Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

Rich Leaving India: भारत के अमीर विदेशों में क्यों बसना चाहते हैं?

Rich Leaving India: पिछले कुछ सालों से एक वैश्विक ट्रेंड सामने आया है। अचानक से यूरोप या अमेरिका की कोई गैर-सरकारी संस्था अथवा कंसल्टेंसी फर्म एक रिपोर्ट जारी कर देती है। उसमें वह कभी हैप्पीनेस इंडेक्स पर कुछ डाटा जारी करते हैं तो कभी महिलाओं की बराबरी के मुद्दों पर। कभी धार्मिक भेदभाव को लेकर चिंता जाहिर होती है तो कभी लोकतंत्र की बहाली पर सवाल खड़े किये जाते हैं।

विडम्बना यह है कि हमारे देश की मीडिया इन रिपोर्ट्स पर आंख बंद करके विश्वास कर लेती है और बिना कोई सवाल-जवाब किये उन पर समाचार, लेख और संपादकीय प्रकाशित कर देती है। भारत का मीडिया न इन संस्थानों की पृष्ठभूमि देखता है, न उनके उद्देश्य और रिपोर्ट्स की मेथोडोलॉजी पर कोई क्रॉस चेकिंग की जाती है।

Rich Leaving India: Why do the rich of India want to settle abroad?

अब ऐसे ही हेनली प्राइवेट वेल्थ माइग्रेशन रिपोर्ट आई है। यह रिपोर्ट कहती है कि भारत में साल 2023 में 6,500 अमीर व्यक्ति देश छोड़कर चले जायेंगे। इससे पहले साल 2022 में 7,500 अमीर भारतीय देश छोड़कर चले गए थे। इस पर कुछ लोग कहेंगे कि अरे देखिये, कितनी बड़ी संख्या में अमीर लोग देश छोड़कर जा रहे है। इसका मतलब देश में राजनैतिक हालत अनुकुल नहीं है और व्यापार की संभावनाएं भी समाप्त हो गयी हैं। यहां अब इन लोगों का रहना मुश्किल हो रहा है।

मगर ऐसा नहीं है। वास्तव में यह सभी रिपोर्ट्स शत-प्रतिशत बिजनेस मॉडल होती है। जिसका एक मात्र उद्देश्य पैसा कमाना होता है न कि कोई सामाजिक सरोकार। अब हेनली प्राइवेट वेल्थ माइग्रेशन की हालिया रिपोर्ट को ही लेते हैं। इसे लंदन की कंसल्टेंसी फर्म हेनली एंड पार्टनर्स ने जारी किया है। इसके अनुसार 'अमीर' लोग देश छोड़कर जा रहे हैं। यानी वह पहले इसी देश में रहकर अमीर बन चुके थे। इसका मतलब है कि देश के वर्तमान राजनैतिक और आर्थिक परिवेश में लोग अमीर बन रहे हैं। यहां स्थितियां उनके लिए सकारात्मक रही हैं, और अगर यह लोग वास्तव में देश छोड़ रहे है तो इसके दूसरे कारण हैं। जैसे यह लोग अपना व्यापार बढ़ाना चाहते हैं। या फिर वैश्विक रूप से अपने व्यापार की उपस्थिति दर्ज कराना चाहते हैं। यह भी एक सम्भावना है कि दूसरे देश इन अमीरों को निवेश के एवज में बड़ी छूट देते हों। या फिर इनमें वे अमीर भी शामिल हैं, जो किसी भ्रष्टाचार के मामले से बचने के लिए देश छोड़कर भाग गये हैं।

यह सिर्फ अनुमान नहीं है, बल्कि यह फर्म खुद कहती कि 30 प्रतिशत अमीर इन्वेस्टमेंट माइग्रेशन प्रोग्राम चुनते हैं। दरअसल, दुनिया के कई देश अपने यहां निवेश आकर्षित करने के लिए गोल्डन वीजा प्रोग्राम चलाते हैं। इसमें माल्टा, मॉन्टेनीग्रो, नार्थ मैसिडोनिया, तुर्किये, अण्टीगुआ और बारबूडा, डोमिनिका, ग्रेनेडा, सेंट किट्स और नेविस, सेंट लूसिया, जोर्डन, ऑस्ट्रिया, साइप्रस, ग्रीस, आयरलैंड, इटली, जर्सी, लाटविया, लक्समबर्ग, माल्टा, मोनाको, नीदरलैंड, पुर्तगाल, स्पेन, स्विट्जरलैंड, यूनाइटेड किंगडम, कनाडा, पनामा, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, हांगकांग, मलेशिया, न्यूजीलैंड, सिंगापुर, थाईलैंड, मॉरिशस, नामीबिया, सऊदी अरब जैसे देश शामिल हैं।

इस वीजा प्रोग्राम की अपनी एक जबरदस्त प्रतिस्पर्धा है। हर देश चाहता है कि ज्यादा-से-ज्यादा अमीर उनके देश में निवेश करें तो उसके बदले वे उन्हें सभी सुविधाएं देने को तैयार रहते हैं। जैसे ऑस्ट्रिया का गोल्डन वीजा लेने पर यूरोपियन यूनियन की नागरिकता मिलने का मौका मिल जाता है। नार्थ मैसिडोनिया में निवेश कीजिये और हांगकांग, जापान, सिंगापुर और यूरोप के कुछ हिस्सों में आने-जाने पर कोई रोकटोक नहीं होगी। ग्रेनेडा तो चीन, रूस, सिंगापुर और यूके सहित 145 देशों का वीजा-ऑन-अराइवल दे रहा है। ऐसे ही अधिकतर बड़े देश जैसे अमेरिका, यूके और इटली अपने यहां बिना किसी रोकटोक के रहने और काम करने की सुविधा देते हैं।

हेनली एंड पार्टनर्स की वेबसाइट के अनुसार यह सभी देश इसके क्लाइंट हैं। यानी यह कंपनी भारत सहित दुनियाभर के अमीरों से संपर्क करती है। उन्हें इन देशों द्वारा गोल्डन वीजा के अंतर्गत मिलने वाले फायदों का लालच दिखाती है। एकबार कोई अमीर क्लाइंट उनके प्रभाव में आता है तो उससे यह पैसा बनाते हैं। इस तरह यह शुद्ध रूप से एक बिजनेस मॉडल है। जिसका हमारे यहां का मीडिया विश्लेषण नहीं करता और उसे राजनैतिक तौर पर जोड़कर पेश करता है।

फिलहाल हेनली एंड पार्टनर्स दुनिया की सबसे बड़ी कंसल्टेंसी फर्म है जो सबसे ज्यादा और प्रभावी तौर पर गोल्डन वीजा अथवा गोल्डन पासपोर्ट दिलवाने में सहायक का काम करती है। फिलहाल यह रूस, भारत और चीन के अमीरों के अलावा यूरोप को भी अपने बिजनेस में शामिल कर चुकी है। मतलब कि यूरोप के अमीरों को उनके देशों से निकालकर अपने क्लाइंट देशों में भेज रही है। अतः फर्म का कोई खास राजनैतिक एजेंडा नहीं है। उसे तो बस अपने बिजनेस से मतलब है। जहां अमीर लोग होंगे वहां यह अपने क्लाइंट देशों के लिए कम करेगी।

यह तो रही बात इस फर्म के बिजनेस मॉडल की। मगर अब इसके दूसरे पहलू को भी एक उदाहरण के जरिये समझने की कोशिश करते है। दरअसल, गूगल करने पर दो भारतीय व्यापारियों - चेतन संदेसरा और नितिन संदेसरा के नाम सामने आते हैं। यह दोनों भाई है और इनपर €640 मिलियन की वित्तीय हेराफेरी का आरोप है। जिसके कारण ये प्रवर्तन निदेशालय के निशाने पर आ गये। मगर इससे बचने के लिये इन्होंने हेनली एंड पार्टनर्स से तीन देशों - एण्टीगुआ और बारबुडा, ग्रेनेडा और साइप्रस के गोल्डन पासपोर्ट खरीदने में मदद मांगी। आगे क्या हुआ इसकी कोई जानकारी नहीं है लेकिन फिलहाल यह दोनों भाई अभी भी फरार हैं। इस तरह देश में वित्तीय गड़बड़ियों में शामिल भगोड़ों के लिए भी यह फर्म काम करती है।

आज इस गोल्डन पासपोर्ट का 'धंधा' इतना बड़ा हो गया है कि इस कंसल्टेंसी फर्म के भारत सहित दुनियाभर में दर्जनों दफ्तर बन गये हैं। आज इस फर्म के अपने क्लाइंट देशों के साथ बाकायदा लीगल कॉन्ट्रैक्ट हैं। जिसके अंतर्गत यह अपने क्लाइंट देशों की सरकारों को सुनिश्चित कराती है कि वह उस देश में गोल्डन वीजा अथवा पासपोर्ट के जरिये निवेश लेकर आएगी।

हम लोग कई बार ऐसे बिजनेस मॉडल या प्रोपेगैंडा के जाल में फंस जाते हैं। जिसका दुरुपयोग देश की छवि को धूमिल करने में किया जाता है। इसलिए जरुरी है कि जो लोग इस देश की जनता को सूचना और सम्प्रेषण देने के काम में लगे हैं, एकबार इस तरह की रिपोर्ट्स पर थोडा रुकें, समझें और फिर आगे प्रकाशित करें।

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+