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Gender Change: महिलाओं के लिए चुनौती बन सकता है लिंग परिवर्तन का बढ़ता चलन

Gender Change: इन दिनों एक शब्द बहुधा सुनने को मिलने लगा है और वह शब्द है ट्रांसजेंडर। वैसे यह शब्द अधिकांश रूप से किन्नरों के लिए प्रयोग किया जाता है, परन्तु अब इसकी परिभाषा बदलने लगी है और इसका दायरा व्यापक हो गया है। इसमें वे लोग भी सम्मिलित हैं जो स्वेच्छा से अपना लिंग परिवर्तन कराते हैं। यह लिंग परिवर्तन सर्जरी के माध्यम से हो सकता है और हार्मोनल उपचार से भी।

ऐसा नहीं है कि यह अभी होना आरम्भ हुआ है। इसके लिए चार वर्ष पहले की दैनिक भास्कर की रिपोर्ट को पढ़ने पर ज्ञात होता है कि भारत में लिंग परिवर्तन का चलन बढ़ रहा है और इससे भी कहीं अधिक खतरनाक है कि इसमें पुरुषों की संख्या अधिक है, जो स्त्री बन रहे हैं। इस रिपोर्ट के अनुसार उस समय ढाई से तीन लाख रूपए तक इस सर्जरी के लगते थे। वहीं कुछ और खोजने पर एक और हैरान करने वाला समाचार सामने आता है कि भारत के मेडिकल टूरिज्म में सेक्स चेंज सर्जरी के चलते विदेशों से लोग आ रहे हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि भारत में यह सर्जरी अन्य देशों की तुलना में सस्ती है और यहां पर उसके लिए लम्बी लाइन नहीं है।

Increasing trend of gender change can become a challenge for women

वर्ष 2016 में अमेरिका के एक पूर्व सैनिक बेटी एन आर्कर ने दिल्ली में आकर लिंग परिवर्तन के लिए सर्जरी कराई थी। उनका कहना था कि उन्हें शुरू से ही यह लगता था कि वह गलत शरीर के जाल में फंस गए हैं। इस जाल से छूटने के लिए उन्होंने अमेरिका से भारत तक की यात्रा की जिसमें उस समय 6,000 अमेरिकी डॉलर खर्च हुए थे, जो उनके देश की तुलना में केवल पांचवा हिस्सा है।

यह बहुत ही हैरान करने वाला तथ्य है कि भारत में जहां एक ओर सस्ती लिंग परिवर्तन सर्जरी है तो वहीं पुरुष से महिला बनने वालों की संख्या में भी वृद्धि हो रही है। भास्कर की उसी पुरानी रिपोर्ट की मानें तो यह चलन महानगरों में ही नहीं बल्कि इंदौर और भोपाल जैसे शहरों में भी तेजी से बढ़ रहा है। अहमदाबाद के 64 वर्षीय पुरुष ने लिंग परिवर्तन सर्जरी के बाद एक नया रूप और नाम पाया था और उनका भी कहना यही था कि वह बचपन से ही अपने शरीर से खुश नहीं था।

जो भी पुरुष लिंग परिवर्तन के बाद स्त्री बनते हैं, उनका कहना यही होता है कि वह अपनी देह से खुश नहीं थे। भास्कर ने अपनी उस रिपोर्ट में लिखा था कि मुम्बई, दिल्ली और अहमदाबाद के ही तीन डॉक्टर लगभग 324 ऑपरेशन कर चुके हैं। हालांकि यह चार वर्ष पहले की बात है और तब से लेकर इनकी संख्या में वृद्धि हुई है। वर्ष 2021 में हेल्थसाइट नामक वेबसाईट पर प्रकाशित एक और रिपोर्ट में लिखा था कि भारत में लिंग परिवर्तन कराने वाले लोगों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। जब से इस सर्जरी के लिए तरह तरह की सहायता दी जाने लगी है, तब से इसमें और वृद्धि हुई है। इसमें कहा गया था कि केरल में जो भी लिंग परिवर्तन कराने वाली सर्जरी हो रही हैं, उनमें भी पुरुष से महिला बनने वालों की संख्या उन लोगों से अधिक है जो महिला से पुरुष बन रहे हैं।

यह भी बहुत हैरान करने वाली और चौंकाने वाली बात है कि इतनी लम्बी एवं खर्चीली प्रक्रिया के बावजूद इस सर्जरी का चलन बढ़ रहा है क्योंकि इसमें हार्मोन सर्जरी भी की जाती है। यह स्वत: ही समझा जा सकता है कि जब पुरुषों के आतंरिक सिस्टम में महिला अंगों को बनाया जाता होगा तो वह कितने दर्द से होकर गुजरता होगा। इस सर्जरी के कई चरण होते हैं। यह भी एक प्रश्न ही है कि कोई पुरुष महिला बनने के लिए इतना दर्द और इतने चरणों का सामना क्यों करता है? इससे भी अधिक हैरानी की बात इस अनजान प्रक्रिया को प्रचारित करने के लिए न केवल बॉलीवुड का कई फिल्मों के माध्यम से सामने आना जैसे चंडीगढ़ करे आशिकी, बल्कि भारत सरकार की आयुष्मान भारत योजना में भी लिंग परिवर्तन के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। हालांकि यह योजना ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए है।

ट्रांसजेंडर पर्सन्स (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स) बिल 2016 के अनुसार ट्रांसजेंडर वह व्यक्ति है जो आंशिक नर एवं नारी है, या नारी एवं पुरुष का मिश्रण है, या फिर न ही पुरुष है और न ही महिला। इसके साथ ही यदि व्यक्ति का लिंग जन्म से प्रदत्त लिंग के अनुसार न हो तथा इसमें ट्रांस-पुरुष, ट्रांस महिला सम्मिलित हैं। इस बिल पर लम्बी बहस चली थी और वर्ष 2016 में इसे स्टैंडिंग कमेटी के पास भेज दिया गया था जिसने वर्ष 2017 में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। सरकार द्वारा इसमें 27 संशोधन किए गए थे और वर्ष 2018 में पुन: इसे लोकसभा में पारित किया गया था, परन्तु राज्यसभा से यह पारित नहीं हो पाया था। हालांकि वर्ष 2019 में लोकसभा एवं राज्यसभा दोनों ही सदनों से यह पारित हो गया।

यद्यपि पहचान का यह विमर्श व्यक्तिगत पहचान को लेकर है तो वहीं यह बढ़ता चलन कहीं महिलाओं के लिए घातक तो प्रमाणित नहीं होगा? यह प्रश्न और आशंका इसलिए उठ रही है क्योंकि कई ऐसे क्षेत्र हैं, जहाँ पर महिलाओं का दबदबा रहा है, जैसे फैशन उद्योग, मेकअप उद्योग एवं सौन्दर्य उद्योग। यह बहुत ही कम लोगों को पता होगा कि भारत की ओर से पिछली बार मिस यूनिवर्स बनी हरनाज़ संधु का गाउन जिसने बनाया था, वह भी स्वप्निल शिंदे से परिवर्तित हुआ साइशा शिंदे थी।

इतना ही नहीं कई ऐसी प्रतिस्पर्धाएं हैं, जिनमें पुरुष लिंग परिवर्तन कराकर महिलाओं के साथ प्रतिभागिता कर रहे हैं। हाल ही में नीदरलैंड्स में मिस नीदरलैंड्स भी एक ट्रांस महिला बनी है। अर्थात वह पहले पुरुष थी और लिंग परिवर्तन करवाकर वह मिस नीदरलैंड बन गयी। विदेशों में कई महिला मॉडल्स को हटाकर ऐसी ही ट्रांस महिलाओं से बदल दिया गया है। यद्यपि यह सब विदेशों में हो रहा है, परन्तु यहाँ ऐसा नहीं होगा, इसे दावे के साथ कैसे कहा जा सकता है? फिलहाल यदि और बात करें तो पाएंगे कि मिस यूनिवर्स आर्गेनाइजेशन जिस महिला ने खरीदा है, वह थाई मीडिया टाइकून एवं ट्रांस अधिकारों की वकालत करने वाली है और स्वयं भी एक ट्रांसजेंडर महिला है।

तो क्या यह माना जाए कि ऐसी सर्जरी भारत में भी उन क्षेत्रों पर महिलाओं का दबदबा समाप्त करेंगी जिन पर महिलाएं अपना अधिकार समझती हैं? प्रश्न यह भी है कि क्या भारतीय समाज इस चलन के दूरगामी परिणाम झेलने के लिए तैयार है?

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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