Kerala CM: केरल का मुख्यमंत्री कौन? सतीशन, वेणुगोपाल या चेन्निथला! Delhi के दरबार में फंसा पेच, आज होगा फाइनल
Kerala Government Formation: केरल में एलडीएफ (LDF) के मजबूत किले को ढहाने के बाद अब कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती सरकार चलाना नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री का चेहरा तय करना बन गई है। 140 सीटों में से 102 पर जीत दर्ज करने वाले यूडीएफ (UDF) गठबंधन में शामिल कांग्रेस के भीतर तीन दिग्गजों के बीच छिड़ी 'नंबर-1' की जंग अब सड़कों से लेकर हाईकमान की दहलीज तक पहुंच गई है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, शनिवार को नई दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर करीब चार घंटे तक हाई-लेवल मीटिंग हुई। इस बैठक में राहुल गांधी, सोनिया गांधी (वर्चुअली), अजय माकन और मुकुल वासनिक जैसे बड़े नेता शामिल रहे।

तीनों दावेदारों से हाईकमान ने की बात
मीटिंग के दौरान केरल के तीनों दावेदारों- वी.डी. सतीशन, के.सी. वेणुगोपाल और रमेश चेन्निथला-से अलग-अलग बात की गई। हालांकि, लंबी चर्चा के बाद भी किसी एक नाम पर मुहर नहीं लग सकी और अंततः फैसला 'आलाकमान' पर छोड़ दिया गया। संभवत: आज शाम तक किसी एक नाम पर मुहर लग सकती है।
तीन दावेदारों में किसका पलड़ा भारी?
- के.सी. वेणुगोपाल: सूत्रों के मुताबिक, 63 निर्वाचित विधायकों में से करीब 47 विधायकों का समर्थन वेणुगोपाल के साथ है। राहुल गांधी के भरोसेमंद होने के कारण इनका पलड़ा भारी माना जा रहा है।
- वी.डी. सतीशन: निवर्तमान विपक्ष के नेता के तौर पर सतीशन को जमीनी स्तर पर जनता और गठबंधन के सहयोगियों (जैसे IUML) का जबरदस्त समर्थन हासिल है। उन्हें इस जीत का मुख्य रणनीतिकार माना जा रहा है।
- रमेश चेन्निथला: पार्टी के सबसे वरिष्ठ नेताओं में से एक। अनुभव और संगठन पर पुरानी पकड़ के कारण उनकी दावेदारी को नजरअंदाज करना आलाकमान के लिए मुश्किल हो रहा है।
हाईकमान को क्यों देनी पड़ी सख्त चेतावनी?
केरल के तिरुवनंतपुरम से लेकर वायनाड तक समर्थकों के बीच खींचतान इस कदर बढ़ी कि सड़कों पर पोस्टर और फ्लेक्स बोर्ड की बाढ़ आ गई। हालात बिगड़ते देख हाईकमान ने सख्त चेतावनी दी, जिसके बाद इन पोस्टरों को हटाया गया। कांग्रेस पर्यवेक्षक दीपा दासमुंशी ने साफ किया कि 23 मई तक सरकार गठन की समय सीमा है, इसलिए फैसला जल्द लिया जाएगा।
आलाकमान की दुविधा: दिल्ली या केरल?
कांग्रेस नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी दुविधा के.सी. वेणुगोपाल को लेकर है। अगर उन्हें केरल भेजा जाता है, तो दिल्ली में संगठन महासचिव (General Secretary Organisation) का पद खाली होगा, जो पार्टी के लिए राष्ट्रीय स्तर पर नुकसानदेह हो सकता है। वहीं सतीशन को न चुनना 'जनभावना' के खिलाफ जा सकता है।
नाम तय करने में देरी से जनता में नाराजगी
केरल के मुख्यमंत्री का नाम तय करने में AICC की तरफ से हो रही देरी से न सिर्फ पार्टी कार्यकर्ताओं और गठबंधन सहयोगियों में, बल्कि आम लोगों में भी भारी नाराज़गी फैल रही है। कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) के 140 सदस्यों वाले सदन में 102 सीटों पर ऐतिहासिक जीत के साथ सत्ता में लौटने के बावजूद, 4 मई को नतीजे आने के एक हफ़्ते बाद भी कांग्रेस मुख्यमंत्री का नाम तय नहीं कर पाई है।
कांग्रेस के एक स्थानीय नेता ने Deccan Herald से बातचीत के दौरान बताया कि, 'पार्टी को पहले ही काफ़ी नुकसान हो चुका है। मुख्यमंत्री पद के लिए वरिष्ठ नेताओं के बीच आपसी कलह ने UDF को मिली शानदार जीत की चमक फीकी कर दी है। जैसे-जैसे यह देरी बढ़ेगी, स्थिति और खराब होती जाएगी।'
अगले मुख्यमंत्री को लेकर लोगों में ज़बरदस्त उत्सुकता है और यह पूरे शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है। इस देरी के लिए AICC नेतृत्व को आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। AICC महासचिव के.सी. वेणुगोपाल और वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला द्वारा मुख्यमंत्री पद पर दावा ठोके जाने के कारण, AICC नेतृत्व किसी एक को चुनने को लेकर दुविधा में फंसा हुआ है।
एक गलती और BJP को मिल जाएगा जीत का मौका
विपक्ष के पूर्व नेता वी.डी. सतीशन, जिन्होंने पिछले पांच सालों और इन चुनावों में UDF का नेतृत्व किया है, एक स्वाभाविक पसंद के तौर पर उभरे हैं। उन्हें जनता का भारी समर्थन और गठबंधन सहयोगियों का साथ मिल रहा है। भले ही वेणुगोपाल को कांग्रेस के सबसे ज़्यादा चुने हुए सदस्यों का समर्थन हासिल है, लेकिन उनके रास्ते में एक बड़ी रुकावट यह है कि अगर वे केरल में विधायक बनने के लिए अपनी अलाप्पुझा लोकसभा सीट छोड़ते हैं, तो उस सीट पर होने वाले उपचुनाव में BJP के जीतने की संभावना काफ़ी ज़्यादा है।
कांग्रेस के गठबंधन सहयोगियों ने भी इस जोखिम का ज़िक्र किया था। अगर वेणुगोपाल को मुख्यमंत्री चुना जाता है, तो इससे केरल के अन्य कांग्रेस सांसदों में भी नाराज़गी पैदा हो सकती है; ऐसा इसलिए क्योंकि AICC नेतृत्व ने कुछ अन्य मौजूदा सांसदों के विधानसभा चुनाव लड़ने के अनुरोध को यह कहकर ठुकरा दिया था कि कोई भी मौजूदा सांसद विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेगा। कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, विपक्ष के पूर्व नेता रमेश चेन्निथला के एक 'समझौते वाले उम्मीदवार' (compromise candidate) के तौर पर उभरने की संभावना को भी पूरी तरह से नकारा नहीं जा रहा है।














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