Lifestyle Diseases: चार बीमारी बनी महामारी
Lifestyle Diseases: महानगरीय भागदौड़ में एक व्यक्ति की बदलती जीवन शैली और पर्यावरण में फैला प्रदूषण देखते ही देखते जिन्दगी के लिए एक बड़ा जोखिम बन जाता है। यही जोखिम उसके जीवन में गैर-संचारी रोगों (Non-Communicable Diseases) की संभावना को बढ़ा देते हैं। भारत के राज्यों में स्वास्थ्य संबंधी एक रिपोर्ट 2017 में आईसीएमआर (भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद) के प्रयासों से सामने आई थी। जिसमें गैर संचारी रोगों (एनसीडी) की चिंताजनक वृद्धि का विस्तार से उल्लेख था। रिपोर्ट के अनुसार गैर संचारी रोगों की वजह से जहां 1990 में 37.9 प्रतिशल लोगों की मृत्यु हो रही थी। अचानक 2016 आते आते यह प्रतिशत 61.8 पर पहुंच गया।
गैर संचारी रोगों में ऐसे चार रोगों की पहचान की गई जो सबसे अधिक पीड़ितों की मृत्यु का कारण बने। इसमें प्रमुख चार रोग हैं। पहला हृदय संबंधी रोग (सीवीडी), दूसरा कैंसर, तीसरा जीर्ण श्वसन रोग (सीआरडी) और मधुमेह। यह चार रोग आम तौर पर चार बातों की लापरवाही की वजह से स्वस्थ व्यक्ति को अपना शिकार बनाते हैं। पहला खानपान की गड़बड़ी, दूसरा शारीरिक भागदौड़ और सक्रियता में कमी, तीसरा तम्बाकू और चौथा शराब का सेवन।

एक अनुमान है कि दुनिया में 50 लाख लोग साल भर में सिर्फ तम्बाकू का सेवन करने की वजह से मरते हैं। भारत में यह आंकड़ा 07 लाख का है। फिर भी हम तम्बाकू उत्पादों पर स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, जैसी चेतावनी लिख कर बेच रहे हैं लेकिन इस खतरे की पहचान होने के बावजूद क्या मजबूरी है कि इस पर प्रतिबंध नहीं लगा पा रहे।
गैर संचारी रोगों में खानपान की गड़बड़ी से होने वाला मोटापा बहुत खतरनाक है। सालभर के अंदर दुनियाभर मेें लगभग 28 लाख लोगों के मरने की वजह, उनका अधिक वजन बनता है। एक शोध के अनुसार 10 किलोग्राम अतिरिक्त वजन आपकी औसत आयु को तीन साल तक कम कर सकता है। वजन को नियंत्रित करने के लिए डॉक्टर मानते हैं कि दिनचर्या के साथ हमें अपने खाने-पीने पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। बॉडी मास इंडेक्स के माध्यम से समझा जा सकता है कि हम मोटापे के शिकार हो रहे हैं या फिर तंदुरुस्त हैं। विश्व स्वास्थ संगठन के अनुसार यदि आपका बीएमआई 25 या 25 से अधिक है तो आप ओवरवेट की श्रेणी में हैं। यदि आपका बीएमआई 30 या 30 से अधिक है तो आप मोटापे के शिकार हैं। 04 मार्च को प्रत्येक वर्ष विश्व मोटापा दिवस होता है। इस वर्ष मोटापा दिवस के अवसर पर पूरी दुनिया के मोटे लोगों पर किया गया एक अध्ययन जारी किया गया। इस अध्ययन पर विश्वास करें तो वर्ष 2035 तक दुनिया की आधी आबादी मोटापे और ओवरवेट की शिकार होगी।
अब बात उच्च कोलेस्ट्रॉल की करें तो दुनियाभर में लगभग 26 लाख लोगों की मृत्यु उच्च कोलेस्ट्रॉल की वजह से होती है। हमारे शरीर में अच्छे और बुरे दोनों तरह के कोलेस्ट्रॉल पाए जाते हैं। अच्छा वाला कोलेस्ट्रॉल जहां खून में जमने वाले फैट को कम करने में मदद करता है। हमारी धमनियों को साफ रखता है। जिससे शरीर में खून का प्रवाह सही तरह से हो सके। वहीं बुरा कोलेस्ट्रॉल प्राणघातक होता है। बुरे कोलेस्ट्रॉल को कम करने के लिए कम से कम 30 मिनट वॉक प्रतिदिन करने की सलाह डॉक्टर देते हैं। कोलेस्ट्रॉल पर शराब का सेवन बहुत घातक असर करता है। इसलिए शराब से परहेज रखना चाहिए।
इसी तरह दुनिया भर में उच्च रक्तचाप के कारण 75 लाख लोग साल भर में मरते हैं। यह हृदय रोग और स्ट्रोक के लिए भी एक प्रमुख जवाबदेह है। अमेरिकन हर्ट एसोसिएशन की जर्नल 'सर्कूलेशन' में एक अध्ययन प्रकाशित हुआ था, जिसमें बताया गया था कि किस प्रकार उच्च रक्तचाप की बीमारी अब अमीरों की बीमारी नहीं रही। वह बहुत तेजी से विकासशील और पिछड़े देशों में बढ़ रही है। स्वास्थ पत्रिका द लैंसेट में प्रकाशित 2016-20 के डाटा पर किए गए अध्ययन के अनुसार, 18 वर्ष से अधिक आयु के बहुत से वयस्कों की मृत्यु उच्च रक्तचाप की वजह से हुई।
इस बात की पुष्टि 2019-20 के राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-5) में हो जाती है। सर्वेक्षण के अनुसार भारत के अंदर 24 फीसदी पुरुषों और 21 फीसदी महिलाओं में उच्च रक्तचाप पाया गया। हृदय को तदरुस्त रखने के लिए यूनिवर्सिटी आफ साउथ आस्ट्रेलिया के शोधकर्ताओं के एक शोध में काम की बात मिली। उनके अध्ययन में इस बात की पुष्टि हुई है कि विटामिन डी न सिर्फ हड्डी बल्कि हार्ट (हृदय) की सेहत के लिए जरूरी है। यह अध्ययन यूरोपियन हार्ट जर्नल में प्रकाशित भी हुआ है। शरीर में विटामिन डी का स्तर बनाए रखने के लिए भरपूर मात्रा में कैल्शियम का सेवन करना चाहिए। सूरज की किरणों से विटामिन डी मिलता हैं। यह तो हम परिवार में सुनते आए हैं। वास्तव में सूरज की किरण विटामिन डी का सबसे अच्छा स्त्रोत है।
आईसीएमआर और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के सहयोग से मद्रास डायबिटीज़ रिसर्च फाउंडेशन द्वारा गैर-संचारी रोगों पर एक अध्ययन किया गया। अध्ययन से प्राप्त परिणाम द लेसेंट डायबिटिज एंड एंडोक्रिनोलॉजी जर्नल में प्रकाशित हुआ है।
इस अध्ययन में पाया गया कि अब मधुमेह और अन्य गैर संचारी रोग मसलन उच्च रक्तचाप, मोटापा, डिसलिपिडेमिया (शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल का स्तर अधिक हो जाना या गुड कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम हो जाना और ट्राइग्लीसेराइड का स्तर बढ़ जाना) पहले के मुकाबले अब सामान्य बीमारी की श्रेणी में आ गए हैं। एक और बात सामने आई कि आज महानगरों में जो गैर संचारी बीमारी सामान्य मानी जा रही है। यदि भारतीय गांवों ने अपनी जीवन शैली को नियंत्रण नहीं किया तो आने वाले कुछ सालों में गांवों तक यह बीमारियां, महामारी बनकर पसर जाएंगी। एक अनुमान के अनुसार 2028 तक भारत के गांव मधुमेह के बड़े विस्फोट के शिकार होंगे। भारतीय गांव इस बीमारी के मुंहाने पर खड़े हैं।
भारत के अंदर सबसे अधिक मधुमेह का प्रसार गोवा, पुडुचेरी और केरल में हुआ है। वहीं मधुमेह टाईप टू (प्री डायबिटीज) के सबसे अधिक मरीज सिक्किम में मिले। उच्च रक्त चाप के सबसे अधिक पीड़ित पंजाब में हैं। पुडुचेरी में मोटापा आम रोग बनता जा रहा है। केरल वाले बड़ी संख्या में हाइपरकोलेस्ट्रोलेमिया के शिकार हैं। हाइपरकोलेस्ट्रोलेमिया एक ऐसी अवस्था है जब हमारे खून में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा काफी ज्यादा बढ़ जाती है।
समय रहते यदि इस पर नियंत्रण नहीं लगाया गया तो यह हार्ट अटैक का कारण भी बन जाता है। कोलस्ट्रोल हमारे खून में मौजूद ऐसा सब्सटेंस होता है, जिसका काम हमारे शरीर में स्वस्थ कोशिकाओं का निर्माण करना होता है। गैर संचारी रोग से सबसे कम कोई प्रदेश प्रभावित मिले तो वे उत्तर प्रदेश, झारखंड, मेघालय और मिजोरम जैसे राज्य थे।
असल में जब हम स्वस्थ जीवन शैली की बात करते हैं तो उसमें सबसे महत्वपूर्ण होती है हमारी स्वास्थ्य संबंधी आदतें, जीवन के प्रति हमारा नजरिया। स्वास्थ्य को लेकर हमारी जागरूकता मतलब हम जीवन यापन के लिए जो भी काम करें, उस काम का सेहत पर विपरीत प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए। जिस वातावरण में हम जी रहे हैं, वहां का पर्यावरण, हवा, पानी स्वच्छ और सुरक्षित होना चाहिए। हमारा खानपान पोषण से भरपूर और संतुलित होना चाहिए। पर्याप्त नींद और शारीरिक तंदुरस्ती के लिए नियमित व्यायाम, नशे से दूरी, निजी स्वच्छता का ध्यान और अच्छे सामाजिक रिश्तों के प्रति हमें सावधान होना होगा।
वास्तव में इन्हीं सारी बातों को मिलाकर बनती है एक स्वस्थ जीवन शैली। महानगरों में अब इसे हासिल करना बहुत मुश्किल हो गया है। गांवों का जिस तेजी से शहरीकरण हो रहा है, वहां की जीवन शैली भी धीरे धीरे संक्रमित होने लगी है। सच यही है कि गांवों की तरफ सिर्फ शहरों का विकास नहीं बल्कि महानगरीय बीमारियां भी जा रहीं हैं। इसलिए आने वाले समय में इन बीमारियों के खिलाफ महानगर, शहर और भारतीय गांवों को मिलकर लड़ना होगा। अब ये बीमारियां सिर्फ 'महानगरीय रोग' नहीं रह गई हैं।
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)
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