Rahul Gandhi Comments: कीचड़ का जवाब गुलाल से नहीं दिया जा सकता
सदन की कार्यवाही से कही गई बातों को निकालना अब बीते युग की बात हो गई है, यह उन दिनों की बात है, जब लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही का संसद टीवी से सीधा प्रसारण नहीं हुआ करता था।

"कीचड़ उसके पास था, मेरे पास गुलाल, जो भी जिसके पास था, उसने दिया उछाल|" संभवत नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा में यह वाक्य राहुल गांधी के लिए बोला है। वैसे तो राज्यसभा में भी विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे, दिग्विजय सिंह और जयराम रमेश ने राहुल गांधी जैसे आरोप ही लगाए थे। लेकिन नरेंद्र मोदी उन्हें उतनी गंभीरता से लेते ही नहीं। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बहस के दौरान राज्यसभा में भी कांग्रेस के नेताओं ने गौतम अडानी को ही मुख्य मुद्दा बनाया था। लेकिन नरेंद्र मोदी ने न लोकसभा में अडानी के मुद्दे पर कुछ बोला, न राज्यसभा में।
नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाया गया है कि उनके प्रधानमंत्री बनने के बाद अडानी की संपत्ति 8 बिलियन डालर से बढकर 140 बिलियन डालर हो गई, और वह दुनिया का दूसरा बड़ा अमीर आदमी बन गया, जबकि मोदी के प्रधानमंत्री बनने से पहले वह 609 नंबर पर था।सवाल यह है कि नरेंद्र मोदी ने ऐसा क्या किया कि अडानी की संपत्ति बढती चली गई।राहुल गांधी का आरोप है कि मोदी सरकार ने उनको लाभ पहुँचाने वाली सरकारी नीतियां बनाई और व्यक्तिगत तौर पर विदेशी और देशी सौदे दिलाए।राहुल गांधी ने ऐसे चार उदाहरण दिए थे, जिनसे उन्होंने साबित करने की कोशिश की कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद किस तरह गौतम अडानी की मदद की।

वैसे प्रधानमंत्री को किसी उद्योगपति का बचाव नहीं करना चाहिए, लेकिन राहुल गांधी ने आरोप सीधे प्रधानमंत्री पर लगाए थे और सात सवाल किए थे।जैसे राज्यसभा में सभापति जगदीप धनखड़ ने मल्लिकार्जुन खड़गे और बाकी विपक्षी नेताओं से कहा कि वे जो आरोप लगा रहे हैं, उनके साथ दस्तावेजी सबूत टेबल पर रखें।यह कोई पहली बार नहीं है कि सदन में राजनीतिक आरोप लगाए जाते हैं, किसी ख़ास आरोप पर दस्तावेजी सबूत मांगने की बात सरकार का कोई मंत्री या सदस्य करता भी है।लेकिन सभापति का यह काम नहीं है कि वह सरकार की तरफ से विपक्ष के नेताओं से सबूत मांगे।
लोकसभा में स्पीकर ओम बिड़ला ने टोकाटोकी के बीच भी राहुल गांधी को बोलने दिया।वैसे राहुल गांधी ने अपने भाषण में कुछ सबूत भी दिए थे, इसलिए ओम बिड़ला ने उन्हें उस तरह नहीं टोका, जैसे राज्यसभा में सभापति ने टोका।हालांकि जब भाजपा के मंत्री और सांसद राहुल गांधी को टोक रहे थे, तब स्पीकर को चाहिए था कि वह आरोपों के साथ सबूत सदन के पटल पर रखने को कहते, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया, बल्कि राहुल गांधी से कहा कि उन्हें अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता है।
स्वाभाविक है कि सरकार को राज्यसभा सभापति द्वारा विपक्ष को टोकना अच्छा लगा।इसलिए स्पीकर से कहा गया होगा कि उन्होंने सभापति की तरह राहुल गांधी को क्यों नहीं टोका।लेकिन अगले दिन जो हुआ है, वह लोकसभा स्पीकर की गरिमा को घटाने वाला है।क्योंकि जिन आरोपों को स्पीकर ने यह कह कर लगाने दिया था कि बाकी आपकी मर्जी है, उन आरोपों को सारे अखबारों में छपने, टीवी चैनलों पर प्रसारित होने और इंटरनेट पर वायरल होने के एक दिन बाद सदन की कार्यवाही से निकाल दिया गया, और इतना ही नहीं खुद स्पीकर का कहा वह वाक्य भी सदन की कार्यवाही से निकाल दिया गया, जिसमें उन्होंने कहा था कि बाकी आप की मर्जी है।
राहुल गांधी ने ऐसा क्या कहा था कि उसे सदन की कार्यवाही से निकाल दिया गया।एक तो उन्होंने सदन में उस समय का एक फोटो दिखाया था, जब मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे और वह गौतम अडानी के विमान में उनके साथ बैठे थे।हालांकि स्पीकर ने उस समय राहुल गांधी को सदन में पोस्टरबाजी नहीं करने को कहा था।
राहुल गांधी ने वह फोटो दिखाते हुए कहा था, "सर, प्राइम मिनिस्टर साहब की फोटो है।उसमें उनका बहुत अच्छा चेहरा नजर आ रहा है।उनके पीछे अडानी का लोगो है। वे अडानीजी के हवाई जहाज में घुस रहे हैं।इसलिए मैंने सोचा कि आज के प्रेसिडेंट एड्रेस में मैं नरेंद्र मोदीजी का अडानीजी का जो रिश्ता है, उसके बारे में आपको थोड़ा बता देता हूँ, इस रिश्ते की शुरुआत वर्षों पहले हुई थी जब मोदीजी गुजरात के मुख्यमंत्री थे।जब देश के अधिकतर बिजनेस मैन प्रधानमंत्री को लेकर सवाल कर रहे थे और विरोध में थे, तब एक आदमी प्रधानमंत्री के साथ कंधे से कंधा मिला रहा था|" राहुल के संबोधन का यह अंश कार्यवाही से हटा दिया गया।
इसके अलावा राहुल गांधी के भाषण से पीएम मोदी के बांग्लादेश दौरे और अडानी को कॉन्ट्रैक्ट मिलने, श्रीलंका इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड के चेयरमैन के बयान, प्रधानमंत्री के इजरायल दौरे और अडानी को इजरायल से डिफेन्स का कांट्रेक्ट मिलने।हवाई जहाज में साथ सफर करने के बाद एसबीआई का अडानी को एक बिलियन डॉलर का लोन देना।इन सभी आरोपों के अलावा प्रधानमंत्री से पूछे गए सभी सात सवालों को भी रिकार्ड से हटा दिया गया।
यह भी सही नहीं है कि राहुल गांधी के लगाए गए आरोप सही हैं, लेकिन उन्होंने जो सवाल पूछे थे, वे अडानी को लेकर नरेंद्र मोदी पर लगाए गए आरोप थे।सवालों की शक्ल में इस तरह के आरोप लगाने से पहले ही राहुल गांधी को टोका जाना चाहिए था, लेकिन अगर आरोप लग गए हैं, अखबारों में छप गए हैं, टीवी चेनलों पर दिखा दिए गए हैं, इंटरनेट पर मौजूद हैं, तो उन्हें सदन की कार्यवाही से निकाले जाने का क्या मतलब है।
सदन की कार्यवाही से कही गई बातों को निकालना अब बीते युग की बात हो गई है, यह उन दिनों की बात है, जब लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही का संसद टीवी से सीधा प्रसारण नहीं हुआ करता था।संसद के खुद के चैनल पर प्रसारित कार्यवाही को रिकार्ड से कैसे निकाल सकते हैं।अब कोई संसद की कार्यवाही का रिकार्ड देखने के लिए संसद की लाईब्रेरी में नहीं जाता, गूगल पर सब मिल जाता है और गूगल अपने राहुल गांधी के भाषण को हटाने से रहा।अब इस मुद्दे पर नया विवाद भी खड़ा हो गया है कि स्पीकर सदन में दिए गए भाषण के अंश को एक दिन बाद रिकार्ड से हटाने के निर्देश कैसे दे सकते हैं।
लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने रिकार्ड से राहुल गांधी के भाषण के अंश हटाने के खिलाफ स्पीकर को चिठ्ठी लिखी है।वैसे भी प्रधानमंत्री को उन सभी आरोपों का सदन में जवाब देना चाहिए था, ताकि उन आरोपों को सदन से बाहर दोहराया जाए, तो उनके जवाब भी मौजूद हों।कबूतर के आँख बंद करने से बिल्ली भाग नहीं जाती।जैसाकि प्रधानमंत्री ने राज्यसभा में कहा कि जितना कीचड़ उछालोगे, उससे कमल ही खिलेगा।भले ही विपक्ष के कीचड़ से कमल ही खिले, लेकिन कीचड़ का जवाब दिया जाना चाहिए था।
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












Click it and Unblock the Notifications