष्ठित हैं। आम लोगों के काम आने वाले ज्योतिष, आयुर्वेद एवं कर्मकांड में वे बिना किसी स्वार्थ के उनका मार्गदर्शन करते हैं।

'वन इंडिया' से बातचीत में पंडित गणेश्वर शास्त्री ने बताया कि प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा के लिए मकर संक्रांति के बाद सूर्य के उत्तरायण में आ जाने पर 22 जनवरी सबसे उत्तम दिन था।। इस दिन किसी भी मुहूर्त में दोष उत्पन्न करने वाले पांच बाण - रोग बाण, मृत्यु बाण, राज बाण, चोर बाण और अग्नि बाण दोषों का कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा था।

ये पांचों बाण अपने नाम के अनुरूप ही बुरा प्रभाव छोड़ते हैं। 22 जनवरी को भी केवल 84 सेकेंड ऐसे थे जब प्राण प्रतिष्ठा के लिए सबसे उत्तम मुहूर्त था। गणेश्वर शास्त्री के अनुसार मध्याह्न 12:29:08 बजे से 12:30:32 बजे तक का मुहूर्त रामलला की प्रतिष्ठा के लिए निकला था। मेष लग्न में वृश्चिक नवांश में अभिजित मुहूर्त रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के लिए सर्वाधिक उपयुक्त समय था।

पंडित गणेश्वर शास्त्री का नाम देश के बड़े विद्वानों में शामिल है। पूरे देश में उन्हें अपनी शास्त्रीय साधना के लिए जाना जाता है। काशी में उनकी एक 'शास्त्रार्थ-शाला' है, जिसकी शुरूआत उनके परदादा ने दक्षिण भारत से यहां आकर की थी। यहां विद्याथियों को वेद, वेदांग और वेदांत की शिक्षा दी जाती है। ये विद्यार्थी ही शास्त्री और आचार्य बनकर पुरातन भाषा संस्कृत और उसमें लिखे विभिन्न शास्त्रों को सुरक्षित रखने में अपनी भूमिका निभा रहे हैं।

काशी के पंचगंगा घाठ पर बनी रामानंद संप्रदाय की एकमात्र आचार्य पीठ 'श्रीमठ' के जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी श्रीरामनरेशाचार्य का कहना है कि 'पंडित गणेश्वर शास्त्री द्राविड का सम्मान भारत की सनातन वैदिक परंपरा का सम्मान है। उन्होंने वेदों के अध्ययन-अध्यापन और यज्ञों के संपादन में ही अपना पूरा जीवन लगाया है। अपनी घर-गृहस्थी भी नहीं बसाई। जीवन भर नंगे पांव रहकर यम-नियम का संपादन करते हुए ऋर्षि तुल्य जीवन जीते रहे हैं। वस्त्र के नाम पर केवल एक धोती पहनते हैं और सिला हुआ वस्त्र कभी नहीं पहनते हैं।'

गणेश्वर शास्त्री का कहना है कि "वाल्मीकि रामायण के अनुसार भगवान श्रीराम का जन्म पुनर्वसु नक्षत्र में हुआ था। प्रतिष्ठा के दिन मृगशिरा नक्षत्र श्रीराम के लिए मैत्र तारक है। साथ ही, इस दिन सोमवार है, इससे इस समय में हुई प्राण प्रतिष्ठा से भारत का सभी प्रकार से कल्याण होगा।"

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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