Pakistan: इस्लामिक शुद्धतावाद का शिकार होता पाकिस्तान
Pakistan: इस बार मुहर्रम के दिन पूरे कराची में बम विस्फोट, आत्मघाती हमला या फिर टार्गेट किलिंग रोकने के लिए तगड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गयी थी। शिया मुसलमानों के लिए महत्वपूर्ण मुहर्रम के दिन कराची में तो कुछ नहीं हुआ लेकिन उसके अगले दिन पाक अफगान बार्डर पर देओबंदी सुन्नी एक आत्मघाती हमलावर के निशाने पर आ गये। इस हमले में 44 देओबंदी मुस्लिम मारे गये और 100 से अधिक घायल हो गये।
पाक अफगान बार्डर पर खैबर पख्तूनख्वा में एक खूबसूरत सा जिला है बजौर। इस बजौर जिले का मुख्यालय खार नामक एक छोटे से शहर में है। इसी खार में रविवार को जमात ए उलमा इस्लाम (एफ) के लगभग 500 पोलिटिकल वर्कर इकट्ठा हुए थे। जमीयत ए उलेमा ए इस्लाम (एफ) सुन्नी देओबंदी फिरके की एक पोलिटिकल रिलीजियस जमात है जिसके चीफ मौलाना फजलुर्रहमान हैं। जिस खैबर के बजौर में इनकी पार्टी के वर्करों पर आत्मघाती हमला हुआ है इसी खैबर के डेरा इस्माइल खान में इनका मुख्यालय भी है। इस जमात के चीफ मौलाना फजलुर्रहमान 1980 से राजनीति और इस्लामिक जिहाद दोनों में सक्रिय हैं।

अफगान वार के समय जमीयत ए उलेमा ए इस्लाम के बैनर तले ही मुजाहिदीन भर्ती किये गये थे। लेकिन उस समय इस जमात के मुखिया मौलाना शमी उल हक उर्फ मौलाना सैंडविच थे जो अफगान जिहाद के लिए दारुल उलूम हक्कानिया में जिहाद की ट्रेनिंग के इन्चार्ज थे। हालांकि नवंबर 2018 में रावलपिंडी के उनके घर के बाहर ही उन्हें चाकुओं से गोदकर मार दिया गया। लेकिन शमी उल हक ने ही मुल्ला उमर की खोज करके दी थी जो अफगान जिहाद का लीडर बना। इसी शमी उल हक के साथ सियासत शुरु करने वाले फजलुर्रहमान आगे चलकर अलग हो गये और जमीयत ए उलेमा ए इस्लाम में (एफ) लगाकर अपनी अलग लाइन खींच दी।
मौलाना फजलुर्रहमान पाकिस्तान की सियासत का एक विरोधाभासी कैरेक्टर है। हालांकि उनकी राजनीतिक हैसियत आज भी पाकिस्तान में बहुत बड़ी नहीं है लेकिन जब से इमरान खान को हटाने की मुहिम उन्होंने चलाई, वे चर्चा में आ गये। फजलुर्रहमान एक ओर तो अपने आप को पठानों का रहनुमा बताते हैं लेकिन दूसरी ओर पठानों के दमन का मुद्दा भी कभी नहीं उठाते। एक ओर वो अपने आप को राजनीतिक पार्टी के तौर पर स्थापित करना चाहते हैं लेकिन उनकी अपनी प्राइवेट इस्लामिक आर्मी भी है जिसे यदा कदा सामने लाकर अपनी मिलिट्री हैसियत भी दिखाते रहते हैं।
आजकल फजलुर्रहमान पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेन्ट (पीडीएम) का हिस्सा है और इसी एलायंस के तहत चुनाव लड़ने की तैयारी भी कर रहे हैं। पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा की प्रोविन्सियल सरकारें बर्खास्त हैं और जनरल इलेक्शन के साथ उनके भी चुनाव होने के आसार हैं। ऐसे में फजलुर्रहमान की पार्टी खैबर पख्तूनख्वा में अपनी तैयारियां कर रहे हैं। रविवार को जिस मीटिंग में आत्मघाती हमलावर ने उनके 44 लोगों को 'शहीद' कर दिया, यह मीटिंग ऐसी ही एक चुनावी तैयारी के लिए बुलाई गई थी।
रविवार को ही एक ओर जहां खैबर में आत्मघाती हमले में देओबंदी सुन्नी मुस्लिमों के लहुलुहान होने की खबरें आ रही थी ठीक उसी समय में दूसरी ओर इस्लामाबाद स्थित नेशनली असेम्बली में एक विधेयक पेश किया गया। 'द प्रिवेन्सन ऑफ वॉयलेन्ट इक्सट्रीमिज्म बिल 2023' नामक इस विधेयक का उद्देश्य रिलिजियस एक्सट्रीमिज्म (मजहबी कट्टरता) पर रोक लगाने का उपाय करना था। लेकिन नेशनल एसेम्बली में इस विधेयक का इतना विरोध हुआ कि असेम्बली के पीठासीन अधिकारी सादिक संजरानी को वह विधेयक "ड्रॉप" करना पड़ा।
रविवार को ही एक तीसरी घटना भी हुई जब चीन के वाइस प्रीमियर ही लीफेन्ग एक दिन के दौरे पर पाकिस्तान पहुंचे थे। वो पाकिस्तान चाइना इकोनॉमिक कॉरीडोर के दस वर्ष पूरा होने के अवसर पर होने वाले सम्मेलन में हिस्सा लेने आये थे। इस इकोनॉमिक कॉरीडोर को पाकिस्तान अपने लिए आर्थिक तरक्की की सीढ़ी मान रहा है लेकिन अभी तक यह किसी खास अंजाम तक नहीं पहुंच सका है।
पाकिस्तान में एक ही दिन में घटी इन तीन घटनाओं का अगर विश्लेषण करें तो समझ में आता है कि पाकिस्तान ऊपरी तौर पर चाहे जो कोशिश कर ले, वह अपने ही बनाये जाल में ऐसा फंस चुका है कि उसमें से बाहर निकल पाना उसके लिए आसान नहीं है। जाति उमरा के व्यापारी घराने से ताल्लुक रखने वाले शहाबाज शरीफ जहां पाकिस्तान में व्यापार का माहौल बनाना चाहते हैं, सॉफ्टवेयर एक्सपोर्ट को 10 बिलियन डॉलर पर पहुंचाना चाहते हैं और हर बच्चे के हाथ में लैपटाप देना चाहते हैं, वहीं पाकिस्तान का अवाम अपनी नियति मानों तय कर चुका है। उसे किसी ऐसे सच्चे इस्लामिक राष्ट्र की खोज है जो उसे सातवीं सदी में ले जाकर खड़ा कर देता हो। इसके लिए उसने इस्लामिक आतंकवाद का टूल विकसित किया है जो न सिर्फ गैर मुस्लिमों के लिए बल्कि गैर फिरके के मुस्लिमों के लिए भी जमकर इस्तेमाल किया जाता है।
पाकिस्तान में इस्लामिक आतंकवाद का इतिहास देओबंदी तंजीमों से ही जुड़ा रहा है। लश्कर ए तोएबा, जैश ए मोहम्मद या फिर अफगानिस्तान में तालिबान मुजाहिदीन भेजने के लिए देओबंदी मदरसों का ही इस्तेमाल किया गया। अब तक के पाकिस्तान में इस्लामिक आतंकवाद की जड़ें देओबंदी मदरसों तक जाकर खत्म हो जाती थीं। लेकिन अब अगर कोई देओबंदी जमात ही आत्मघाती हमलावर का शिकार हो जाए तो इसका मतलब यह है कि इस्लामिक आतंकवाद ने अपने नये ठिकाने विकसित कर लिए हैं। अब सिर्फ देओबंदी ही अपने आप को सच्चा मुसलमान नहीं कह सकते। और भी तंजीमें उभरी हैं जो ठीक उसी तरह से जवाब देना जानती हैं जैसा कि देओबंदी आतंकी अब तक पाकिस्तान में करते आ रहे थे।
गैर मुस्लिमों के साथ न रह पाने के जिस बुनियादी सिद्धांत के आधार पर पाकिस्तान का जन्म हुआ अब वह सिर्फ सच्चे मुस्लिमों का पाकिस्तान बनना चाहता है। इसकी राह में दो घोषित 'मुनाफिक' पहले से मौजूद हैं, शिया और अहमदिया। इसलिए इन पर तो उसी समय से हमले शुरु हो गये थे जिस समय पाकिस्तान वजूद में आया था। तब से लेकर आज तक शिया समुदाय पर हमला करना मानों सुन्नी मुसलमानों का एक रुटीन काम हो। इसी साल जनवरी में पेशावर की एक शिया मस्जिद में हुए विस्फोट में 84 शिया मुस्लिम उस समय मारे गये थे जब वो सिजदे में थे। अहमदिया मस्जिदों पर हमले तो आये दिन की बात है, वो तो अपने आप को पाकिस्तान में मुसलमान ही नहीं कह सकते।
इस्लामिक असहिष्णुता के आधार पर भारत से अलग हुए पाकिस्तान ने बीतते समय के साथ असहिष्णुता के नये नये आधार गढ़ लिए हैं। इसमें हर इस्लामिक फिरका दूसरे को गैर मुस्लिम घोषित किये बैठा है। सिर्फ घोषित ही नहीं कर रखा है बल्कि एक दूसरे के खिलाफ घृणा फैलाने और मौका मिलते ही हमला करने से भी नहीं चूकते। इसे रोकने के लिए अगर सरकार के स्तर पर कोई कानून बनाने की कोशिश की जाती है तो फिरकों की राजनीति करने वाले ही नेशनल एसेम्बली में उसका रास्ता रोक देते हैं, जैसे रविवार को रोक दिया। उन्हें पता है कि इस्लामिक अतिवाद को रोकने के लिए अगर ऐसा कोई कानून बन गया तो उनकी राजनीति ही नहीं पाकिस्तान के इस्लामिक वजूद पर ही सवालिया निशान लग जाएगा।
पाकिस्तान ने भारत जैसे पड़ोसी देशों को पीड़ित करने के लिए जिस सच्चे इस्लाम का पाठ पढ़ा और पढ़ाया था, वह पाठ उसे ही अपना निशाना बना रहा है। इस बात की उम्मीद कम है कि हाल फिलहाल में इसमें कोई बदलाव आ जाएगा। इससे निजात पाने के लिए पाकिस्तान को अपने वजूद से ही निजात पानी होगी।
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)
-
Kashmiri Asiya Andrabi कौन है? दिल्ली कोर्ट ने क्यों सुनाई उम्रकैद? 24 साल से जेल में पति अलगाववादी 'आशिक' -
Texas Refinery Blast: कैसे हुआ अमेरिका की सबसे बड़ी रिफाइनरी में धमाका? ईरान से जंग के बीच फैला पैनिक!- Video -
World Most Polluted Cities: पाकिस्तान बना दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर, भारत की क्या है रैंकिंग -
Iran Vs America: ईरान ने ठुकराया पाकिस्तान का ऑफर, भारत का नाम लेकर दिखाया ऐसा आईना, शहबाज की हुई फजीहत -
US-Iran जंग में चौधरी बन रहे थे शहबाज-मुनीर, ईरान ने होर्मुज से लौटाया कराची जा रहा जहाज, धरी रह गई डिप्लोमेसी -
गाजियाबाद पुलिस ने जासूसी के आरोप में तीन गिरफ्तार -
Petrol-Diesel Crisis: पहले App पर बुक करो, फिर मिलेगा पेट्रोल-डीजल, US-Iran जंग से मचा हाहाकार! -
क्या भारत में 'LOCKDOWN' लगने वाला है? दुनियाभर में Energy Lockdown की शुरुआत! तेल संकट से आप पर कितना असर -
Badshah Caste: बॉलीवुड के फेमस रैपर बादशाह की क्या है जाति? क्यों छुपाया असली नाम? कौन-सा धर्म करते हैं फॉलो? -
Gold Silver Rate Today: सोने चांदी में जबरदस्त गिरावट, गोल्ड 8000, सिल्वर 13,000 सस्ता, अब ये है लेटेस्ट रेट -
Silver Rate Today: चांदी भरभरा कर धड़ाम! ₹10,500 हुई सस्ती, 100 ग्राम के भाव ने तोड़ा रिकॉर्ड, ये है रेट -
'Monalisa को दीदी बोलता था और फिर जो किया', शादी के 13 दिन बाद चाचा का शॉकिंग खुलासा, बताया मुस्लिम पति का सच












Click it and Unblock the Notifications