Bihari Labourers in TN: फेक घटना बताकर रियल प्रताड़ना
प्रवासी मजदूरों के साथ हिंसा के मामले में दोनों राज्य की सरकारें जहां यह दिखाने की कोशिश कर रही हैं कि कुछ हुआ ही नहीं, वहीं बिहारी मजदूर और उनकी आवाज उठाने वाले पत्रकार दोनों पिस रहे हैं।

Bihari Labourers in TN: तमिलनाडु में बिहारी मजदूरों पर हो रही कथित हिंसा की खबर सामने आने के बाद भारी संख्या में बिहारी मजदूर वापस अपने राज्य लौट रहे हैं। बिहार सरकार बार-बार कह रही है कि तमिलनाडु में बिहारियों पर हो रही हिंसा की खबर झूठी है लेकिन 'जाप' सुप्रीमो पप्पू यादव, जन सुराज अभियान के संयोजक प्रशांत किशोर, लोक जनशक्ति पार्टी के मुखिया चिराग पासवान जैसे नेता बिहार पुलिस के दावों की हवा अपने बयानों से निकाल रहे हैं।
प्रशांत किशोर ने बिहार और तमिलनाडु दोनों प्रदेशों की पुलिस को खुली चुनौती दी। उन्होंने कहा कि मैंने दो वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड किए हैं, जहां हिंदी भाषी लोगों को स्थानीय तमिल लोगों ने पीटा था। ऐसी ही एक घटना कोंगु जिले में ट्रेन में हुई थी। मैं बिहार और तमिलनाडु पुलिस को चुनौती देता हूं कि मेरे दो वीडियो को फर्जी घोषित करे और मेरे खिलाफ एफआईआर दर्ज करे।
प्रशांत किशोर ने कहा कि कोंगु क्षेत्र में कुछ घटनाएं हुईं और तमिलनाडु के शीर्ष नेता स्थानीय युवाओं को हिंदी मूल के लोगों को पीटने के लिए उकसा रहे हैं। वे विधानसभाओं में रैलियों को संबोधित कर रहे हैं और यह महीनों से हो रहा है। यदि बड़े नेता भड़काऊ भाषण देते हैं, तो इसका स्थानीय लोगों पर प्रभाव पड़ेगा। जो लोग तमिलनाडु को समझते हैं, वे जानते हैं कि कोंगु क्षेत्र में हिंदी भाषी लोगों को परेशान किया जा रहा है। मैं कहना चाहता हूं कि जो लोग भड़काऊ भाषण दे रहे हैं, उन्हें दंडित किया जाना चाहिए।
तमिलनाडु मामले में सभी वीडियो फर्जी नहीं
एक तरफ जहां बिहार और तमिलनाडु की पुलिस सोशल मीडिया पर अपलोड किए गए सभी वीडियो को फर्जी बता रही है। दूसरी तरफ चिराग पासवान कहते हैं कि यदि एक वीडियो भी सही है तो बिहार की पुलिस को उसे गंभीरता से लेना चाहिए। बिहार के मजदूरों के साथ यह कोई पहली बार हिंसा की खबर सामने नहीं आई है। बिहारी मजदूर महाराष्ट्र से लेकर असम तक अपमानित होता रहा है। फिर इस बार ऐसा क्या हुआ कि बिहार पुलिस अचानक सक्रिय हो गई?
वास्तव में तेजस्वी यादव एमके स्टालिन के जन्मदिन में शामिल होने तमिलनाडु गए थे। उसी दौरान बिहारी मजदूरों के साथ हुई हिंसा का मामला उछल गया। मीडिया में जोर शोर से मामला उछला कि बिहारी मजदूरों की पिटाई और हत्या के दौरान ही तेजस्वी सीएम स्टालिन के जन्मदिन के जश्न में शामिल हुए हैं। इस बात की बिहारियों के बीच जमकर आलोचना होने लगी। मामले पर बीजेपी का बयान आया- 'तेजस्वी केक खाने तमिलनाडु गए लेकिन वहां रह रहे बिहारी मजदूरों का बह रहा खून उन्हें नहीं दिखा।'
आनन फानन में कैसे होगा न्याय
चौतरफा फजीहत से घिरी बिहार सरकार के बचाव के लिए आनन फानन में जब बिहार पुलिस को कुछ नहीं सूझा तो उन्होंने तमिलनाडु में प्रवासी श्रमिकों पर हमले का फर्जी वीडियो फैलाने के आरोप में अमन कुमार, राकेश तिवारी, युवराज सिंह राजपूत और मनीष कश्यप पर एफआईआर दर्ज कर दी। इसमें जमुई से अमन कुमार की गिरफ्तारी हुई। दूसरी तरफ तमिलनाडु पुलिस ने भी मामले में मोहम्मद तनवीर और प्रशांत उमराव पटेल पर एफआईआर दर्ज कर दी।
एफआईआर के बाद सबसे अधिक चर्चा 'सन आफ बिहार' के नाम से लोकप्रिय यू ट्यूबर मनीष कश्यप की हुई। उनका यू ट्यूब चैनल 'सच तक' बिहारियों के बीच सबसे लोकप्रिय यू ट्यूब चैनलों में से एक है। उन पर फेक वीडियो बनाकर वायरल करने का आरोप है। एक खबरिया चैनल पर मनीष ने लग रहे आरोपों पर एक एक करके सफाई दी है। मनीष के अनुसार- 'उन्होंने वीडियो शेयर करते हुए साफ साफ लिख दिया था कि उनके पास वीडियो आया है। यदि यह वीडियो सच है तो बिहार पुलिस इसकी जांच करे। उन्होंने संपर्क के लिए वीडियो शेयर करने वाले का कांटेक्ट नंबर भी डाल दिया था।'
मनीष कश्यप को सफाई देने का भी नहीं मिला मौका
मनीष कश्यप पर फर्जी वीडियो और अपनी गिरफ्तारी की झूठी खबर फैलाने के मामले में एफआईआर की गई है। इस प्रकरण में उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर भी नहीं दिया गया। मनीष कहते हैं: 'पुलिस की सक्रियता से लगता है कि उन पर राजनीतिक दबाव है।' मनीष ने साक्षात्कार में संदेह जताया है कि फर्जी वीडियो सर्कुलेट करने का काम राष्ट्रीय जनता दल के नेता भी कर सकते हैं क्योंकि तमिलनाडु मामले पर वे चारों तरफ से घिर रहे थे। मनीष के अनुसार 'उन्होंने भाजपा दजयू सरकार की आलोचना में भी खूब सारे वीडियो बनाए। उत्तर प्रदेश में जाकर कई वीडियो बनाए जिसमें उत्तर प्रदेश सरकार से तीखे सवाल पूछे। लेकिन बिहार की नई सरकार में पत्रकार डरा हुआ है। पश्चिम बंगाल और केरल में भी ऐसी स्थिति है पत्रकारों के लिए।'
बिहार में कानून व्यवस्था की स्थिति इस हद तक बिगड़ी हुई है कि अपराधियों में पुलिस का खौफ नहीं है। पुलिस पर बिहार में पहले के मुकाबले हमले बढ़े हैं। बहुत मजबूरी ना हो तो पुलिस भी किसी अपराधी पर हाथ डालने से बचती है। वह अपराधियों के खिलाफ जल्दी एफआईआर दर्ज नहीं करती। पुलिस पर हमले की बिहार में 2020 के अंदर जहां 340 घटनाएं हुई थीं, वहीं 2022 में बढ़कर 450 हो
गई हैं।
बिहार के नए पुलिस महानिदेशक राजविंदर सिंह भट्टी के आने के बाद बिहार में एक उम्मीद जगी थी कि कानून व्यवस्थाा की स्थिति दुरुस्त होगी लेकिन ऐसा लग रहा है कि अपराधियों के सामने पुलिस कमजोर पड़ गई है। आरटीआई एक्टिविस्ट शिव प्रकाश राय ने पुलिस मुख्यालय से जानकारी मांगी है कि आपराधिक मामलों में कितने लोगों के खिलाफ बॉडी वारंट गिरफ्तारी, कुर्की संपत्ति जब्त करने से संबंधित मामले हैं जो न्यायालय आदेश के बाद भी लंबित हैं?
इस सवाल पर अपराध अनुसंधान विभाग के पुलिस अधीक्षक ने 31 मई को अप्रैल 2022 तक की पूरी जानकारी उन्हें सौंपी। सूचना के अधिकार से मिली जानकारी से यह बात सामने आई कि बिहार की पुलिस फरार वारंटियों के गिरफ्तारी आदेश को दबा कर बैठी है। यदि वह न्यायालय के आदेश को दबा कर नहीं बैठती तो कुर्की-जब्ती के 4 हजार मामले प्रदेश में पेंडिंग कैसे रहते?
रिपोर्ट में जानकारी दी गई है कि बिहार में करीब 53 हजार से भी अधिक फरारी के मामले हैं। अगर पुलिस ईमानदारी से अपना काम करती तो न्यायालय के आदेश के बाद भी 53 हजार से अधिक आरोपी पुलिस गिरफ्त से बाहर कैसे रहते? लेकिन फिलहाल इन फरार अपराधियों को भूलकर बिहार पुलिस एक यू ट्यूबर मनीष कश्यप को तलाशने में व्यस्त है।
उधर तमिलनाडु की सरकार और पुलिस जरूर ऊपर से प्रवासी कामगारों के लिए सहानुभूति दिखा रही है लेकिन सूत्र यह बता रहे हैं कि कामगारों को पुलिस ने धमकाया है कि कोई बयान सामने नहीं आना चाहिए। वे यदि सच बोलेंगे तो उन पर पुलिस की कार्रवाई भी हो सकती है। उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है। यहां यह भी समझने की जरूरत है कि दो चार वीडियो फेक होने का यह मतलब बिल्कुल नहीं लगाया जाना चाहिए कि तमिलनाडु में बिहारियों पर हुई हिंसा से जुड़ा हर एक वीडियो फेक है।
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प्रवासी मजदूरों के साथ हिंसा के मामले में जहां तमिलनाडु सरकार अपने राज्य की छवि बचाने की कोशिश कर रही है वहीं बिहार सरकार के नेता डीएमके के साथ अपनी राजनीतिक साझेदारी। इन सबके बीच अगर कोई पिस रहा है तो वह है बिहारी मजदूर और उसकी आवाज उठाने वाले पत्रकार और एक्टिविस्ट।
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(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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