इंटरनेट की धीमी रफ्तार डिजिटल इंडिया के सपने में बड़ी बाधक!
भारत में 15 अगस्त 1995 को इंटरनेट सर्विस लॉन्च की गई थी, हालांकि इससे पहले यानी वर्ष 1986 से ही भारत में इंटरनेट सुविधा मौजूद थी, वर्ष 1986 में नैशनल रिसर्च नेटवर्क (ERNET) के लॉन्च के साथ भारत में इंटरनेट की शुरुआत हो गई थी। हालांकि, उस दौरान इंटरनेट को सिर्फ शिक्षा और रिसर्च के लिए ही उपलब्ध कराया जाता था, आम जनमानस के लिए इंटरनेट की सुविधा 15 अगस्त 1995 में शुरू हुई थी। लेकिन आज के वक्त में देश में मोबाइल फोन के क्षेत्र में क्रांति आने के बाद से इंटरनेट के उपयोगकर्ताओं का दायरा बहुत तेजी से दिनप्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। आज देश में आम जनमानस के साथ-साथ हमारे घरों, स्कूलों, हॉस्पिटलों, ऑफिसों, छोटे बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठानों, औद्योगिक, परिसरों, सरकारी व गैरसरकारी स्तर पर हर जगह इंटरनेट का उपयोग बड़े पैमाने पर हो रहा है, इंंटरनेट में किसी भी प्रकार का अवरोधक आने पर अचानक गतिमान दुनिया थम सी जाती है। आज स्थिति यह हो गयी है कि आंकड़ों के अनुसार दुनिया में टेलीफोन कनेक्शन की दूसरी सबसे बड़ी संख्या हमारे देश भारत में मौजूद है।

"भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (TRAI) द्वारा 31 अक्टूबर 2021 तक के जारी आकड़ों के अनुसार देश में टेलीफोन कनेक्शन की कुल संख्या 118.962 करोड़ हैं।, जिसमें से 116.630 करोड़ मोबाइल कनेक्शन हैं। वहीं 31 अक्टूबर 2021 तक देश में विभिन्न माध्यमों के इंटरनेट उपभोक्ताओं की संख्या 79.895 करोड़ है, जिसमें मोबाइल इंटरनेट कनेक्शन 77.309 करोड़ हैं। जिसकी वजह से देश में इंटरनेट ट्रैफिक में अच्छी खासी बढ़त दर्ज की जा रही है। हालांकि डिजिटल इंडिया की दृष्टिकोण से यह एक बहुत अच्छा संकेत है, लेकिन इसमें सबसे बड़ी बाधक इंंटरनेट की धीमी रफ्तार है।"
वैसे भी हम भारतवासियों के जीवन को सुलभ और सरल बनाने के लिए भारत सरकार ने 1 जुलाई 2015 को डिजिटल इंडिया स्कीम को लॉन्च किया था, बेहद महत्वपूर्ण इस मिशन के जरिए भारत सरकार अपनी आम जनमानस से जुड़ी सभी सर्विसों को तेजी के साथ देश के प्रत्येक नागरिकों को डिजिटली रूप से पहुंचाना चाहती है। लेकिन कहीं ना कहीं इसकी सफलता में देश में इंटरनेट की धीमी रफ्तार बहुत बड़ी बाधक बन गयी है, यह स्थिति सरकार के डिजिटल इंडिया के सपने को धरातल पर अमली जामा पहनाने की कवायद को भी धीमा करने का कार्य कर रही है। सरकार व इंटरनेट उपलब्ध करवाने वाली सभी कंपनियां यह अच्छी तरह से जानती हैं कि देश में आज अधिकांश लोगों के हाथ में इंटरनेट चलाने वाला मोबाइल होने के चलते इंटरनेट डेटा का उपभोग निरंतर तेजी से बढ़ता जा रहा है, डिजिटल इंडिया के सपने को साकार करने के लिए यह एक अच्छा संकेत है, लेकिन आज भी इंटरनेट प्रोवाइडर कंपनियों के रवैये के चलते देश में इंटरनेट की धीमी रफ्तार से निपटना एक बहुत बड़ी चुनौती बन गया है।
"सोचने वाली बात यह है कि जहां एक तरफ सरकार रातदिन एक करके देश को डिजिटल देश बनाने की कवायद में लगी हुई है, मगर इंटरनेट प्रोवाइडर कंपनियां उपभोक्ताओं को इंंटरनेट की तय स्पीड़ ना देकर के कहीं ना कहीं सरकार के इस सपने को पलीता लगाने में लगी हुई हैं। हम आज भी हाई स्पीड मोबाइल इंटरनेट के मामले में पिछड़ रहे हैं, औसत नेटवर्क स्पीड के मामले में हमारा प्रदर्शन बेहद खराब है, इंटरनेट की रफ्तार की दौड़ में हम निचले पायदान से थोड़ा ऊपर खड़े हुए हैं, यह स्थिति डिजिटल इंडिया के सपने के लक्ष्य को तय समय पर हासिल करने में बड़ी बाधक है।"
इंटरनेट की स्पीड को लेकर जो हालिया रिपोर्ट्स आई हैं, वह रिपोर्ट देश में इंंटरनेट उपलब्ध करवाने वाली सभी कंपनियों के स्पीड को लेकर किये जाने वाले बड़े-बड़े दावों पर बड़ा सवालिया निशान लगा रही हैं। हालांकि ग्लोबल इंटरनेट स्पीड टेस्टिंग एजेंसी ऊक्ला की एक रिपोर्ट के अनुसार, मोबाइल इंटरनेट स्पीड टेस्ट में भारत की रैंकिंग में पहले से कुछ पायदान ऊपर आकर सुधार हुआ है, सितंबर 2021 के मुकाबले अक्टूबर 2021 में भारत की रैकिंग में 5 पायदान का सुधार हुआ है। इस रिपोर्ट के अनुसार भारत को 141 देशों के बीच 117वां स्थान मिला है, जिसमें कंपनियों द्वारा जल्द से जल्द सुधार करना बहुत आवश्यक है। भारत की अक्टूबर माह में औसत डाउनलोडिंग इंटरनेट स्पीड 13.45 mbps रही, इसी दौरान औसत अपलोडिंग स्पीड 3.36 Mbps रही। वहीं ग्लोबली इंटरनेट स्पीड की बात करें, तो अक्टूबर माह में औसत मोबाइल डाउनलोडिंग स्पीड 28.61 mbps और अपलोडिंग स्पीड 8.38 mbps रही है। इस रिपोर्ट के अनुसार भारत में इंंटरनेट की स्पीड के मामले में अभी धरातल पर बहुत बड़ा सुधार करने की आवश्यकता है।

ऊक्ला की इस रिपोर्ट में पड़ोसी छोटा सा देश नेपाल और दुनिया में असफल राष्ट्र की पहचान बना चुका पाकिस्तान जैसा देश भी मोबाइल इंटनरेट स्पीड के मामले में भारत से काफी पायदान आगे हैं, जो कि एक विचारणीय स्थिति है। हालांकि अक्टूबर 2021 में नेपाल को मोबाइल इंटरनेट स्पीड के मामले में 3 पायदान का नुकसान हूआ, इसके बावजूद नेपाल 107 वीं रैंक हासिल करने में कामयाब रहा है। जबकि पाकिस्तान जैसा विफल राष्ट्र भी 7 पायदान के फायदे के साथ 110 वें स्थान पर पहुंच गया है। इस रिपोर्ट में श्रीलंका का 120वां स्थान है। अफगानिस्तान को 139 वां स्थान मिला है। यह आंकड़े देश में इंटरनेट की धीमी रफ्तार को तो दर्शाते हैं, साथ ही देश में इंटरनेट उपलब्ध करवाने वाली बहुत सारी कंपनियों के झूठ से परिपूर्ण दावों की पोल भी खोलते हैं।
आज हमारे देश में इंटरनेट उपलब्ध करवाने वाली अधिकांश कंपनियां अपने प्लान बेचते समय ग्राहकों से तेज स्पीड इंंटरनेट देने के बड़े-बड़े दावे करती हैं, लेकिन वास्तव में शहर हो या गांव हो इंटरनेट की धीमी स्पीड एक आम बात हो गयी है। उपभोक्ताओं के अधिकारों की आव़ाज उठाने वाले लोगों व संस्थाओं के लिए चिंता की बात यह है कि ग्राहकों को 4जी के नाम पर 3जी और 2जी जैसी इंटरनेट स्पीड ही मिल पा रही है, जबकि उनसे पैसे 4जी के पूरे वसूले जा रहे हैं, जो कि एक उपभोक्ता के दृष्टिकोण से सरासर गलत है। देश में इंटरनेट उपलब्ध करवाने वाली अधिकांश कंपनियां 4जी स्पीड के दौर में 3जी व 2जी की स्पीड देकर, स्पीड के इस बड़े खेल से ग्राहकों को आर्थिक रूप से चूना लगाकर अपनी तिजोरियां भरने का कार्य कर रही हैं।
"इंटरनेट में स्पीड की अहमियत की बात करें तो देश-दुनिया में कोरोना के भयावह काल में जब सब कुछ बंद था तो जीवन को सुचारू रूप से चलाने में इंंटरनेट का बहुत बड़ा योगदान था। शिक्षा, चिकित्सा, व्यापार, बैंकिंग, रोजमर्रा की जरूरत के सामान की खरीदारी व मनोरंजन जैसी अधिकांश बेहद महत्वपूर्ण सेवाएं पूर्ण रूप से इंटरनेट के भरोसे हो गयी थी। शहर हो या गांव घर-घर में बच्चों की ऑनलाइन क्लास चल रही थी, मरीजों का ऑनलाइन उपचार हो रहा था, व्यापार व व्यक्तिगत जरूरत के लिए बैंकों से धन का लेनदेन ऑनलाइन हो रहा था, कोरोना के उस भयावह आपदाकाल के वक्त इंंटरनेट की कम स्पीड के चलते लोगों को अक्सर परेशान होते देखा गया था।"

डिजिटल युग में इंंटरनेट दुनिया के हर क्षेत्र में आज बेहद महत्वपूर्ण हो गया है, आज इंंटरनेट ने लोगों के जीवन को घर व कार्य स्थल पर सरल बनाने का कार्य किया है, हजारों किलोमीटर की दूरियों को मिटाने का कार्य किया है। आज डिजिटल इंडिया में इंटरनेट के शटडाउन होने या कम स्पीड होने से बहुत सारे सरकारी, गैरसरकारी व निजी कार्य तत्काल बाधित हो जाते हैं, धीमे इंंटरनेट की वजह से ऑनलाइन कार्य करने वाले सभी लोगों की कार्य करने की क्षमता तत्काल प्रभावित होती है, जिसके चलते उनको तय लक्ष्य को हासिल करने में देरी होती है। हालांकि भारत के लोगों के लिए अच्छी खबर यह है कि देश में जल्द ही 5जी नेटवर्क आने वाला है। कंपनियों का दावा है कि इससे भारत की इंटरनेट की दुनिया में एक क्रांति आ जाएगी, लेकिन यह तो आने वाला समय ही तय करेगा कि उस वक्त कंपनियों के इंंटरनेट स्पीड के दावे धरातल पर कहाँ तक सत्य साबित होंगे, देश में इंटरनेट ग्राहकों से स्पीड़ के नाम पर वसूली बंद होगी या जारी रहेगी। लेकिन आज भारत सरकार को डिजिटल इंडिया के लक्ष्य को तय समय पर हासिल करने के लिए और भविष्य में कार्यों को उच्च गुणवत्ता पूर्ण व सुचारू ढंग से चलाने के लिए इंटरनेट की धीमी स्पीड़ की समस्या का जल्द इंटरनेट प्रोवाइडर कंपनियों से नियमानुसार निदान करवाना चाहिए। सरकार को धीमी इंंटरनेट स्पीड के मसले पर इंंटरनेट प्रोवाइडर कंपनियों की समस्याओं का निदान करके, भविष्य में धरातल पर सख्ती के साथ कंपनियों की जवाबदेही तय करनी होगी। तब ही भविष्य में देश के शहर, गांव व दुर्गम दूरदराज के इलाकों में डिजिटल इंडिया मिशन के तय विभिन्न लक्ष्यों को हासिल किया जा सकता है।
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