Gujarat Election 2022: गुजरात में दूसरे चरण के चुनाव का लेखा जोखा

आज गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए दूसरे चरण में 14 जिलों की 93 सीटों के लिए मतदान हो रहा है। पहले चरण में कम मतदान से परेशान भाजपा ने दूसरे चरण में अधिक से अधिक मतदान के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।

Gujarat Election 2022: गुजरात विधानसभा चुनावों के दूसरे और अंतिम दौर में आज जिन 93 सीटों पर मतदान हो रहा है उनमें से 2017 में 55 प्रतिशत सीटें भाजपा को मिली थी। भाजपा 2002 से लगातार उत्तर और मध्य गुजरात में 19 सीटें जीत रही है। जबकि कांग्रेस 2002 से सिर्फ 5 सीटों पर चुनाव जीत रही है।

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दूसरे चरण की जिन 19 सीटों पर भाजपा 2002 से जीतती आ रही है, उन सीटों में असारवा, दसकोई, एलिसब्रिज, मणिनगर, नरोडा, साबरमती, डभोई, हालोल, इडर, जेतपुर, खेरालु, मातर, महेसाणा, नडियाड, रावपुरा, सयाजीगंज, शहेरा, वाघोडिया और विसनगर शामिल है। कांग्रेस जिन 5 सीटों पर 2002 से नहीं हारी है, उन सीटों में भिलोड़ा, बोसरद, दांता, खेडब्रम्हा और महुधा शामिल है।

इन 93 सीटों में से 36 सीटें ऐसी भी हैं जिनमें 2017 में हार जीत का मार्जिन 5 प्रतिशत से भी कम था। इनमें भाजपा कांग्रेस ने 17-17 जीती और 2 सीटें निर्दलीय को मिली थी। इनमें 2 प्रतिशत से कम अंतर की 18 सीटें थी। इनमें भाजपा ने 10, कांग्रेस ने 9 और एक अन्य ने हासिल की थी।

दूसरे चरण की 93 सीटों का पिछले 10 साल का परिणाम बताता है कि इन 93 सीटों में से 39 सीटों पर एक ही पार्टी जीती है। इनमें 25 भाजपा और 14 पर कांग्रेस लगातार जीत दर्ज कर रही है। बाकी 54 सीटों का नतीजा बदलता रहा है। दूसरे चरण की सीटों पर 2012 में 72.82 फीसदी और 2017 में 70.76 फीसदी मतदान हुआ था। 2017 में मध्य और उत्तर गुजरात में भाजपा को 46.86 फीसदी और कांग्रेस को 42.83 फीसदी वोट मिले थे।

गुजरात चुनाव के इस दूसरे चरण में मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल, उनकी सरकार के 8 मंत्रियों के साथ 60 विधायकों का भविष्य दांव पर लगा है। स्वास्थ मंत्री ऋृषिकेश पटेल, जगदीश विश्वकर्मा, मनीषा वकील, अर्जुन चौहान, निमिषा सुथार, गजेन्द्र परमार, कुबेर डिडोंर, कीर्ति सिंह वाघेला के अलावा 2017 में आंदोलन का चेहरा बने हार्दिक पटेल, अल्पेश ठाकोर और जिग्नेश मेवाणी जैसे नेताओं की किस्मत दांव पर है।

93 सीटों वाले दूसरे चरण में भाजपा ने 63 नए प्रत्याशी उम्मीदवार उतारे हैं, जबकि 30 उम्मीदवारों को दोबारा टिकट दिया गया है। भाजपा ने 21 विधायकों के टिकट काटे हैं, वहीं कांग्रेस ने 62 नए चेहरे उतारे हैं। 38 में से 28 विधायक रिपीट किए हैं। कांग्रेस के पांच विधायक पार्टी छोड़कर भाजपा में चले गए थे। कांग्रेस ने तीन सीट एनसीपी को दी है।

गौरतलब है कि 2017 में भाजपा को इन 93 सीटों में से 51 सीटें मिलीं थी। कांग्रेस ने 39 सीटों पर विजय प्राप्त की थी। तीन सीटें निर्दलीयों के पाले में गई थी। जिसमें से एक निर्दलीय जिग्नेश मेवाणी अब कांग्रेस के उम्मीदवार है।

गुजरात में विधानसभा की जिन 93 सीटों पर आज मतदान हो रहा है उनमें 74 सामान्य वर्ग के लिए, 6 एससी और 13 सीटें एसटी के लिए है। दूसरे चरण में कुल 2.51 करोड़ मतदाताओं में से 1.22 करोड़ महिलाएं हैं। 18 से 19 वर्ष के 5.96 लाख मतदाता है जबकि 90 वर्ष से अधिक उम्र के 5400 मतदाता है।

वडनगर और मानसा में भी मतदान

पिछले 2017 के विधानसभा चुनाव में मोदी के गृहनगर वडनगर और अमित शाह के गृह नगर मानसा की दोनों सीटें कांग्रेस ने जीती थी। अब भाजपा ने इन सीटों को प्रतिष्ठा का विषय बना लिया है। दूसरे चरण में जातिगत समीकरण महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। अहमदाबाद, बडोदरा, गांधीनगर जैसे बड़े शहरी क्षेत्रों में 36 सीटें है, जिनमें से 25 शहरी है। इन क्षेत्रों में जाति का समीकरण महत्व का है। दूसरे चरण में पाटीदार, ठाकोर, चौधरी, मुस्लिम और आदिवासी प्रभाव वाली 48 सीटें है।

दूसरे चरण में करीब 6 सीटों पर निर्दलीय और बागी उम्मीदवार भाजपा कांग्रेस के लिए चुनौती हैं। इन सीटों में थराद, वाघोडिया, खेरालु, लुणावाडा, पादरा और बायड हैं।

शाह और पाटील के साथ मोदी ने बैठक की

गुजरात चुनाव में दूसरे चरण के मतदान से एक दिन पहले रविवार को मोदी ने अहमदाबाद में अपनी मां हीराबा के पास पहुंचकर आशीर्वाद लिया। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने भाजपा कार्यालय 'कमलम' में गृह मंत्री अमित शाह और प्रदेश अध्यक्ष सीआर पाटील के साथ बैठक की। हालांकि इस बैठक में मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल अनुपस्थित थे। मोदी ने बैठक में दूसरे चरण में भाजपा की तैयारी का जायजा लिया और मतदान बढ़ाने की रणनीति पर चर्चा की।

भाजपा की कोशिश दूसरे चरण की अधिक से अधिक सीटें जीतने की है। इस बार भाजपा के साथ एक परेशानी यह भी है कि आम आदमी पार्टी ने भाजपा के मजबूत पकड़ वाली सीटों पर जातिगत समीकरणों को साधते हुए अच्छे उम्मीदवार मैदान में उतारे है। हालांकि शहरी क्षेत्रों वाली सीटों में भाजपा की मजबूत पकड़ के कारण आप पार्टी के जीतने की संभावना कम है लेकिन आम आदमी पार्टी ने गुजरात के मतदाताओं के सामने भाजपा और कांग्रेस के विकल्प के रूप में खुद को पेश तो कर ही दिया है।

कम मतदान, दल और आयोग दोनों परेशान

पहले चरण में दक्षिण गुजरात और सौराष्ट्र में 63.31 प्रतिशत मतदान हुआ था जो 2017 के मुकाबले 5.20 प्रतिशत कम था। पहले चरण में हुए कम मतदान से सभी राजनीतिक दल खासकर भाजपा परेशान दिख रही है। भाजपा का आंकलन है कि कम मतदान के कारण 12 से 15 सीटों पर हार जीत का मार्जिन कम हो सकता है।

इसलिए भाजपा ने दूसरे चरण में अधिक से अधिक मतदान के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। भाजपा ने कार्यकर्ताओं से कहा है कि अधिक मतदान के लिए ज्यादा से ज्यादा वोटरों को बूथ तक लाने के लिए हर संभव कदम उठाए। चुनाव आयोग भी प्रथम चरण में हुए कम मतदान से खुश नहीं है। प्रथम चरण में मतदाताओं की उदासीनता के चलते निराशाजनक मतदान होने के बाद चुनाव आयोग ने भी मतदाताओं से अधिक से अधिक संख्या में निकलकर मतदान करने की अपील की है।

गुजरात में भाजपा, कांग्रेस और आप पार्टी सभी अपने अपने जीत के दावे कर रहे हैं। जीत किसकी होगी इसका निर्णय 8 दिसंबर को मतगणना के दिन पता चलेगा। फिलहाल सभी दल दूसरे चरण की 93 सीटों पर अपने पक्ष में अधिक से अधिक मतदान करवाने की कोशिश में जुटे हैं।

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(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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