Love, Marriage and Women: आफताब द्वारा मर्डर पर सवाल उठाने वाले श्रद्धा के प्रेम पर सवाल क्यों नहीं उठाते?
Love, Marriage and Women: सोशल मीडिया पर दिल्ली की इस घटना को लव जिहाद कहा जा रहा है जहां आफताब नामक एक नौजवान ने श्रद्धा नामक एक लड़की को मारकर उसके शरीर के 32 टुकड़े कर दिये। फिर वह बाजार से एक बड़ा फ्रिज खरीदकर लाता है और उसमें श्रद्धा के शरीर के टुकड़ों को भरकर रख देता है। इसके बाद वह रोज रात को श्रद्धा की लाश के एक दो हिस्से महरौली के जंगलों में फेंक आता था। इस तरह 18 दिनों में उसने श्रद्धा की लाश को ठिकाने लगा दिया। अपनी प्रेमिका से पीछा छुड़ाने का यह आफताब का अनोखा तरीका था। हालांकि पुलिस की लंबी जांच के बाद उसका राज खुल गया और वह पकड़ा गया है।

आफताब और श्रद्धा मुंबई में मिले थे। दोनों पढे लिखे और माडर्न लुक वाले नौजवान थे। दोनों एक कॉल सेन्टर में काम करते थे। यहीं पर दोनों की जान पहचान हुई और दोस्ती प्यार बन गयी। इस बात की भनक जब श्रद्धा के परिवारवालों को मिली तो उन्होंने गैर समुदाय का नौजवान होने के कारण इस संबंध का विरोध किया। लेकिन प्यार तो अंधा होकर सभी बंधनों को तोड़ने का नाम होता है। श्रद्धा ने भी अपने प्यार के लिए परिवार के सभी बंधन तोड़ लिये और दोनों दिल्ली के महरौली इलाके में आकर रहने लगे।
पुलिस की जांच के मुताबित आफताब के साथ लिव इन में रह रही श्रद्धा उस पर शादी का दबाव बना रही थी। लेकिन ऑफताब शादी के लिए तैयार नहीं था। इसी बात को लेकर दोनों में झगड़ा होने लगा। ऐसे ही 18 मई 2022 को जब दोनों में झगड़ा हुआ तो आफताब ने गला घोंटकर श्रद्धा की हत्या कर दी, उसके बाद उसने श्रद्धा की लाश के साथ क्या किया, ये आप पढ चुके हैं।
श्रद्धा के परिवारवाले इस रिश्ते को स्वीकार तो नहीं कर रहे थे फिर भी सोशल मीडिया पर बेटी की पोस्ट अपडेट देखकर खोज खबर लेते रहते थे। जब कुछ दिन श्रद्धा ने कोई अपडेट नहीं डाली तब मां बाप खोजते हुए दिल्ली आये और उन्होंने ही पुलिस में श्रद्धा के गायब होने की एफआईआर दर्ज करवायी। करीब छह महीने की जांच पड़ताल के बाद दिल्ली पुलिस ने अब जाकर मामले का खुलासा किया है।
आज सोशल मीडिया पर इसे लव जिहाद के रूप में संभवत: इसलिए प्रचारित किया जा रहा है क्योंकि श्रद्धा का प्रेमी एक मुस्लिम है। लेकिन तस्वीर का दूसरा पहलू देखना भी जरूरी है। आखिर ऐसा क्या कारण है कि नौजवान युवतियां प्रेम के नाम पर कोई भी कदम उठाने के लिए तैयार हो जाती हैं? यहां तक कि ऐसे मामलों में वो अपने मां बाप भाई बहन के समझाने पर उसे ही अपना सबसे बड़ा दुश्मन मानने लगती हैं? लव जिहाद के शोर के बीच इस सवाल पर भी चर्चा होना जरूरी है कि आखिर बहुसंख्यक समाज की लड़कियां घर से भागने के लिए तैयार क्यों होती हैं?
श्रद्धा ने आफताब के साथ भाग जाने के लिए किसी की परवाह नहीं की। उन मां बाप की भी नहीं जिन्होंने उसे पाल पोसकर बड़ा किया था। इसके बाद भी मां बाप की चिंता देखिए कि बेटी का सोशल मीडिया अकाउण्ट देखकर उसकी सलामती की खबर ले रहे थे। लेकिन श्रद्धा को इस बात की रत्तीभर परवाह नहीं थी कि जिस परिवार में वो पैदा हुई, पली बढी, इस लायक बनी कि वह बाहर निकलकर बाहर की दुनिया देख सके, वही परिवार उसे दुश्मन दिखने लगा, जबकि चार दिन की जान पहचान में ऑफताब दोस्त नजर आने लगा।
भारत के आधुनिकता वादी महिला विमर्श में लड़कियों के उन्मुक्त प्रेम को इस तरह से सामने रखा जाता है कि इसके लिए वो कोई भी संबंध तोड़ सकती हैं। हमारी फिल्में, हमारा साहित्य और हमारा पूरा समकालीन बाजार प्यार को एक जिहाद के रूप में ही प्रस्तुत करता है जिसमें हमें सारे बंधन तोड़कर निकल जाना है। परंपरागत भारतीय समाज में यह लव जिहाद बहुत सारी समस्याएं पैदा कर रहा है। खासकर शादी को लेकर तो नौजवान पूरी तरह से भ्रमित हो गया है। प्रेम को उसने विवाह से जोड़ लिया है। जैसा कि 26 साल की श्रद्धा ने किया।
अगर एक नौजवान जोड़े का प्रेम इतना बड़ा सत्य है कि उसके लिए घर, परिवार, समाज सबको छोड़ा जा सकता है तो फिर विवाह की जरूरत क्यों है? विवाह दो नौजवानों का सामाजिक संबंध है। भारतीय समाज में विवाह ही परिवार और समाज का आधार है।
अगर कोई नौजवान युवक या युवती किसी समाज का हिस्सा नहीं रहना चाहते, तो फिर उन्हें विवाह करने की जरूरत क्या है? भारतीय कानून ऐसे जोड़ों को संरक्षण तो देता ही है जो बिना किसी औपचारिक विवाह के लिव इन में रह रहे हैं।
लेकिन इस मामले में आकर हमारी नौजवान लड़कियां अपनी सारी आधुनिकता किनारे रख देती हैं। उन्हें आज भी विवाह का नैतिक आवरण चाहिए। कानूनी रूप से भले ही उन्हें किसी के साथ लिव इन में रहने का अधिकार हासिल हो लेकिन विवाह के जरिए वो इसे नैतिक मान्यता देना चाहती हैं। संभवत: उनके अवचेतन मन में आज भी किसी पुरुष से सिर्फ शारीरिक संबंध बना लेने भर से वह पति का दर्जा नहीं पा लेता। इसके लिए वे उन्हीं सामाजिक सहारों की तलाश करती है जिसे ठुकराकर ही वह ऐसे रिश्तों में आगे बढती है।
संसार की पश्चिमी सभ्यताओं में प्यार विवाह का बहुत बड़ा आधार है। ऐसा इसलिए क्योंकि उनकी सामाजिकता पूरी तरह से नष्ट हो चुकी है। अब उनके पास विवाह का बहुत सीमित आधार बचा है। अगर कोई किसी से प्रेम करता है और उसके साथ शादी करना चाहता है तो आमतौर पर वह ऐसा कर लेता है।
लेकिन प्रेम वाले विवाह का एक दुर्भाग्य ये भी है कि इसमें अलगाव बहुत ज्यादा है। अमेरिका को आधुनिकता का पर्यायवाची मानने वाले लोग संभवत: इस बात को नहीं जानते कि वहां हर साल होनेवाले औसत 40 से 50 लाख विवाह में से 42 से 53 प्रतिशत टूट जाते हैं। अगर प्रेम विवाह का इतना मजबूत आधार होता तो कम से कम आधुनिक अमेरिका के आंकड़ें ऐसे न होते जहां लव मैरिज ही सबसे ज्यादा होती है।
लव मैरिज सात जन्मों का बंधन नहीं होता। यह दो लोगों की आपसी सहमति से साथ रहने भर का मामला होता है। अगर दोनों में असहमति होती है तो दोनों इतने परिपक्व होते हैं कि अलग भी हो जाते हैं। लेकिन क्या भारत में तलाक लेना या पत्नी से अलग होना इतना आसान है?
भारत के परंपरागत समाज में अगर विवाह सात जन्मों का बंधन कहा जाता है तो इसके पीछे मुख्य उद्देश्य जीवन में स्थायित्व की खोज है। शादी विवाह रोज रोज का काम नहीं होता। इसे जीवन के 16 संस्कारों में से एक कहा गया है जो जीवन में सिर्फ एक बार ही हो सकता है।
लेकिन घर से भागकर, समाज की परम्पराओं को ठेंगे पर रखकर सिर्फ प्रेम के सहारे अपने लिए जीवनसाथी खोजने वाले लोग अक्सर ऐसे चक्रव्यूह में फंसते हैं जिसमें फंसकर श्रद्धा जैसी नौजवान लड़की अपनी जिन्दगी से हाथ धो बैठी।
जब आप अपने ही परिवार और समाज को अपना सबसे बड़ा दुश्मन मान बैठते हैं तो आपको कब कहां कौन ठग लेगा, इसकी क्या गारंटी है? फिर वो कोई एकता देशवाल हो या फिर श्रद्धा। कोई न कोई आफताब इनकी जिन्दगी में अंधेरा लाने की योजनाएं लिए घूम ही रहा होता है।
अगर किसी ऑफताब पर आप इसलिए सवाल उठा रहे हैं कि उसने अपनी प्रेमिका को 32 टुकड़ों में काटकर फेंक दिया तो फिर उस श्रद्धा पर सवाल क्यों नहीं उठाते जिसने अपने परिवार और समाज को खंड खंड कर दिया था? जिन्हें लगता है कि श्रद्धा का निजी जीवन में लिया गया फैसला उसकी निजता है तो फिर उसके साथ जो हुआ वह सामाजिक चिंता का विषय कैसे हो सकता है?
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(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)
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