Pakistan Army: पाक फौज में बगावत की सजा, इमरान खान हुए खौफ़जदा
Pakistan Army: 26 जून को जब पाकिस्तान आर्मी के प्रवक्ता मेजर जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने एक प्रेस कांफ्रेस में अपने ही बड़े-अफसरों के खिलाफ कार्रवाई का ऐलान किया तो पूरे पाकिस्तान में भूचाल सा आ गया। सबकी जुबान पर एक ही बात थी कि अब इमरान खान नहीं बचेंगे। चर्चा यह भी है कि इमरान खान की शह पर पाकिस्तान आर्मी में बगावत की तैयारी चल रही थी। तीन बड़े आर्मी अफसरों की बर्खास्तगी, 15 के खिलाफ जांच और कुछ पाकिस्तानी रिटायर्ड जनरलों और उनके परिवार के लोगों की गिरफ्तारी बताती है कि पाकिस्तान किस दिशा में जा रहा है।
ऐसे में मौजूदा आर्मी चीफ जनरल आसीम मुनीर के सामने खुद की और पाकिस्तान की इज्जत बचाने के लिए एक ही उपाय था, बगावत का मंसूबा बनाने वालों के खिलाफ कार्रवाई। इसी कार्रवाई के तहत पाकिस्तान में लेफ्टिनेंट जनरल और ब्रिगेडियर स्तर के आर्मी अधिकारी गिरफ्तार किये गये हैं।

पाकिस्तान के कई वरिष्ठ मीडियाकर्मियों का मानना है कि बकरीद के बाद आर्मी इमरान खान और उनके साथियों पर टूट पड़ेगी। दअरसल 9 मई 2023 को इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद, रावलपिंडी, पेशावर, मर्दन, चकदारा, लाहौर, सरगोधा, फैसलाबाद, मियांवाली और मुल्तान में 20 से अधिक सैन्य प्रतिष्ठानों पर प्रदर्शनकारियों द्वारा हमले किये गये थे जिनमें आर्मी हेडर्क्वाटर पर हमला भी शामिल था। डीजी आईएसपीआर का कहना है कि 75 साल में हमारे दुश्मन जो ना कर पाए, उसे एक सियासी जमात ने कर दिया। ये हमले बिना किसी मसूंबाबंदी के नहीं हो सकते थे और इसमें जो भी शामिल हैं, उसे हर हाल में कानून के दायरे में आना ही होगा।
ऐसे में पाकिस्तान आर्मी ने सबसे पहले अपने ही आला अफसरों पर कार्रवाई की है। जिन आला अधिकारियों को इमरान खान की पार्टी के साथ मिलकर आर्मी से बगावत करने के लिए प्रथम नजरिए में दोषी पाया गया है, उन्हें सीधे बर्खास्त कर दिया गया है। बगावत के दोषी पाए गए अफसरों में एक थ्री स्टार जनरल और दो ब्रिगेडियर ओहदे पर तैनात थे। इसके अलावा 15 और अफसरों के खिलाफ जांच चल रही है।
आर्मी के खिलाफ बगावत में केवल वर्तमान फौजी अधिकारी ही शामिल नहीं है, बल्कि रिटायर्ड जनरल भी इसमें है। आईएसपीआर ने साफ साफ कहा कि सेवानिवृत्त चार-सितारा जनरलों के दो करीबी रिश्तेदार, जिनमें एक की पोती और एक दामाद, एक सेवानिवृत्त तीन-सितारा और दो-सितारा जनरल के पति-पत्नी और एक दो-सितारा जनरल के दामाद भी बगावत में शामिल हैं और उन्हें गिरफ्तार भी कर लिया गया है। पाक फौज का स्पष्ट कहना है कि 9 मई 2023 को किसी प्रतिक्रिया में आर्मी के ठिकानों पर हमले नहीं किए गए, बल्कि निहित राजनीतिक स्वार्थ और सत्ता की लालसा के लिए एक साल से अधिक समय से निशाना बनाया जा रहा था। 9 मई को लोगों को विद्रोह के लिए उकसाया गया था ताकि वो फौज के ठिकानों पर हमला कर दें।
डीजी आईएसपीआर ने इमरान खान और उनकी पार्टी का नाम लिए बिना कहा कि उपलब्ध सबूतों से साबित होता है कि मास्टरमाइंड और सूत्रधार फौज के नेतृत्व के खिलाफ जनता का ब्रेनवॉश कर रहे थे। आईएसपीआर ने जोर देकर कहा कि जब तक 9 मई की हिंसा के दोषियों पर कार्रवाई नहीं की जाती तब तक न्याय नहीं मिलेगा, अन्यथा कोई भी राजनीतिक समूह अपने निहित स्वार्थ के लिए इस तरह के हिंसक प्रकरण को दोहराएगा। अगर मास्टरमाइंड से नहीं निपटा गया तो इससे आंतरिक कलह पैदा होगी जो अंततः बाहरी आक्रमण का मार्ग प्रशस्त करेगी। साफ है कि आने वाले दिनों में पाक आर्मी इमरान खान और उनके साथ साजिश में शामिल लोगों को सजा देने का मन बना चुकी है।
तो क्या पाकिस्तान में इमरान खान और पीटीआई के लिए खेल खत्म हो गया है? इस पर पाकिस्तान के दैनिक अखबार डॉन ने अपने संपादकीय में लिखा है- "सेना का मानना है कि वर्तमान में पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ा खतरा आंतरिक राजनीतिक अस्थिरता है, जिसने पिछले एक साल में देश को तबाह कर दिया है। जब डीजी आईएसपीआर ने 9 मई की घटना को एक पार्टी के नेतृत्व द्वारा सेना के खिलाफ पिछले कई महीनों से लोगों को गुमराह करने में लिए एक सुनियोजित साजिश बताया, तो इससे यह स्पष्ट हो गया कि दोष की उंगली किस पर है।"
डॉन आगे लिखता है कि "सेना की यह चेतावनी कि इस प्रक्रिया को तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाने की राह में बाधाएं पैदा करने वालों से सख्ती से निपटा जाएगा। सर्वोच्च न्यायालय के लिए यह एक इशारा है जो वर्तमान में सैन्य अदालतों के तहत नागरिकों पर मुकदमा चलाने की वैधता को चुनौती देने वाले एक मामले की सुनवाई कर रहा है, इस चेतावनी के निहितार्थ शुभ नहीं लग रहे हैं।"
चीफ जस्टिस उमर अता बंदियाल की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय पीठ आर्मी कोर्ट में सामान्य नागरिकों पर मुकदमा चलाए जाने की वैधता पर सुनवाई कर रही है। इस पीठ में जस्टिस इजाजुल अहसन, जस्टिस मुनीब अख्तर, जस्टिस याह्या अफरीदी, जस्टिस आयशा मलिक और जस्टिस मजाहिर अली नकवी शामिल हैं। डीजी आईएसपीआर की प्रेस कांफ्रेंस के अगले दिन ही 27 जून को जस्टिस याह्या अफरीदी ने यह कह कर पीठ से अपनी राय अलग कर ली कि छह जजों के पैनल की बजाय चीफ जस्टिस फुल बेंच वाली पीठ का पुनर्गठन करें। उल्लेखनीय है कि पहले चीफ जस्टिस ने पीठ में नौ जज ही शामिल थे, लेकिन जस्टिस काजी फैज ईसा, सरदार तारिक मसूद और मंसूर अली शाह ने अलग अलग कारण बताकर संवैधानिक पीठ छोड़ दी है।
हालाँकि इमरान खान अभी भी अपने करीबियों को यह समझाने में लगे हैं कि न्यायपालिका, खास कर चीफ जस्टिस बांदियाल के रहते उनका कोई कुछ बिगाड़ नहीं पाएगा। परन्तु यह उन्हें भी यह मालूम है कि पाकिस्तानी सेना अपने सामने खड़ी बाधाओं को हटाने के लिए कुछ भी कर सकती है। पाकिस्तान की आर्मी एक बार चीफ जस्टिस तक को हाउस अरेस्ट कर चुकी है। ऐसे में डर हो या सम्मान, लेकिन पाकिस्तान के जज हमेशा फौज के पक्ष में ही रहते आए हैं।
बहरहाल, पाकिस्तान आर्मी द्वारा इतने बड़े पैमाने पर अपने ही अफसरों के खिलाफ कार्रवाई यह दर्शाती है कि इमरान खान किसी गफलत में नहीं थे कि आर्मी में उनको लेकर दोफाड़ हो चुका है। उनका अनुमान सही था कि जरूरत पड़ने पर कभी भी उनके पक्ष में आर्मी में बगावत हो सकती है। पाकिस्तान के बाहर से संचालित होने वाले कुछ पीटीआई सोशल मीडिया हैंडलर यह दावा भी करते रहे हैं कि आम जनता के सड़कों पर आने के बाद इमरान खान के समर्थन में सेना की एक बड़ी टुकड़ी सामने आ जाएगी, जिसके कारण मौजूदा आर्मी चीफ आसिम मुनीर को लेकर अविश्वास पैदा हो जाएगा और उन्हें मजबूरन इस्तीफा देना पड़ जाएगा। इसके बाद पाकिस्तान में फिर से इमरान की सत्ता आ जाएगी। लेकिन इमरान खान ने पाक आर्मी से सीधे टकराने के परिणाम का बहुत गलत आकलन किया था। मौजूदा हालत में अब इमरान खान के लिए अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन वापस पाना काफी मुश्किल होगा।
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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