Political Arrest: जब इंदिरा गांधी को छुड़वाने के लिए विमान अपहरण कर लिया गया

आज पवन खेड़ा को हवाई जहाज से उतारकर गिरफ्तार कर लिया गया। कभी वो समय भी था जब इंदिरा गांधी और संजय गांधी को जेल से छुड़ाने के लिए हवाई जहाज का ही अपहरण कर लिया था।

indira gandhi

प्रधानमंत्री मोदी के पिताजी पर की गयी अनर्गल टिप्पणी के मामले में कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा की गिरफ्तारी से हड़कम्प मच गया है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट से उन्हें फौरी तौर पर राहत भी मिल गयी है लेकिन राजनीतिक बयानबाजियों के चलते ये गिरफ्तारी कोई नई बात नहीं है। इस खेल में सभी पार्टियां शामिल रही हैं। हाल में बीजेपी दिल्ली के प्रवक्ता बग्गा की पंजाब पुलिस द्वारा गिरफ्तारी और राजस्थान पुलिस द्वारा एक टीवी एंकर की गिरफ्तारी के लिए नोएडा में डेरा डालना भी चर्चा में रहा था। इस बार जो अलग बात है, वो है प्लेन से उतारकर गिरफ्तारी करना। ऐसे में लोगों को ये जानकर बेहद हैरानी होगी कि कांग्रेसी तो एक बार प्लेन तक हाईजैक कर चुके हैं, वो भी तब जब वो सत्ता में भी नहीं थे।

पहले जान लेते हैं कि पवन खेड़ा की गिरफ्तारी क्यों हुई? दरअसल पवन खेड़ा ने हाल ही में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रधानमंत्री मोदी का पूरा नाम लेते वक्त, उनके नाम में लगे उनके पिता के नाम यानी दामोदर दास मोदी की जगह गौतम दास मोदी बोल दिया था। लेकिन फिर उसमें सुधार करते करते भी कुछ व्यंग्यात्मक तीर उनके पिता के नाम को लेकर ही छोड़ दिए।

अराजनीतिक पृष्ठभूमि के पीएम के पिता को लेकर बीजेपी और पीएम के समर्थकों ने काफी रोष जताया और पवन खेड़ा के खिलाफ लखनऊ, वाराणसी और असम के अलग अलग थानों में कुछ एफआईआर दर्ज हो गई। इसमें असम में दर्ज हुई एफआईआर के चलते पुलिस ने गुरुवार को उन्हें दिल्ली एयरपोर्ट पर उस समय गिरफ्तार कर लिया, जब पवन खेड़ा कांग्रेस के अधिवेशन में भाग लेने रायपुर जा रहे थे।

कांग्रेसियों के प्लेन हाईजैक की कहानी भी उनके नेताओं की गिरफ्तारी से जुड़ी हुई थी, लेकिन वो पवन खेड़ा की तरह छोटे नेता नहीं थे, बल्कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और संजय गांधी थे। ये गिरफ्तारियां इमरजेंसी के बाद आई मोरारजी देसाई सरकार में हुई थीं।

वाकया 20 दिसम्बर 1978 का है। कोलकाता से दिल्ली आ रहे प्लेन आईसी 410 ने जब लखनऊ से उड़ान भरी तो पंद्रहवीं पंक्ति से दो नौजवान उठे और फ्लाइट अटेंडेंट से कहा कि हमें पायलट कमांडर से कुछ जरूरी बात करनी है। ये घटना उस वक्त की है, जब दिल्ली के पालम हवाई अड्डे पर पहुंचने में बस पंद्रह मिनट बाकी थे। उसने कॉकपिट का गेट खोलकर पायलट से पूछना चाहा तो दोनों ने दरवाजा जबरन खोल दिया औऱ थोड़ी देर बाद कॉकपिट से कमांडर पायलट एम एन बट्टीवाला की आवाज यात्रियों को सुनाई दी कि प्लेन हाईजैक हो गया है।

ये दोनों अपहरणकर्ता यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ता थे आजमगढ़ के भोला पांडेय और बलिया के देवेन्द्र पांडेय। विमान में उस वक्त कुल 132 यात्री सवार थे। जब उन दोनों अपहरणकर्ताओं ने अपनी मांगें बताईं तो लोग हैरान हो गए। उनकी मांगें थीं जेल में बंद इंदिरा गांधी और संजय गांधी को फौरन छोड़ने की और उनके खिलाफ मुकदमे वापस लेने की। उनकी कई और मांगें थीं जिसमें एक प्रमुख मांग थी कि केन्द्र की जनता पार्टी सरकार को इस्तीफा दे देना चाहिए और उनसे बात करने के लिए यूपी के चीफ मिनिस्टर को आना चाहिए।

दरअसल इमरजेंसी में जेल जाने के बाद से ही चौधरी चरण सिंह इंदिरा गांधी से काफी नाराज थे और उनको जेल भेजकर बताना चाहते थे कि जेल जाने का दर्द क्या होता है। जनता सरकार में चौधरी साहब गृहमंत्री बने तो 19 दिसंबर को संसद द्वारा सदस्यता खारिज किये जाने के बाद उन्होंने इंदिरा को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया। इंदिरा गांधी पर विपक्षी नेताओं को जान से मारने की साजिश रचने का आरोप लगाया गया था।

बहरहाल, इंदिरा गांधी को जेल से छुड़ाने के लिए हाईजैकर्स ने सबसे पहले प्लेन को काठमांडू ले जाने की मांग की लेकिन पायलट ने यह कहकर मना कर दिया कि प्लेन में इतना ईंधन नहीं है। इसके बाद पटना चलने को कहा गया। जब पायलट ने पटना जाने तक का भी ईंधन नहीं बताया तो अपहरणकर्ताओं ने प्लेन को वाराणसी ले चलने के लिए कहा।

वाराणसी की बात पायलट ने मान ली। वाराणसी में प्लेन लैंड कर दिया गया। देश भर की मीडिया को खबर लग गई। वैसे ही जैसे आज पवन खेड़ा की है। फौरन तत्कालीन मुख्यमंत्री रामनरेश यादव, इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस और चीफ सेक्रेटरी वाराणसी पहुंच गए। 21 दिसम्बर को कोलकाता में संसद की विशेषाधिकार समिति के चेयरमेन समीर गुहा के घर पर बम फेंक दिया गया। बंगलौर और हैदराबाद में भी कांग्रेसियों ने काफी उपद्रव मचाया। जिस वक्त ये हाईजैकिंग हुई संसद भी चल रही थी। अगले दिन संसद में जमकर हंगामा हुआ। कांग्रेस की तरफ से आर वेंकटरमण और बसंत साठे ने कमान संभाली और दावा किया कि ये हाईजैकिंग नहीं बल्कि मजाक है।

दिलचस्प बात थी कि उसी प्लेन में इंदिरा की पूर्ववर्ती सरकार के दो पूर्व मंत्री भी सफर कर रहे थे: ए के सेन और धरमवीर सिन्हा। इसी बीच अपहरणकर्ता प्लेन में भाषण दे रहे थे कि वो अहिंसवादी हैं, गांधीजी की शिक्षाओं में यकीन करते हैं और नारे भी लगा रहे थे संजय गांधी जिंदाबाद, इंदिरा गांधी जिंदाबाद। उन्होंने लोगों को टॉयलेट तक का इस्तेमाल करने से मना कर रखा था, लेकिन पूर्व कानून मंत्री ए के सेन से नहीं रहा गया तो वो उठकर बोले, अगर तुम्हें करना है तो मुझे शूट कर दो, मैं तो टॉयलेट जा रहा हूं।

पीछे का गेट खोलकर एक यात्री ने बाहर छलांग भी लगा दी। इधर अपहरणकर्ताओं की बातचीत सीएम रामनरेश यादव के साथ शुरू हो गई थी। उनके कहने पर कुछ महिलाओं और बच्चों को छोड़ा भी गया। हालांकि इंदिरा गांधी के फैंस होने के ऐलान के बाद अब यात्रियों का डर काफी हद तक कम हो गया था। इसी बीच कुछ यात्रियों ने बंद प्लेन में दम घुटने और बदबू की शिकायत की। अपहरणकर्ताओं के कहने पर पायलट बट्टीवाला ने पीछे का गेट खोल दिया। मौका देखकर उससे भी कुछ यात्री कूद कर भाग गए।

कहानी में क्लाइमेक्स तब आया, जब एक अपहरणकर्ता के पिता ही वाराणसी एयरपोर्ट पहुंच गए और उन्होंने वायरलैस के जरिए अपने बेटे से अपील की। अपील का असर भी हुआ, वो परेशान हो गया और थोड़ी देर बाद दोनों अपहरणकर्ता प्लेन से बाहर भी निकल आए। बाहर आते वक्त भी वो इंदिरा गांधी जिंदाबाद के नारे लगा रहे थे। दिलचस्प बात थी कि दोनों के पास जो पिस्तौल थी, वो नकली निकली और एक क्रिकेट की गेंद भी। दोनों को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया गया।

1980 में जैसे ही इंदिरा गांधी की सरकार आई, प्लेन हाईजैक करने वाले दोनों कांग्रेसियों पर दायर सभी केस इंदिरा सरकार ने वापस ले लिए और दोनों को ही पार्टी का टिकट भी दे दिया गया। ये दोनों विमान अपहरणकर्ता कांग्रेस के टिकट पर कई बार यूपी से विधायक रहे और कई बार चुनाव लड़कर हार गए।

अब सवाल यह उठता है कि क्या टीवी एंकर के लिए राजस्थान पुलिस को नोएडा भेजनी वाली कांग्रेस, बग्गा के लिए दिल्ली में पंजाब पुलिस भेजने वाली आम आदमी पार्टी, शर्मिला रेड्डी को गिरफ्तार करने वाली टीआरएस, ममता के कार्टून पर प्रोफेसर को गिरफ्तार करने वाली टीएमसी जैसी पार्टियां पवन खेड़ा की गिरफ्तारी का इतना बड़ा विरोध कर पाएंगी? कांग्रेस अब भी विपक्ष में हैं, लेकिन तब वापस आने के आसार थे, सो प्लेन तक हाईजैक कर लिया, लेकिन क्या अब मोदी युग में वो ऐसी हिमाकत कर पाने का साहस दिखा पाएंगे?

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