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Satya Pal Malik: सत्यपाल मलिक के अव्यवहारिक आरोपों पर टिकी राहुल की आशा

ऐसा लगता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जाति आधारित जनगणना की विपक्षी मांग से बहुत परेशान हैं। इसलिए दशहरे के मौके पर लाल किले की रामलीला में हुए उनके भाषण में जातियों के रावण को जलाने की बात कही गई थी। आम तौर पर दशहरे के मौके पर प्रधानमंत्री या किसी भी नेता की ओर से तीर चला कर रावण का वध करने की औपचारिकता होती रही है।

कभी कभार छोटे मोटे भाषण भी हुए हैं, लेकिन नरेंद्र मोदी ने इस बार दशहरे का राजनीतिक इस्तेमाल करने की कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने बहुत लंबा भाषण दिया और उनके भाषण का सबसे ज्यादा राजनीतिक पहलू जातिवाद के खिलाफ लिया गया स्टैंड ही था।

Rahul gandhis hope rests on Satya pal Maliks impractical allegations

दशहरे के अगले दिन राहुल गांधी ने एक वीडियो जारी किया है। इस वीडियो में वह पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक के साथ बातचीत करते हुए दिखाई दे रहे हैं। सब जानते हैं कि पिछले दो सालों से सत्यपाल मलिक और राहुल गांधी के मुद्दे समान हैं, जैसे अडानी, अग्निवीर, एमएसपी और पुलवामा। इस बातचीत में दोनों ने इन साझा मुद्दों पर नरेंद्र मोदी पर जम कर भड़ास निकाली है। वैसे बातचीत में अनेक विषयों को छुआ गया है, लेकिन इस बातचीत में तीन बातें बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण थी, एक तो जाति आधारित जनगणना, जिस पर सत्यपाल मलिक की मुखर सहमति दिखाई नहीं दी, क्योंकि वह जानते हैं कि जाटों की संख्या सीमित क्षेत्रों में और बहुत कम है और वह जाटों की राजनीति ही करते हैं। दूसरी थी 2024 के लोकसभा चुनावों को लेकर सत्यपाल मलिक की भविष्यवाणी।

Rahul gandhis hope rests on Satya pal Maliks impractical allegations

सत्यपाल मलिक ने भविष्यवाणी की है कि मोदी सरकार के सिर्फ छह महीने रह गए हैं, भारतीय जनता पार्टी लोकसभा का चुनाव हार रही है। तीसरी बात उन्होंने यह कही कि वह राहुल गांधी की इस बात से सहमत नहीं हैं कि पुलवामा का हमला मोदी सरकार ने खुद करवाया था। कांग्रेस के अनेक नेता समय समय पर पुलवामा हमले को प्रायोजित बताते रहे हैं, और आरोप लगाते रहे हैं कि चुनाव जीतने के लिए मोदी ने यह हमला करवाया था। सत्यपाल मलिक ने कहा कि वह यह जरुर कहेंगे कि इन्होंने (मोदी ने) इसे नजरअंदाज किया और बाद में उसका राजनीतिक इस्तेमाल किया। इसके अलावा बातचीत में राहुल गांधी के प्रिय विषय अडानी, किसान आन्दोलन और अग्निवीर योजना का भी जिक्र आया।

सत्यपाल मलिक ने 2019 पुलवामा हमले के लिए सरकार की खामियों को जिम्मेदार ठहराया। वह यह बात पहले भी कई बार कह चुके हैं, लेकिन वह भूल जाते हैं कि पुलवामा हमले के समय राज्य में गवर्नर रूल था और वह खुद जम्मू कश्मीर के गवर्नर थे, अगर खामियां रही हैं, तो उसकी जिम्मेदारी खुद उनकी थी। सत्यपाल मलिक ने यह कह कर खुद को ही कटघरे में खड़ा कर लिया है कि वह एक नाकाम प्रशासक थे, क्योंकि सीआरपीएफ वाहन पर हमला करने वाला विस्फोटक से भरा ट्रक लगभग 10-12 दिनों से इलाके में घूम रहा था।

मलिक खुद राज्यपाल थे, इसलिए राज्य में होने वाली हर घटना, दुर्घटना के लिए वह खुद जिम्मेदार थे, और वह खुद कह रहे है कि विस्फोटकों से भरा ट्रक 10-12 दिन से इलाके में घूम रहा था। वह कहते हैं कि "विस्फोटक पाकिस्तान से भेजे गए थे। गाड़ी के ड्राइवर और मालिक का आतंकी रिकॉर्ड था। उन्हें कई बार गिरफ्तार किया गया और फिर रिहा किया गया। लेकिन, वे खुफिया विभाग के रडार पर नहीं थे। " यह सब कुछ राज्यपाल रहते हुए उनकी नाक के नीचे हो रहा था।

सत्यपाल ने अपनी पहले की बात दोहराते हुए राहुल गांधी को बताया कि सीआरपीएफ ने पांच विमानों की मांग की थी, जो केंद्र सरकार ने उन्हें उपलब्ध नहीं करवाए थे, अगर गृहमंत्रालय विमान उपलब्ध करवा देता, तो हादसे से बचा जा सकता था। जबकि सत्यपाल मलिक बहुत अच्छी तरह जानते हैं कि बटालियन की मूवमेंट उनके अपने वाहनों से ही होती है, विमानों से नहीं। अगर सुरक्षा कर्मियों को विमानों पर भेज भी दिया जाता, तो क्या सारे वाहन भी विमानों पर भेजे जाते? क्योंकि सेना और अर्द्ध सैनिक बलों के वाहनों का मूवमेंट तो फिर भी होना ही था, और ट्रक खाली तो नहीं जाते। हर ट्रक में कम से कम पांच जवान तो होते ही।

अब मलिक कह रहे हैं कि अगर उनसे कहा जाता तो वह सीआरपीएफ को विमान उपलब्ध करवा देते। वह एक अव्यवहारिक और राज्यपाल के अधिकार क्षेत्र से बाहर की बात कर रहे हैं। केन्द्रीय सुरक्षा बल अपने विभाग से ही बात करेंगे, राज्यपाल से क्यों करेंगे। अपनी तारीफ़ में सत्यपाल मलिक ने बर्फ से बच्चों को निकालने के लिए भेजे गए विमानों का उदाहरण दिया है। लेकिन जम्मू कश्मीर के बर्फ में फंसे बच्चों को निकालना राज्यपाल के नाते उनकी जिम्मेदारी का हिस्सा थी, उन्होंने अपनी जिम्मेदारी से अलग कोई काम नहीं किया, बल्कि अगर वह ऐसा नहीं करते तो अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते थे।

सत्यपाल मलिक ने अपनी बातचीत में कहा कि पुलवामा हमले की जांच नहीं करवाई गई, लेकिन तथ्य यह है कि पुलवामा हमले के 6 दिन बाद 20 फरवरी को इसकी जांच नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी को सौंपी गई थी। करीब डेढ़ साल बाद 25 अगस्त 2020 को एनआईए ने 13 हजार 500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी। इस चार्जशीट में एनआईए ने आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और उसके सरगना मसूद अजहर को हमले का मास्टरमाइंड बताया था।

पुलवामा विस्फोट लंबे समय के बाद हुआ आतंकी हमला था, जिसके जवाब में मोदी सरकार ने पाकिस्तान में घुस कर बालाकोट पर एयर स्ट्राईक की थी। क्योंकि भारत ने पहली बार हमलावर देश के भीतर घुस कर सर्जिकल एयर स्ट्राईक की थी, और यह चुनावों के दौरान ही हुई थी, इसलिए स्वाभाविक है कि चुनावों में इतनी बड़ी घटना का बार बार जिक्र होना ही था।

सत्यपाल मलिक का कहना है कि मोदी 2019 का चुनाव सर्जिकल स्ट्राईक के कारण जीत गए थे, इसलिए 2024 में उनके जीतने का सवाल ही नहीं। एक्स पर बातचीत का वीडियो शेयर करते हुए राहुल गांधी ने लिखा कि क्या इस बातचीत से ईडी-सीबीआई के बीच हलचल मच जाएगी? शायद राहुल को यह अंदाजा नहीं कि सत्यपाल मलिक के अव्यवहारिक आरोप जनता को प्रभावित करने में अब तक विफल रहे हैं।

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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