रेंज, रफ़्तार और वो तकनीक जिससे दुनिया के बड़े देश भी डरते हैं, आसान भाषा में समझें Agni-5 मिसाइल की ताकत

Agni-5 MIRV Test 2026: भारत ने रक्षा के क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक मील का पत्थर पार कर लिया है। ओडिशा के तट से अग्नि-5 मिसाइल का सफल परीक्षण किया गया, जो MIRV (मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेबल री-एंट्री व्हीकल) तकनीक से लैस है। यह कोई साधारण मिसाइल नहीं है, यह एक ही बार में कई दुश्मन ठिकानों को तबाह करने की ताकत रखती है।

5000 किलोमीटर से ज्यादा की मारक क्षमता वाली यह मिसाइल पूरे एशिया और यूरोप के बड़े हिस्से को अपनी जद में लेती है। इस परीक्षण ने भारत को दुनिया के उन चुनिंदा देशों की कतार में खड़ा कर दिया है जिनके पास इतनी उन्नत तकनीक है। यह भारत की 'नो फर्स्ट यूज' नीति के तहत अपनी सुरक्षा को अभेद्य बनाने की दिशा में एक बड़ी छलांग है।

Agni-5 MIRV Test 2026

क्या है MIRV तकनीक और यह क्यों खास है?

MIRV तकनीक का मतलब है कि एक ही मिसाइल के ऊपर कई न्यूक्लियर वॉरहेड (परमाणु हथियार) लगाए जा सकते हैं। पारंपरिक मिसाइल केवल एक टारगेट पर गिरती है, लेकिन MIRV वाली अग्नि-5 अंतरिक्ष में जाने के बाद अलग-अलग दिशाओं में अपने हथियार छोड़ सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह 4 से 5 अलग-अलग ठिकानों को एक साथ निशाना बना सकती है। इससे दुश्मन का एयर डिफेंस सिस्टम उलझ जाता है, क्योंकि उसके लिए एक साथ कई परमाणु हमलावरों को रोकना लगभग नामुमकिन हो जाता है।

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5000 किलोमीटर की रेंज और स्वदेशी दम

अग्नि-5 भारत की सबसे लंबी दूरी की मिसाइल है। इसकी रेंज 5000 किमी से अधिक है, जो इसे 'इंटरकांटिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल' (ICBM) की श्रेणी के करीब ले जाती है। इसमें तीन चरणों वाला सॉलिड फ्यूल इंजन लगा है। सबसे गर्व की बात यह है कि इसमें इस्तेमाल हुए सेंसर और एवियोनिक्स पूरी तरह स्वदेशी हैं। इसे मोबाइल लॉन्चर से कहीं भी ले जाकर लॉन्च किया जा सकता है, जिससे युद्ध के समय इसे दुश्मन की नजरों से बचाना और तुरंत जवाबी हमला करना आसान हो जाता है।

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चीन और पाकिस्तान के लिए बड़ा संदेश

अग्नि-5 का सफल परीक्षण सीधे तौर पर भारत की निवारक शक्ति (Deterrence) को बढ़ाता है। चीन के पास पहले से ही लंबी दूरी की मिसाइलें हैं, लेकिन भारत की इस नई ताकत ने रक्षा संतुलन को बदल दिया है। अब भारत की पहुंच चीन के सबसे उत्तरी शहरों तक सटीक रूप से हो गई है। SIPRI की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के पास अब लगभग 180 परमाणु हथियार हैं। यह मिसाइल सुनिश्चित करती है कि अगर भारत पर कोई हमला होता है, तो उसका जवाब अत्यंत विनाशकारी होगा।

मिशन दिव्यास्त्र और महिला शक्ति का योगदान

इस तकनीक के पहले सफल परीक्षण को प्रधानमंत्री मोदी ने 'मिशन दिव्यास्त्र' नाम दिया था। भारत की इस कामयाबी के पीछे देश के वैज्ञानिकों की कड़ी मेहनत है। विशेष बात यह है कि इस मिसाइल परियोजना की कमान महिला वैज्ञानिकों के हाथ में रही है। DRDO की महिला विशेषज्ञों ने इस जटिल तकनीक को विकसित कर यह साबित कर दिया है कि भारत की रक्षा तकनीक अब किसी भी विकसित देश से पीछे नहीं है। यह परीक्षण 'आत्मनिर्भर भारत' का एक चमकता हुआ उदाहरण है।

भारत की परमाणु नीति: 'नो फर्स्ट यूज'

इतनी विनाशकारी ताकत होने के बावजूद भारत अपनी 'नो फर्स्ट यूज' नीति पर कायम है। इसका सीधा मतलब है कि भारत कभी भी किसी देश पर पहले परमाणु हमला नहीं करेगा। यह मिसाइल केवल आत्मरक्षा और शांति बनाए रखने के लिए है। भारत का परमाणु नियंत्रण पूरी तरह से राजनीतिक नेतृत्व यानी प्रधानमंत्री के हाथों में होता है। जल, थल और नभ तीनों जगहों से परमाणु हमले की क्षमता हासिल करके भारत ने अपनी 'न्यूक्लियर ट्रायड' शक्ति को और भी मजबूत कर लिया है।

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