BJP and Congress: क्षेत्रीय दलों के खिलाफ भाजपा और कांग्रेस में एक समान राय
बदलते हालात में दिल्ली, पंजाब और तेलंगाना तीनों राज्यों की सरकारें भाजपा और कांग्रेस के निशाने पर आ गई हैं। आने वाले दिनों में इन तीनों राज्यों में केंद्र सरकार कड़ी कार्रवाई कर सकती है।

मनीष सिसोदिया की गिरफ्तारी ने आम आदमी पार्टी में हलचल मचा दी है। अभी सिर्फ दो महीने पहले ही अरविन्द केजरीवाल ने सार्वजनिक तौर पर कहा था कि सिसोदिया की गिरफ्तारी से आम आदमी पार्टी को फायदा होगा। गुजरात विधानसभा चुनावों के समय जब सिसोदिया के घर पर छापा पड़ा था, तो केजरीवाल ने कहा था कि सिसोदिया गिरफ्तार हो गए, तो गुजरात में आम आदमी पार्टी को बहुमत मिल जाएगा। फिर ऐसा क्या हुआ कि सिसोदिया की गिरफ्तारी होते ही आम आदमी पार्टी में खलबली मच गई। केजरीवाल को 9 महीनों से जेल में पड़े सत्येन्द्र जैन से भी इस्तीफा लेना पड़ा।
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा रही है कि केजरीवाल दिल्ली की सत्ता का उपयोग पार्टी को साधन संपन्न बनाने के लिए कर रहे हैं, लेकिन खुद उन पर कोई आंच न आए, इसलिए अपने पास कोई विभाग नहीं रखा। साधन जुटाने के तरीके वह खुद बनाते हैं, लेकिन फाईलों पर दस्तखत अपने भरोसेमंद मंत्रियों से करवाते हैं, ताकि पार्टी के विधायकों में भी बात नहीं फैले।
सत्येन्द्र जैन और मनीष सिसोदिया केजरीवाल के सबसे भरोसेमंद साथी थे। अब दोनों गिरफ्तार है, लेकिन अभी तक किसी ने भी केजरीवाल के खिलाफ मुंह नहीं खोला। हालांकि सिसोदिया के इस्तीफे से ऐसा लगता है कि उनकी आत्मा जागी है। अगर यह सच है कि उनकी आत्मा जागी है, तो वह देर सवेर मुंह खोल सकते हैं।
राजनीतिक गलियारों में दूसरी बात यह चल रही है कि सिसोदिया का इस्तीफा सत्येन्द्र जैन से पीछा छुड़ाने के लिए हुआ है। सत्येन्द्र जैन से इस्तीफा लेने के लिए सिसोदिया ने अपना इस्तीफा देकर केजरीवाल का काम आसान किया है। केजरीवाल शुरू में यह समझते थे कि सत्येन्द्र जैन जल्द ही जेल से बाहर आ जाएंगे। लेकिन नौ महीनों से उनकी जमानत नहीं हुई, तो केजरीवाल को लगने लगा था कि सत्येन्द्र जैन गले की हड्डी बन गए हैं। इसलिए सिसोदिया ने उनसे पीछा छुड़ाने के लिए अपना इस्तीफा दिया।

लेकिन सिसोदिया और सत्येन्द्र जैन के इस्तीफों से केजरीवाल की मुसीबतें कम नहीं होने वाली। केजरीवाल खुद को ज्यादा तेज समझते थे। लेकिन उप राज्यपाल वीके सक्सेना उनसे भी ज्यादा तेज निकले हैं। वह केजरीवाल के उन सब तरीकों पर निगाह टिकाए हुए हैं, जिन तरीकों को अपना कर केजरीवाल ने पार्टी के लिए साधन जुटाए। जैसे शराब नीति, स्कूलों में कमरों का निर्माण, बसों की खरीद, बिजली कंपनियों से बैंक खातों का मामला। उप राज्यपाल ने ऐसे कई केसों में जांच बिठा दी है। आप मानें या न मानें, इन जांचों से केजरीवाल की छवि पर असर पड़ा है।
अब इस का दूसरा पहलू देखिए। कांग्रेस अब तक भाजपा और आम आदमी पार्टी में चल रहे शह मात के खेल को तटस्थ हो कर देख रही थी, इसलिए एमसीडी मेयर के चुनाव में वह तटस्थ थी। लेकिन केजरीवाल और तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चन्द्रशेखर राव की दोस्ती ने कांग्रेस को दुबारा सोचने पर मजबूर कर दिया है। क्योंकि जहां एक तरफ सारे देश में विपक्षी पार्टियां भाजपा के खिलाफ एकजुट होने की कोशिश कर रही हैं, वहीं केजरीवाल और के.चन्द्रशेखर राव ने कांग्रेस विरोधी मोर्चा खोल दिया है।
के. चन्द्रशेखर राव भी कांग्रेस के उतना ही खिलाफ हैं, जितने केजरीवाल हैं। केजरीवाल ने कांग्रेस को अब तक चार राज्यों में सीधे तौर पर नुकसान पहुंचाया। दो राज्यों दिल्ली और पंजाब में उन्होंने कांग्रेस से सत्ता छीन ली तो गुजरात और गोवा में उन्होंने कांग्रेस को नुकसान पहुंचाकर भाजपा को फायदा पहुंचाया। अब के. चन्द्रशेखर राव भी कांग्रेस को नुकसान पहुँचाने के लिए कर्नाटक पहुंच गए हैं, उन्होंने जेडीएस से चुनावी गठबंधन कर के कांग्रेस के प्रभाव वाले विधानसभा क्षेत्रों में अपने उम्मीदवार खड़े कर दिए हैं।
दिल्ली के शराब घोटाले ने कांग्रेस को के. चन्द्रशेखर राव और केजरीवाल के खिलाफ बड़ा मुद्दा दे दिया है। क्योंकि इस शराब घोटाले ने यह साबित करना शुरू कर दिया है कि केजरीवाल और के.चन्द्रशेखर राव में सिर्फ राजनीतिक गठबंधन नहीं हुआ, बल्कि आर्थिक गठबंधन भी हुआ है। शराब घोटाले में जिस दक्षिण लॉबी का नाम आ रहा है, उसके तार के.चन्द्रशेखर राव के परिवार से जुड़ रहे हैं। चन्द्रशेखर राव की बेटी कविता का नाम सामने आ चुका है और सीबीआई उनसे पूछताछ भी कर चुकी है। कहा जा रहा है कि केजरीवाल से शराब निर्माताओं की दक्षिण लॉबी की मुलाक़ात कविता के माध्यम से ही हुई थी।
कांग्रेस महासचिव अजय माकन का बयान सिर्फ शुरुआत भर है। सिसोदिया का सुप्रीमकोर्ट में बचाव करने वाले कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी को निशाना बनाने के लिए उन्होंने शराब घोटाले पर हमला बोला है। आने वाले दिनों में अरविन्द केजरीवाल और के.चन्द्रशेखर राव के खिलाफ कांग्रेस अजय माकन की लाईन ही अपनाएगी। यानि इन दोनों राज्यों और दोनों मुख्यमंत्रियों के खिलाफ कांग्रेस और भाजपा की एक लाईन होगी।
अब शराब घोटाले में तीसरे राज्य के तार भी जुड़ रहे हैं। शराब घोटाले की जांच जैसे जैसे आगे बढ़ेगी, उसकी आग का धुंआ पंजाब भी पहुंचेगा। केजरीवाल ने दिल्ली की शराब नीति वापस लेकर उसी शराब लॉबी को पंजाब के शराब ठेके सौंप दिए हैं। केजरीवाल और के. चन्द्रशेखर राव की तरह पंजाब के मुख्यमंत्री भी भाजपा और कांग्रेस दोनों के साझा निशाने पर हैं। इसका एक कारण आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद पंजाब में खालिस्तान आन्दोलन का फिर से खड़ा होना भी है। खालिस्तानियों के दबाव में कुछ कुछ ऐसी बातें हो रही हैं, जिनसे सरकार संविधान के मुताबिक़ काम करती दिखाई नहीं दे रही।
जरनैल सिंह भिंडरावाले के समर्थक अमृतपाल सिंह ने संविधान को चुनौती देते हुए यहां तक कह दिया है कि अनुच्छेद 25 में सिखों को हिन्दू क्यों लिखा हुआ है। वह खालिस्तान आन्दोलन को फिर से खड़ा कर रहा है। खालिस्तानी लवप्रीत सिंह तूफ़ान की गिरफ्तारी का विरोध करते हुए अपने हजारों हथियारबंद समर्थकों के साथ अमृतपाल ने अजनाला पुलिस स्टेशन पर धावा बोल दिया था। आम आदमी पार्टी की सरकार ने कड़ी कार्रवाई करने के बजाए लवप्रीत सिंह तूफ़ान को रिहा कर दिया। इससे अमृतपाल सिंह की धमक बनी है, और सरकार खालिस्तानियों के सामने कमजोर साबित हुई है।
पंजाब में संविधान की रक्षा और क़ानून के राज को बनाए रखने का सवाल खड़ा हो गया है। पंजाब के मुख्यमंत्री ने राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित के साथ भी टकराव ले रखा है। उन्होंने राज्यपाल के सवैधानिक अधिकारों को भी चुनौती दी है, जिस पर 28 फरवरी को सुप्रीमकोर्ट ने भी उन्हें डांट पिलाई है। बदलते हालात में केजरीवाल, के. चन्द्रशेखर राव और भगवंत मान तीनों मुख्यमंत्री भाजपा और कांग्रेस के निशाने पर आ गए हैं। आने वाले दिनों में इन तीनों राज्यों में केंद्र सरकार कड़ी कार्रवाई कर सकती है। कांग्रेस के लिए वह बड़ी खुशखबरी होगी।
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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