Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

Hemant Soren corruption case: ईडी के खिलाफ हेमंत सोरेन की ललकार का मतलब क्या है?

Hemant Soren corruption case: दिल्ली के विज्ञान भवन में तीन नंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब देश के जांच अधिकारियों में भ्रष्टाचार के खिलाफ जोरदार प्रहार करने का जोश भर रहे थे ऐन उसी वक्त झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन रायपुर पहुंच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के सम्मन का मखौल उड़ा रहे थे।

jharkhand meaning of Hemant Sorens challenge against ED in corruption case

मुख्यमंत्री सोरेन खुद को आदिवासी होने और राजनीतिक पीड़ित बता विक्टिमकार्ड खेलते रहे। उन्होंने कहा कि गैर बीजेपी मुख्यमंत्री होने की वजह से उनकी गिरफ़्तारी की साजिश रची जा रही है। इसके उलट तथ्य है कि ईडी के आरोपपत्र में हज़ारों करोड़ के खनन घोटाले में मुख्यमंत्री की संलिप्तता के सबूतों का जिक्र है।

प्रधानमंत्री ने जांच अधिकारियों से कहा "भ्रष्ट लोग कितने भी शक्तिशाली क्यों न हों, उन्हें किसी भी परिस्थिति में नहीं बचाना चाहिए, यह आप जैसे संगठनों की जिम्मेदारी है। किसी भी भ्रष्ट व्यक्ति को राजनीतिक-सामाजिक समर्थन न मिले, हर भ्रष्ट व्यक्ति को समाज कटघरे में खड़ा करे, ऐसा माहौल बनाना भी जरूरी है।"

भ्रष्टाचार के मामले में झारखंड के मुख्यमंत्री की संलिप्तता के सबूतों के बीच जांच एजेंसी को अतिरिक्त हिम्मत दिखाने की जरूरत आन पड़ी है। ईडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को तीन नंवबर को ही रांची कार्यालय में पूछताछ के लिए हाजिर होने का सम्मन भेजा था। ईडी इस मामले में मुख्यमंत्री के विधायक प्रतिनिधि पंकज मिश्रा एवं अन्य करीबी सहभागियों को गिरफ्तार कर चुकी है।

जांच में संदेह की सुई जिस दिशा में है, वह मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी की ओर मुड़ता दिख रहा है। झारखंड के लिए भ्रष्टाचार के मामले में मुख्यमंत्री का फंसना अचरज की बात नहीं हैं। इससे पहले भी पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा हजारों करोड़ के घोटाले में जेल में हैं।

ऐसे में मुख्यमंत्री सोरेन ईडी के सम्मन की परवाह किए बिना छत्तीसगढ की राजधानी रायपुर में आयोजित राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव में हिस्सा लेने पहुंच गए। मुख्यमंत्री ने वहां से जांच एजेंसी को ललकारते हुए कहा कि अगर दोषी हूं, तो सम्मन क्यों भेजते हो, सीधे गिरफ्तार क्यों नहीं कर लेते।

उन्होंने कहा कि आदिवासी होने की वजह से उनके साथ जो हो रहा है, उसे देखकर गुजरात के आदिवासी आगामी चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को वोट नहीं करें। यह दीगर है कि जब वह सार्वजनिक तौर पर ललकार रहे थे तो अंदर से सहमे हुए थे। उस समय उनके रांची कार्यालय की ओर से ईडी दफ्तर को पूछताछ के लिए तीन सप्ताह का अतिरिक्त समय मांगने का आवेदन दिया जा रहा था।

सवाल है कि क्या मुख्यमंत्री दफ़्तर के आवेदन की खानापूर्ति से जांच एजेंसी संतुष्ट हो जायेगी? या सम्मन से भागने के जुर्म में मुख्यमंत्री के खिलाफ आम अपराधियों जैसा व्यवहार होगा। क्या पद पर रहते हुए किसी मुख्यमंत्री की गिरफ़्तारी की नौबत फिर आ गई है?

ईडी के आरोपपत्र में मुख्यमंत्री के विधानसभा के प्रतिनिधि पंकज मिश्रा के घर से एक पासबुक, दो चेक बुक और हेमंत सोरेन के साइन किए गए दो चेक मिले हैं। ईडी ने मामले में अलग-अलग संदिग्धों के घर पर छापेमारी के दौरान भी हेमंत सोरेन और उनके परिवार के सदस्यों के बैंक दस्तावेज और फाइलें जब्त की हैं।

एजेंसी ने आरोप पत्र में लिखा है कि पंकज मिश्रा अवैध खनन में शामिल थे और उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर करोड़ों रुपये की हेराफेरी की है। करोड़ों की नकदी और बैंक दस्तावेज के अलावा ईडी के हाथ मुख्यमंत्री की संलिप्तता के कई सबूत हैं जिसके कारण पूछताछ के लिए सम्मन जारी कर बुलाया गया था।

सोरेन परिवार का दागदार दामन

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन झारखंड मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष शिबू सोरेन के पुत्र हैं। उनके परिवार के लिए कार्यकाल के बीच ही इस्तीफा देने को मजबूर होना कोई अजूबी घटना नहीं है।

शिबू सोरेन 2006 में मनमोहन सिंह सरकार में कोयला मंत्री थे। तब जामताड़ा के फास्ट ट्रैक कोर्ट ने उनको चिरुडीह नरसंहार का दोषी करार दिया। उसमें आठ मुस्लिमों समेत 11 गैर आदिवासियों की नृशंस हत्या कर दी गई थी। हंगामे के बीच उन्हें इस्तीफा देकर अलग होना पड़ा।

बाद में वकीलों की मदद से झारखंड आंदोलन की उपज शिबू सोरेन झामुमो घूसकांड, निजी सचिव शशिनाथ झा हत्याकांड और चिरूडीह नरसंहार जैसे कई गंभीर मामलों में ऊपरी अदालतों से बरी होते रहे। केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफे के अलावा शिबू सोरेन को तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री की शपथ लेने के बाद बीच कार्यकाल में ही पद छोड़ना पड़ा।

बीजेपी से तालमेल में भ्रष्टाचार का रोड़ा

दरअसल झामुमो की राजनीति संथाल खासकर जिन हिंदू आदिवासियों के आधार पर है, उन पर भारतीय जनता पार्टी की पहले से नजर है। लेकिन झारखंड के आदिवासियों के बीच उनके नेता का भ्रष्टाचार में फंसना उसी तरह से गंभीर मसला नहीं बन पा रहा है जिस तरह चारा घोटाले में सजा काटने के बावजूद भी लालू प्रसाद जैसे नेता आज भी जनप्रिय बने हुए हैं।

समाज की इस बदहाली पर प्रधानमंत्री मोदी ने चिंता जताते हुए सतर्कता सप्ताह के समापन अवसर पर कहा था, "कई बार भ्रष्ट लोगों को भ्रष्ट साबित होने के बाद भी, जेल जाने के बावजूद महिमामंडित किया जाता है। यह समाज के लिए अच्छी बात नहीं है। आज भी कुछ लोग दोषी भ्रष्टाचारियों के पक्ष में तर्क
देते हैं। ऐसी ताकतों को समाज द्वारा अपने कर्तव्य के प्रति जागरूक करना बहुत जरूरी है। इसमें भी आपके विभाग द्वारा की गई ठोस कार्रवाई की बड़ी भूमिका होती है।"

बीजेपी से जुड़े सूत्रों का दावा है कि भ्रष्टाचार की जांच में बुरी तरह उलझता देख झारखंड के मुख्यमंत्री ने कई तरीके से बीजेपी के करीब आने की कोशिशें की हैं। लेकिन प्रधानमंत्री की भ्रष्टाचारियों से किसी तरह का समझौता नहीं करने की जिद ने झारखंड मुक्ति मोर्चा और भारतीय जनता पार्टी में तालमेल होने की राह में कांटे बिछाने का काम किया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस दौर में जो झामुमो आज बीजेपी से जुड़ नहीं पा रही उसे लेकर यह भी सच्चाई है कि मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा के दौर में 2010 से 2013 तक बीजेपी ने झामुमो से मिलकर सरकार चलाई है।

मौजूदा केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा के राजनीतिक करियर की शुरुआत झामुमो से हुई है और मौजूदा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पदेन राजनीतिक करियर की शुरुआत सितंबर 2010 में अर्जुन मुंडा सरकार में उप मुख्यमंत्री के तौर पर हुई है। उससे पहले के छह महीने तक वह राज्यसभा सदस्य थे। हेमंत सोरेन को अगर मुख्यमंत्री का पद छोड़ना पड़ता है तो परिवार और पार्टी में उन्हें अपना उत्तराधिकारी के चयन में समस्या आ रही है।

इन मुसीबतों के बीच जांच एजेंसी ईडी की अगली करवाई को देखना दिलचस्प होगा। देखना होगा कि सतर्कता सप्ताह पर मिले प्रधानमंत्री के स्पष्ट संकेत के बाद भ्रष्टाचार के खिलाफ जारी मुहिम में गति आती है या दबंगों के खिलाफ कारवाई करने में शिथिलता बरकरार रहती है।

यह भी पढ़ें: Hemant Soren case: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर एजेंसियों का शिकंजा किस तरह कसा, जानिए पूरी प्रक्रिया

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+