मोदी का वह एजेंडा जिसके लिए चाहिए चार सौ पार

Modi ka Agenda: नरेंद्र मोदी का चार सौ पार का नारा चुनाव में चर्चा का विषय बना चुका है| हालांकि जबसे विपक्ष ने यह कहना शुरू किया कि मोदी इस जनादेश से आरक्षण खत्म कर देंगे तो मोदी ने 400 पार का नारा लगवाना बंद कर दिया। अब उसकी जगह पर तीसरी बार मोदी सरकार का नारा लगवाते हैं|

इसका एक कारण यह भी हो सकता है कि उन्हें खुद यह टार्गेट असंभव लगने लगा हो| या विपक्ष के आरक्षण खत्म करने वाले नेरेटिव की वजह से ट्रेक चेंज किया हो| वैसे मोदी और अमित शाह सफाई देते घूम रहे हैं कि आरक्षण हम तो क्या बाबा साहेब आम्बेडकर भी खत्म नहीं कर सकते| लेकिन विपक्ष भ्रम पैदा करने में काफी हद तक कामयाब होता दिख रहा है, खासकर कम पढ़े लिखे लोगों में और ग्रामीण इलाकों में|

lok sabha election 2024

दलित और ओबीसी परिवारों में चिंता बनी है कि क्या विपक्ष की आशंका सही है| क्या मोदी सचमुच जाति आधारित आरक्षण खत्म करके आर्थिक आधार पर आरक्षण करना चाहते हैं? मोदी सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल में आर्थिक आधार पर दस फीसदी आरक्षण लागू करके पहल की है, जिसे सुप्रीमकोर्ट ने भी जायज ठहरा दिया है| मोदी और अमित शाह के स्पष्टीकरणों के बावजूद जमीन पर भाजपा के कार्यकर्ताओं को इन सवालों का सामना करना पड़ रहा है| जिसका भाजपा को हिन्दी बेल्ट में थोड़ा नुकसान हो सकता है|

हालांकि मोदी या भाजपा का आरक्षण का स्वरूप बदलने का कोई इरादा नहीं है| उनका लक्ष्य ऊंचा है, जिसके लिए उन्हें 400 नहीं बल्कि 406 सीटें चाहिए| दो बिल बन कर तैयार रखे हुए हैं, लेकिन उनके लिए दो तिहाई सीटें चाहिए| वैसे लोकसभा में 362 सीटों के साथ दो तिहाई बहुमत बन जाता है| इसीलिए मोदी ने भाजपा के लिए 370 का टार्गेट रखा है|

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वैसे मोदी को इतना समर्थन तो सत्रहवीं लोकसभा में भी हासिल था| जिसका जिक्र उन्होंने एक इंटरव्यू में किया भी है| एनडीए के 353 सदस्यों के अलावा उन्हें लगभग हर बिल पर बीजू जनता दल के 12 और वाईएसआर कांग्रेस के 22 सदस्यों का समर्थन मिल रहा था| सवाल पैदा होता है कि फिर उन्होंने वे दो बिल पास क्यों नहीं करवाए, और वे दो बिल हैं कौन से?

पहला बिल है जनसंख्या नियन्त्रण का, और दूसरा बिल है समान नागरिक संहिता का| ये दोनों ही संविधान संशोधन बिल हैं| इन दोनों बिलों पर विपक्ष का तो कड़ा विरोध सर्वविदित है, क्योंकि दोनों बिलों का मुसलमान विरोध करते हैं| इन दोनों बिलों के खिलाफ मौलवियों के फतवे भी जारी हो चुके हैं| बीजू जनता दल और वाईएसआर कांग्रेस से समर्थन मिलता या नहीं मिलता, यह तो अलग बात है| खुद एनडीए में भी बिलों पर सहमति नहीं थी| जेडीयू इन दोनों ही बिलों पर समर्थन नहीं करता| जेडीयू के 16 सांसदों के छोड़कर जाने के बाद तो एनडीए की संख्या ही 337 रह गई थी|

फिर राज्यसभा से पास करवाना तो बिलकुल असंभव था| राज्यसभा में दो तिहाई बहुमत के लिए 164 सांसद चाहिए थे| आज की तारीख में राज्यसभा में भाजपा के खुद के सांसदों की संख्या 97 और एनडीए के सांसदों की संख्या 120 है| इसलिए मोदी सरकार ने ये दोनों बिल भविष्य के लिए छोड़ दिए थे|

नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर बहस का जवाब देते हुए भाजपा के लिए 370 और एनडीए के लिए 400 पार का लक्ष्य घोषित किया था| अब अगर लोकसभा में एनडीए को 406 सीटें मिल जाती हैं, तो यह दो तिहाई से 44 सीटें ज्यादा होंगी| जो राज्यसभा में दो तिहाई की कमी पूरी करेंगी| विपक्ष के कड़े विरोध के चलते बिल क्योंकि राज्यसभा में पास नहीं होंगे, इसलिए मोदी सरकार दोनों सदनों की संयुक्त बैठक बुला कर बिल पास करवा सकती है|

वैसे इन दोनों बिलों पर अगर एनडीए का एक भी घटक दल एतराज करता है, तो इंडी एलायंस में भी फूट पड़ने की प्रबल संभावना बनेगी| जैसे उद्धव ठाकरे इन दोनों बिलों का समर्थन कर सकते हैं| भले ही चुनावों में वह मुस्लिम लीग का झंडा उठाए घूम रहे हैं| उनके भाषणों से हिन्दू शब्द गायब है| लेकिन 2020 में शिवसेना के सांसद अनिल देसाई ने एक प्राईवेट मेंबर संविधान संशोधन बिल पेश किया था| वह अनिल देसाई अभी भी उद्धव ठाकरे के साथ ही हैं| उन्होंने अपने बिल में संविधान के अनुच्छेद 47 ए में संशोधन का प्रस्ताव किया था|

2020 में राज्यसभा में पेश किए गए शिवसेना सांसद के संविधान संशोधन बिल में कहा गया था कि जो परिवार सिर्फ दो बच्चे पैदा करेगा, उन्हें टेक्स, रोजगार और शिक्षा में रियायतें मिलेंगी, लेकिन जो परिवार दो बच्चों की पॉलिसी का पालन नहीं करेगा, उन्हें किसी तरह की कोई सरकारी सुविधा नहीं मिलेगी| इससे पहले 2019 के अपने बिल में भाजपा के राकेश सिन्हा ने जो जनसंख्या नियन्त्रण का प्राईवेट मेम्बर बिल पेश किया था, उसमें तो दो से ज्यादा बच्चे पैदा करने वालों को चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित करना और सरकारी नौकरियों के लिए अयोग्य ठहराने का प्रावधान था|

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने दूसरे कार्यकाल में इन दोनों ही मुद्दों पर गौर करना शुरू कर दिया था| ट्रायल के तौर पर उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू कर दी गई है| अमित शाह ने एक इंटरव्यू में कहा है कि समान नागरिक संहिता सारे देश में लागू होगी और यह इस बार भी भाजपा के चुनाव घोषणा पत्र में है| इसी तरह मोदी सरकार ने जनसंख्या नियन्त्रण के लिए एक कमेटी का गठन कर दिया है, जो बिल का प्रारूप लगभग तैयार कर चुकी है|

इस चुनाव में विपक्ष की तरफ से जो दो मुद्दे काफी प्रभावी ढंग से उठाए गए हैं, वे है महंगाई और बेरोजगारी| इन दोनों समस्याओं का मूल है जनसंख्या वृद्धि| उतना अनाज नहीं, जितनी जरूरत है, इसलिए महंगाई बढती जा रही है| उतने रोजगार नहीं है, जितनी आबादी बढती जा रहा है, तो इसका निदान भी है जनसंख्या नियन्त्रण|

भारत में हर रोज 86 हजार बच्चे पैदा हो रहे हैं| अब चीन नहीं भारत की आबादी दुनिया में सबसे ज्यादा है, 2022-23 में भारत की आबादी 1,428, 627, 663 पहुंच गई है, जबकि चीन की आबादी 1,425,671,352 है| भारत के पास 3,287,263 वर्ग किलोमीटर जमीन है, जो विश्व का सिर्फ 2.4 प्रतिशत भूभाग है, लेकिन भारत की जनसंख्या विश्व की जनसंख्या का 17 प्रतिशत से ज्यादा है| चीन के पास भारत से लगभग तीन गुना 9,598,094 वर्ग किलोमीटर जमीन है, लेकिन आबादी अब हम से कम हो गई है|

पिछले दिनों जब जनसंख्या क़ानून की बात उठी थी, तो उसका यह कह कर विरोध किया गया था कि स्वास्थ्य विभाग की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत की जनसंख्या पर नियन्त्रण हो चुका है, इसलिए किसी क़ानून की जरूरत नहीं है| इस रिपोर्ट में कहा गया था कि प्रति महिला बच्चों की औसत संख्या 2.2 से घट कर 2.0 हो गई है| लेकिन बिहार में यह 2.98, मेघालय में 2.91, उत्तर प्रदेश में 2.35 और झारखंड में 2.26 है|

भारत की सबसे बड़ी चिंता धार्मिक आधार पर जनसंख्या असंतुलन है, जिसे पूरे देश में सभी धर्मों को मानने वालों पर एक समान लागू औरकरने से नियंत्रित किया जा सकता है| इसलिए घोषित न होने के बावजूद जनसंख्या नियन्त्रण क़ानून भाजपा के एजेंडे पर है| राम जन्मभूमि मन्दिर 370 के बाद समान नागरिक संहिता तो भाजपा के एजेंडे पर शुरू से ही रहा है, जनसंख्या नियन्त्रण का मुद्दा भी भाजपा के चुनाव घोषणा पत्र में उठता रहा है|

हालांकि इस बार भाजपा ने जानबूझ कर परहेज किया, क्योंकि नरेंद्र मोदी मुसलमानों को साथ लेकर चलने और उनका वोट हासिल करने की उम्मीद पाले हुए थे| हालांकि पहले और दूसरे दौर की वोटिंग के बाद उनका भ्रम दूर हो गया तो उन्होंने कांग्रेस और अन्य दलों पर खुल कर मुस्लिम परस्ती के आरोप लगाने शुरू कर दिए|

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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