India vs England: बैजबॉल ने बदल दिया टेस्ट क्रिकेट का अंदाज
India vs England: सफेद कपड़े, लाल बॉल और पांच दिनों तक धैर्य और संयम का इम्तिहान। टेस्ट क्रिकेट की यही तस्वीर क्रिकेट के जन्मदाता देश इंग्लैंड ने 19वीं सदी में दुनिया को दिखाई थी। तब से लेकर भारत और इंग्लैंड के बीच मौजूदा टेस्ट सीरीज शुरू होने तक टेस्ट क्रिकेट का यही चेहरा पूरी दुनिया में दिखाई दिया।
हालांकि 147 साल बाद क्रिकेट के सबसे लंबे और खास माने जाने वाले फॉर्मेट का अंदाज एकदम बदल गया है। फटाफट क्रिकेट के इस दौर का रंग अब सफेद रंग के इस फॉर्मेट पर चढ़ चुका है। और मैदान पर ये बदलाव भी वही देश लाया है, जिसने दुनिया को सिखाया कि 'सी फॉर क्रिकेट' होता है।

क्या कोई इस बात पर यकीन करेगा कि किसी टेस्ट मैच में महज 88 गेंदों पर शतक ठोक दे? कोई टीम सिर्फ 35 ओवर के खेल में स्कोर बोर्ड पर 200 रन लगा दे? यकीन करना पड़ेगा क्योंकि इंग्लैंड क्रिकेट टीम के खिलाड़ियों ने ऐसा मैदान पर कर दिखाया है। भारत के खिलाफ राजकोट टेस्ट में उन्होंने ये साबित किया है कि टेस्ट क्रिकेट भी बेपरवाह हो सकता है।
पांच दिन के क्रिकेट में भी बेतरतीब तरीके से वैसे और वही शॉट खेले जा सकते हैं, जिन्हें टी20 क्रिकेट में आजमाया जाता है। इंग्लिश टीम के खिलाड़ियों ने अपने आक्रामक अंदाज से बता दिया है कि बैजबॉल से घरेलू मैदानों पर सिकंदर मानी जाने वाली भारतीय टीम को भी बैकफुट पर धकेला जा सकता है।
बात अब उस चेहरे की करते हैं जिसने अपने बल्ले की धमक से टेस्ट क्रिकेट की मूलभूत सच्चाई को बदलकर रख दिया है। इस बल्लेबाज़ का नाम है बेन डकेट। जैक क्राउली के साथ इंग्लैंड की पारी शुरू करने आए डकेट ने शुरूआती चार ओवर थमने के बाद जो रफ्तार पकड़ी, फिर मुड़कर नहीं देखा।
डकेट ने मानों सोच लिया था कि टीम इंडिया के 445 रनों जैसे बड़े स्कोर को देखकर टेंशन लेना नहीं बल्कि मेजबान टीम के गेंदबाज़ों को टेंशन देना है। वैसे टेस्ट क्रिकेट में ऐसे मौके कम ही आए हैं जब मैच की कमेंट्री कर रहे पूर्व दिग्गज भी ये कहते दिखे कि बल्लेबाज को कोई तो ये बता दो कि ये टी20 मैच नहीं बल्कि टेस्ट मैच है।
डकेट की बैजबॉल अप्रोच को इस अंदाज से समझिए कि टेस्ट क्रिकेट के अपने तीसरे शतक तक पहुंचने में उन्होंने सिर्फ 88 गेंदें खर्च कीं और इस दौरान 19 चौके और एक छक्का जड़ा। यानी डकेट की पारी के पहले 100 रनों में से 82 रन सिर्फ चौके-छक्के से बने। डकेट के इसी अंदाज ने उन्हें भारत के खिलाफ सबसे तेज़ टेस्ट शतक जमाने वाला इंग्लिश बल्लेबाज़ बना दिया। इतना ही नहीं उनका ये शतक राजकोट के मैदान पर भी सबसे तेज़ शतक है। वे भारत में तीसरे सबसे तेज़ शतक लगाने वाले विदेशी बल्लेबाज़ भी बन गए। शतक तक पहुंचने के लिए डकेट ने करीब 116 के स्ट्राइक रेट से रन जोड़े।
वैसे वाइजेग टेस्ट में भारत की विजय के बाद इंग्लैंड टीम की बैजबॉल क्रिकेट खेलने की सोच पर सवाल उठने लगे थे। लेकिन बेन डकेट ने राजकोट में बल्ले से ताबड़तोड़ अंदाज़ में रनों की बारिश कर कप्तान बेन स्टोक्स और कोच ब्रैंडन मैक्कलम की टेस्ट क्रिकेट में भी आक्रामक सोच को सही साबित कर दिया। विकेट गिरने पर भी इंग्लैंड की आक्रामक बल्लेबाज़ी की सोच नहीं बदल रही है।
अब ये बात भी समझ में आ रही है कि आखिर क्यों सीरीज शुरू होने से पहले इंग्लैंड टीम के खिलाड़ी ये कहते दिख रहे थे कि अगर भारत स्पिन फ्रेंडली पिचें बनाता है तो उन्हें कोई शिकायत नहीं होगी। टेस्ट क्रिकेट को तकनीक का खेल माना जाता रहा है। अब तक ज्यादातर बल्लेबाज़ लंबे वक्त तक मैदान पर टिक कर खेलने और क्रिकेट बुक शॉट लगाने की कोशिश करते दिखते थे। लेकिन मौजूदा सीरीज में इंग्लैंड के बल्लेबाज़ों की बैजबॉल एप्रोच ने इस नजरिए को भी बदल दिया।
राजकोट में इंग्लैंड के बल्लेबाज़ों के बल्ले से ऐसे-ऐसे शॉट निकले जो टेस्ट क्रिकेट की पारंपरिक कैटेगरी में कभी शामिल नहीं रहे। उन्होंने स्वीप, रिवर्स स्वीप और स्लॉग स्वीप लगाकर स्पिनरों को बता दिया कि उनकी फिरकी की फांस में वे फंसने वाले नहीं है। अश्विन की गेंद पर स्लॉग स्वीप के जरिये लगाया गया डकेट का छक्का और जडेजा की गेंदों पर पोप का पैडल स्वीप और रिवर्स स्कूप या कहें तो 'पल्लू शॉट' क्रिकेट फैन लंबे वक्त तक नहीं भूलेंगे।
इंग्लैंड टीम के कोच ब्रैंडन मैक्कलम के निकनेम 'बैज' से बनी बैजबॉल की ये एप्रोच खिलाड़ियों को नाकामी के डर के बिना बेहतरीन प्रदर्शन के लिए उकसाती है। बैजबाल का सबसे अहम पहलू तेजी से रन जोड़ना है। यानी फंडा यही कि चाहे कंडीशंस कैसी भी हों, मैदान कोई भी हो, बल्लेबाज़ी के लिए आओ, तेजी से रन बनाओ और विरोधियों पर छा जाओ।
इसका साफ असर मैदान पर इंग्लैंड के खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर दिख रहा है। 2022 में जो टीम जो रूट की अगुवाई में टेस्ट क्रिकेट में जीत के लिए तरस रही थी, वही टीम अब बैजबाल की रणनीति से मैदान पर नई इबारतें गढ़ रही है। इंग्लैंड टीम का पाकिस्तान दौरा इसकी मिसाल रहा। रावलपिंडी टेस्ट के पहले दिन ही इंग्लैंड के बल्लेबाज़ों ने पांच सौ से ज्यादा रन ठोक कर नया रिकॉर्ड कायम किया था। इससे पहले एक दिन में कोई भी टीम इतना बड़ा स्कोर नहीं खड़ा कर पाई थी।
सिर्फ टीम ही नहीं बल्कि बल्लेबाज़ों के प्रदर्शन में भी निखार आया है। बैजबॉल के बूते उनके औसत और स्ट्राइक रेट का ग्राफ ऊपर की ओर बढ़ रहा है। बैजबॉल बोलें तो आक्रामक तेवर और बेखौफ अंदाज की नई मिसाल। थ्री लॉयन्स यानी इंग्लैंड क्रिकेट टीम ने बल्लेबाज़ी, गेंदबाज़ी और फील्डिंग, खेल के हर डिपार्टमेंट में आक्रामक रवैया दिखाते हुए टेस्ट क्रिकेट की परिभाषा बदल दी है।
टेस्ट क्रिकेट में मैदान पर अलग-अलग बल्लेबाज़ों का धुआंधार अंदाज तो अनगिनत बार देखने को मिला, लेकिन पूरी टीम के आक्रामक अंदाज़ की ये नई बानगी है। टेस्ट क्रिकेट में मैदान पर दिख रहे इंग्लैंड टीम के इस अंदाज़ ने दुनिया भर की टीमों की चिंता जरूर बढ़ाई होगी और अब उनका थिंक टैंक इससे निपटने के लिए माथा पच्ची करने लगा होगा।
सबसे पहले इम्तिहान से तो टीम इंडिया गुजर रही है। इंग्लैंड की बैजबॉल ने राजकोट में मेजबानों को परेशान करना शुरू कर दिया है। दूसरे दिन बैजबॉल के सामने उसकी स्पिन बॉल का जादू बेअसर रहा। ऐसे में टीम इंडिया के कोच और कप्तान को सिर्फ मौजूदा टेस्ट में ही नहीं बल्कि सीरीज के बाकी मैचों में भी अब बैजबॉल का जवाब बैजबॉल से ही देना होगा। यानी इंग्लैंड की आक्रामक बल्लेबाज़ी की काट आक्रामक अंदाज़ में गेंदबाज़ी और आक्रामक फील्ड प्लेसमेंट से करनी होगी।
वैसे तो क्रिकेट की दुनिया बदलती रही है। कभी ब्लैक एंड व्हाइट थी, अब रंगीन हो चुकी है। कभी सिर्फ टेस्ट क्रिकेट खेला जाता था, फिर वनडे क्रिकेट आया और अब टी20 क्रिकेट की तूती बोल रही है। हालांकि अब नया फॉर्मेट नहीं बल्कि क्रिकेट के सबसे पुराने फॉर्मेट में बैजबॉल के तौर पर सबसे नई रणनीति मैदान पर दिख रही है।
कहा जाता है कि बदलाव कुदरत का नियम है और हर बदलाव बेहतरी की ओर ले जाता है। ऐसे में किसे पता कि बैजबॉल यानी तूफानी अंदाज में खेलने की रणनीति टेस्ट क्रिकेट की खोती जा रही पहचान को फिर से कायम करने में तूफानी कोशिश साबित हो।
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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