Karnataka Elections Results: भाजपा की हार और कांग्रेस की जीत के छह बड़े कारण

भाजपा जनता को यह नहीं समझा पाई कि डबल ईंजन सरकार में दूसरे ईंजन ने क्या किया| जबकि कांग्रेस ने अपनी पुरानी योजनाओं का प्रचार करने के साथ सरकार बनने पर कुछ नई स्कीमों को चलाने का वायदा भी किया।

Karnataka Elections Results 2023 Six big reasons for BJPs defeat and Congresss victory

Karnataka Elections Results: कर्नाटक के चुनाव नतीजों ने भारतीय जनता पार्टी को साफ़ संदेश दिया है कि वह सिर्फ हिंदुत्व और नरेंद्र मोदी के भरोसे चुनाव नहीं जीत सकती| उसे सुशासन की अपनी छवि बना कर रखनी होगी और प्रादेशिक नेताओं को महत्व देना होगा, उन्हें केन्द्रीय नेतृत्व भेड़ बकरियां नहीं समझ सकता| भाजपा सिर्फ कर्नाटक का चुनाव नहीं हारी है, इससे पहले हिमाचल प्रदेश और दिल्ली भी हारी है| उन दोनों राज्यों में हार के भी वही दो बड़े कारण हैं, जिनका जिक्र मैंने पहले किया|

Karnataka Elections Results 2023 Six big reasons for BJPs defeat and Congresss victory

जब हम भाजपा की हार के कारणों की समीक्षा करते हैं, तो हमे कांग्रेस की जीत के कारणों की भी समीक्षा करनी चाहिए| कांग्रेस की जीत के भी दो बड़े कारण है, पहला भाजपा सरकार के मंत्रियों के भ्रष्ट होने की छवि और दूसरा राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा, जिसका असर नतीजों में दिखा| इन चुनाव नतीजों का असर इसी साल के आखिर में राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में होने वाले चुनावों पर भी पड़ेगा|

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      राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार है, अगर कांग्रेस इन्हें बचाए रखने में कामयाब होती है, और मध्यप्रदेश में भी कर्नाटक की तरह दलबदल करवा कर भाजपा सरकार बनाने का बदला ले लेती है तो 2024 के लोकसभा चुनाव में तस्वीर बदलते देर नहीं लगेगी| आप इस बात से अंदाज लगा सकते हैं कि मई 2022 में कांग्रेस के पास सिर्फ दो राज्य राजस्थान और छत्तीसगढ़ ही बचे थे, लेकिन एक साल के भीतर वह चार राज्यों में सत्ता में आ गई है| कर्नाटक के चुनाव नतीजों से विपक्षी एकता की कोशिशों को रफ्तार मिलेगी और संभावना भी बढ़ेगी|

      लेकिन आज हम कर्नाटक में भाजपा की हार की समीक्षा करें, तो हम मोटे तौर पर छह कारण समझ सकते हैं|
      पहला कारण यह है कि पार्टी के तौर पर भाजपा की जड़ें अभी सारे देश में मजबूत नहीं हुई है, जबकि कांग्रेस की जड़ें देश भर में फ़ैली हुई हैं| पिछले 9 वर्षों की जीत मोदी के व्यक्तित्व और हिंदूवादी नीतियों के कारण थी| केन्द्रीय स्तर पर भाजपा का यह करिश्मा बना रह सकता है, क्योंकि राष्ट्रीय स्तर की राजनीति में नरेंद्र मोदी का करिश्मा बना हुआ है, और जब लोकसभा का चुनाव होता है, तो वोटर देश के विभिन्न नेताओं को देख कर वोट देता है|

      कर्नाटक में भाजपा की हार और कांग्रेस की जीत का दूसरा कारण यह है कि कांग्रेस के दो बड़े नेताओं डीके शिव कुमार और सिद्धारमैया ने भाजपा सरकार की छवि भ्रष्ट सरकार की बना दी थी| कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी के मुख्यमंत्री पर सीधा प्रहार किया, और उनकी छवि पर 40 प्रतिशत कमीशन का ऐसा दाग लगाया कि उसे मोदी भी नहीं धो पाए|

      तीसरा बड़ा कारण यह रहा कि कांग्रेस ने चुनाव प्रचार क्षेत्रीय नेताओं के हाथ में दिया हुआ था, जबकि भाजपा का चुनाव प्रचार नरेंद्र मोदी, अमित शाह और जेपी नड्डा के भरोसे था, जो स्थानीय कन्नड़ भाषा से अनजान थे| यही कारण है कि कांग्रेस 40 प्रतिशत से ज्यादा वोट पाने में कामयाब रही| उत्तर भारत में भाजपा इसलिए ज्यादा फ़ैल गई क्योंकि मोदी और अमित शाह हिन्दी बोल सकते हैं| जबकि दक्षिण भारत में ये तीनों नेता लगातार फेल हो रहे हैं| टिकटों के बंटवारे में भी केंद्र ने अपनी तानाशाही चलाई। पिछले चुनाव के 50 उम्मीदवारों का इस बार टिकट काटना भारी पड़ा| जबकि कांग्रेस ने समय से पहले और स्थानीय स्तर पर ही टिकटों का बंटवारा किया था|

      2018 में भाजपा येदियुरप्पा के कारण कर्नाटक में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, न कि मोदी, अमित शाह या नड्डा के कारण| इसलिए जब दलबदल से भाजपा की सरकार बनी थी, तो कांग्रेस से आए 17 विधायकों में से 15 को वह भाजपा की टिकट पर जीता लाने में कामयाब रहे थे| येदियुरप्पा को भाजपा केंद्रीय नेतृत्व द्वारा मुख्यमंत्री पद से हटाया जाना भाजपा की हार का चौथा बड़ा कारण बना|

      भाजपा ने सभी जातियों की पार्टी बनने की कोशिश की, लेकिन उसके इस कदम से लिंगायत ही उससे खिसक गए| हालांकि भाजपा ने लिंगायत बसवराज बोम्मई को ही मुख्यमंत्री बनाया था, लेकिन भाजपा के कोर वोटरों ने ही बाहर से आए नेता को मुख्यमंत्री बनाना पसंद नहीं किया| भले ही लिंगायत जगदीश शेट्टार खुद चुनाव हार गए, लेकिन उनके कांग्रेस में जाने से लिंगायत वोट कांग्रेस की तरफ आए| बहुत लंबे समय के बाद कांग्रेस को येदियुरप्पा की जाति लिंगायतों का अच्छा खासा वोट हासिल हुआ, जबकि दूसरी बड़ी जाति वोक्कालिंगा का वोट भी उसके पास बढ़ा|

      कांग्रेस की जीत और भाजपा की हार का पांचवां बड़ा कारण यह रहा कि मुसलमानों ने भाजपा को हराने के लिए देवेगौडा की पार्टी पर भरोसा छोड़कर सिर्फ कांग्रेस पर भरोसा किया, क्योंकि उन्हें पता था कि अगर सरकार बना सकती है, तो कांग्रेस ही बना सकती और उनका 4 प्रतिशत का आरक्षण वापस कर सकती है, तो वही कर सकती है| भाजपा का बजरंग बली कार्ड हिन्दुओं को एकजुट नहीं कर सका, लेकिन कांग्रेस का बजरंग दल बैन मुसलमानों को कांग्रेस के पीछे लामबंद करने में कामयाब हो गया|

      कांग्रेस की जीत और भाजपा की हार का छठा कारण यह रहा कि कांग्रेस ने गरीब कल्याण की योजनाओं का वायदा किया| कांग्रेस ने 2013 से 2018 में अपनी सरकार की ओर से चलाई गई महिलाओं और गरीबों को राहत देने वाली योजनाओं जैसे अन्न भाग्य को अच्छे से भुनाया, जबकि भारतीय जनता पार्टी अपनी राज्य सरकार की किसी योजना को भुनाने में इसलिए फेल रही, क्योंकि उसके चुनाव प्रचार का सारा दारोमदार केंद्र सरकार की योजनाओं पर था|

      भाजपा जनता को यह नहीं समझा पाई कि डबल ईंजन सरकार में दूसरे ईंजन ने क्या किया| जबकि कांग्रेस ने अपनी पुरानी योजनाओं का प्रचार करने के साथ सरकार बनने पर कुछ नई स्कीमों को चलाने का वायदा भी किया, जैसे गृहलक्ष्मी योजना, जिसमें घर की मुखिया महिला को 2000 रूपए महीना दिया जाएगा| कांग्रेस ने केजरीवाल की नकल करते हुए 200 यूनिट फ्री बिजली, बीपीएल परिवारों के हर सदस्य को 10 किलो फ्री चावल का वायदा किया, जबकि भाजपा राज में लोग चार किलो चावल के लिए तरस रहे थे| इन सब योजनाओं ने वोटरों को सर्वाधिक प्रभावित किया|

      (इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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