Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

राहुल के रायबरेली जाने से उठने लगे सवाल

Rahul Gandhi Raebareli: 'क्या राहुल गांधी अमेठी से चुनाव लड़ेंगे' से लेकर 'राहुल गांधी अब रायबरेली से चुनाव लड़ेंगे' की राजनीतिक यात्रा में कांग्रेस का अतीत, वर्तमान और भविष्य गुंथा हुआ है।

राजनीति का एक सिद्धांत होता है। आप न तो डरे हुए दिख सकते हैं और न ही 'रणछोड़' हो सकते हैं किंतु आज सुबह जैसे ही कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश की अमेठी सीट से किशोरी लाल शर्मा और रायबरेली सीट से राहुल गांधी के नाम का एलान किया, राहुल गांधी के ऊपर उपरोक्त दोनों उपमाएं चस्पा हो गईं।

Rahul Gandhi

ऐसा नहीं है कि अतीत में राजनेताओं ने अपनी चुनावी सीट न बदली हो किंतु गांधी-नेहरू परिवार से अमेठी और रायबरेली का रिश्ता ही कुछ ऐसा है। 1977 में जनता पार्टी से रविंद्र प्रताप सिंह, 1998 में भाजपा से संजय सिंह और 2019 में भाजपा से स्मृति ईरानी को छोड़ दिया जाए तो अमेठी ने 31 वर्षों तक गांधी-नेहरू परिवार का ही साथ दिया है। यही हाल रायबरेली लोकसभा सीट का है जहां 1977-80 में जनता पार्टी से राजनारायण और 1996-1999 तक भाजपा से अशोक सिंह सांसद रहे जबकि 1952 से 2019 तक शेष समय यहां गांधी-नेहरू परिवार के हाथ में ही कमान रही।

सोनिया गांधी के राजस्थान से राज्य सभा सांसद बनने के बाद से यह माना जा रहा था कि उनकी उत्तराधिकारी प्रियंका गांधी होंगी और राहुल एक बार पुनः अमेठी जाएंगे किंतु राहुल को रायबरेली से उतार कर कांग्रेस ने अपने कार्यकर्ताओं को हतोत्साहित करने के साथ ही भाजपा को राहुल पर हमले करने का ऐसा अवसर दिया है, जो लोकसभा चुनाव के बचे 5 चरणों में पार्टी को भारी पड़ सकता है।

क्या राहुल को सेफ जोन में भेजा गया?

2014 और 2019 की मोदी लहर में रायबरेली ही एकमात्र सीट थी, जिसे मोदी का तिलिस्म तोड़ नहीं पाया था। जबकि 2019 में राहुल स्वयं अमेठी से स्मृति ईरानी से चुनाव हार गए थे। हालांकि उन्होंने केरल की मुस्लिम बहुल वायनाड सीट से भी चुनाव लड़ा और जीत भी गए किंतु अमेठी उनसे छूट गया। इस बार चूंकि राहुल वायनाड में भी त्रिकोणीय मुकाबले में फंसे हैं, अतः उन्होंने वायनाड को अपना घर बता दिया।

यहां गौर करने वाली बात है कि इसके तुरंत बाद स्मृति ईरानी ने भी अमेठी को अपना घर बताते हुए गृह-प्रवेश कर लिया गोयाकि उन्हें अनुमान रहा होगा कि राहुल वायनाड के साथ ही अमेठी लौट सकते हैं। स्मृति ईरानी जैसा अनुमान तो कांग्रेस का कार्यकर्ता भी लगा रहा था कि राहुल अमेठी से चुनाव लड़ेंगे तो देश में उनकी छवि 'संघर्षशील' नेता की बनेगी। राहुल पर भी इसका दबाव निश्चित रूप से रहा होगा किंतु दबाव से निकलकर यदि वे अमेठी लौटते तो स्मृति भी अहसज हो जातीं।

अब स्थिति यह है कि स्मृति के साथ ही पूरी भाजपा राहुल को 'रणछोड़' सिद्ध करने में लग जाएगी। राहुल के साथ ही इसका प्रभाव कांग्रेस पर भी पड़ेगा। इसे ऐसे समझें कि जिस सेना का सेनापति ही हार के डर से अपने गढ़ को छोड़ गया हो, उसपर अब कौन विश्वास करेगा? अमेठी छोड़ना राहुल के राजनीतिक भविष्य में हमेशा के लिए दाग बना दिया जाएगा। हालांकि किशोरी लाल शर्मा भी अमेठी में बहुत जाना पहचाना नाम है लेकिन देखना यह होगा कि वो स्मृति ईरानी के सामने कितना किला लड़ा पाएंगे।

प्रियंका की सक्रिय राजनीति में आने का रास्ता बंद!

स्वाभाविक रूप से प्रियंका गांधी वाड्रा का दावा रायबरेली पर राहुल के मुकाबले अधिक था क्योंकि वे वहां सोनिया गांधी की उत्तराधिकारी के रूप में काम देख ही रही थीं किंतु क्या राहुल की उम्मेदवारी से एक बार पुनः प्रियंका की सक्रिय राजनीति का रास्ता बंद हो गया है? यह सवाल राजनीतिक हलकों में उभर रहा था। कहा तो यह भी जा रहा है कि एक बार पुनः बहन ने भाई के लिए कुर्बानी दी है। हालांकि यह कहना अभी जल्दबाजी होगा क्योंकि प्रियंका अब भी सक्रिय राजनीति में आ सकती हैं।

यदि राहुल वायनाड और रायबरेली, दोनों लोकसभा सीटों से चुनाव जीत जाते हैं तो उन्हें एक सीट छोड़नी होगी। संभव है वो रायबरेली सीट छोड़ दें क्योंकि राहुल दक्षिण के दुर्ग को छोड़कर भाजपा को विस्तार का अवसर नहीं देना चाहेंगे। फिर 2026 में केरल विधानसभा चुनाव में भी राहुल ही वहां पार्टी के स्टार प्रचारक होंगे। यदि राहुल रायबरेली छोड़ देते हैं तो प्रियंका का सक्रिय राजनीति में उतरना संभव है। तब पार्टी पर परिवारवाद के आरोपों का दबाव भी नहीं रहेगा और उपचुनाव के जरिए वो आराम से लोकसभा में दाखिल हो सकती हैं।

अमेठी छोड़ने का दांव उल्टा पड़ेगा?

पिछले कुछ लोकसभा चुनावों को देखें तो अमेठी में कांग्रेस के परंपरागत वोटर का गांधी-नेहरू परिवार से मोहभंग हुआ है। 2004 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को 76.20 प्रतिशत वोट मिले थे जबकि भाजपा को मात्र 4.40 मत प्राप्त हुए थे किंतु 2009 में कांग्रेस का वोट प्रतिशत 5 फीसद गिर गया जबकि 2014 में यह 71.78 प्रतिशत से गिरकर 46.71 प्रतिशत पर आ गया।

2019 में कांग्रेस को 43.84 प्रतिशत वोट मिले जबकि भाजपा ने करीब 50 प्रतिशत वोट शेयर के साथ अमेठी पर कब्जा कर लिया। राहुल गांधी के पास अपनी परंपरागत सीट पर वोट प्रतिशत में बढ़ोत्तरी के साथ ही इसे पुनः पार्टी की झोली में डालने का एक अवसर था किंतु अब जबकि वे रायबरेली कूच कर चुके हैं तो इसका दांव उल्टा भी पड़ सकता है।

भाजपा द्वारा पूरे देश में एक नेरेटिव सेट किया जा सकता है कि जब कांग्रेस का सबसे लोकप्रिय चेहरा ही हार के डर से सुरक्षित सीट की तलाश में रहा तो पार्टी के अन्य उम्मीदवारों से क्या अपेक्षा करें? इसके अलावा मतदाताओं के मन में यह नैरेटिव भी सेट हो सकता है कि गांधी-नेहरू परिवार जिस सीट से हार जाता है, वहां वापस नहीं जाता।

ऐसे में राहुल गांधी का अमेठी छोड़ रायबरेली आना भी मतदाताओं में भ्रम की स्थिति बनायेगा। फिर यदि राहुल को रायबरेली से लड़ाना ही था तो 26 अप्रैल को वायनाड में मतदान के बाद ही उनके नाम का एलान किया जा सकता था। इसी प्रकार अमेठी से भी किशोरी लाल शर्मा के नाम का एलान पहले हो सकता था।

भाजपा ने स्मृति ईरानी के नाम का एलान पहले चरण के मतदान के साथ ही कर दिया था। खबर है कि किशोरी लाल शर्मा पिछले एक सप्ताह से अमेठी में डटे हुए हैं और मैराथन बैठकें कर रहे हैं। राजीव गांधी के सांसद रहने के दौरान पंजाब से आए किशोरी लाल का अमेठी में भी अपना जनाधार है किंतु नामांकन के अंतिम दिन उनके नाम की घोषणा से कार्यकर्ताओं में कितना उत्साह जागता है, यह देखना होगा।

ऐसे में कांग्रेस के समक्ष उत्पन्न इन दुविधाओं को दूर करने के लिए और भाजपा के नैरेटिव को ध्वस्त करने के लिए राहुल-प्रियंका को बहुत से सवालों का जवाब देना होगा ताकि उनके समर्थकों और कार्यकर्ताओं सहित जनता में बन रही भ्रम की स्थिति समाप्त हो।

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+