Sanjeev Jeeva Murder: यूपी में माफियाओं पर दोहरा प्रहार
यूपी के माफियाओं पर दोहरी मार पड़ रही है। एक ओर जहां पुलिस प्रशासन उनको ठिकाने लगा रहा है वहीं पुलिस प्रशासन की शरण में अपने आपको सुरक्षित समझने वाले माफिया मारे जा रहे हैं।

Sanjeev Jeeva Murder: उत्तर प्रदेश में माफिया मुख्तार अंसारी को 48 घंटे के अंदर दोहरा झटका लगा है। 5 जून को मुख्तार को अवधेश राय हत्याकांड में आजीवन कारावास की सजा हुई तो 7 जून को लखनऊ में उसके बेहद करीबी शूटर संजीव माहेश्वरी उर्फ जीवा की हत्या हो गई। भाजपा के दिग्गज नेता एवं पूर्व मंत्री ब्रह्मदत्त द्विवेदी की 1997 में हत्या के बाद उस पर गाजीपुर के मोहम्मदाबाद से भाजपा विधायक रहे कृष्णानंद राय की हत्या में भी शामिल होने का भी आरोप था। उसकी हत्या पुलिस की कस्टडी में तब की गयी जब वह लखनऊ सिविल कोर्ट में पेशी पर आया हुआ था। उसकी हत्या भी ऐसे अज्ञात अपराधियों ने की है जिनका अपना आपराधिक रिकार्ड कुछ खास नहीं है।
ऐसे में यूपी के माफियाओं पर दोहरा खतरा मंडराने लगा है। एक ओर पुलिस प्रशासन द्वारा कठोर कानूनी कार्रवाई और एनकाउण्टर का डर तो दूसरी ओर पुलिस सुरक्षा में भी खुद को सुरक्षित न रख पाने का खौफ। अतीक-अशरफ की हत्या जिस तरह पुलिस की हिरासत में तीन छुटभैये गुण्डों ने कर दी थी, उसी तरह दो लगभग अनाम से अपराधियों अजय और आनंद यादव ने यूपी का खौफ कहे जाने वाले संजीव जीवा की जीवनलीला खत्म कर दी।
संजीव जीवा को यूपी में खौफ का दूसरा नाम कहा जाता था। उसने एक कम्पाउंडर से हार्डकोर शूटर बनने तक के सफर में बेखौफ वारदातों को अंजाम दिया था। वह इतना बेखौफ था कि कृष्णानंद राय पर हमले के समय उसने उनकी क्वालिस गाड़ी की बोनट पर चढ़कर एके-47 से धुंआधार फायरिंग की थी।
लेकिन कभी पूरे उत्तर प्रदेश में अपना आपराधिक साम्राज्य रखने वाले मुख्तार अंसारी का आखिरी किला भी जीवा की हत्या के बाद ढह गया। अब मुख्तार गैंग के पास वह ताकत नहीं बची, जिसकी बदौलत उसने अपराध का साम्राज्य खड़ा किया था। मुख्तार अंसारी जेल में रहते हुए भी बड़ी हत्याओं एवं आपराधिक घटनाओं को इसलिये अंजाम दिलवा पाया, क्योंकि उसके पास मुन्ना बजरंगी और संजीव माहेश्वरी उर्फ जीवा जैसे हार्डकोर शूटर और मैनेजर थे। ये दोनों अपराधी हत्या करने के अलावा शूटर जुटाने में भी माहिर थे। मुख्तार गैंग के कमजोर होने की शुरुआत सात साल पहले 5 मार्च 2016 को हो गई, जब मुन्ना बजरंगी के साले पुष्पजीत सिंह उर्फ पीके की हत्या उसके दोस्त संजय मिश्रा के साथ लखनऊ के विकास नगर में कर दी गई थी।
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मुख्तार अंसारी, मुन्ना बजरंगी और संजीव जीवा के जेल में बंद होने के बाद वसूली, टेंडर मैनेजमेंट और कारोबार समेत सारे काम बजरंगी का साला पुष्पजीत सिंह ही देखता था। पुष्पजीत की हत्या का आरोप कृष्णानंद राय के परिजनों पर लगा, लेकिन जांच के बाद उन्हें क्लीन चिट दे दी गई। पुलिस हत्या के कारणों और असली अपराधियों तक कभी पहुंच नहीं पाई। पुष्पजीत की हत्या के बाद मुख्तार एवं बजरंगी गैंग का पूरा कारोबार बनारस निवासी तारिक संभालने लगा। तारिक बनारस छोड़कर लखनऊ में आकर रहने लगा था। यहीं से पूरे प्रदेश में गैंग का कारोबार संभालता था। 2 सितंबर 2017 को मुख्तार के करीबी तारिक की भी लखनऊ के गोमतीनगर ग्वारी फ्लाइओवर पर गोली मारकर हत्या कर दी गई।
मुख्तार एवं मुन्ना बजरंगी गैंग के लिये तारिक की हत्या बड़ा झटका था। फिर भी मुन्ना बजरंगी और जीवा जैसे हार्डकोर अपराधियों की वजह से मुख्तार गैंग की ताकत कम नहीं हुई थी। तारिक की हत्या करने का आरोप प्रदीप सिंह उर्फ पीके पर लगा। गाजीपुर निवासी रिटायर्ड डिप्टी एसपी जीएन सिंह का पुत्र प्रदीप सिंह कभी मुन्ना बजरंगी का खास हुआ करता था, लेकिन कारोबारी विवाद में दोनों के बीच ठन गई। दोनों की दोस्ती धीरे-धीरे दुश्मनी में बदल गई। इसी बीच प्रदीप सिंह के छोटे भाई पप्पू नेपाली की हत्या पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कर दी गई। प्रदीप को शक था कि उसके भाई की हत्या मुन्ना बजरंगी के इशारे पर की गई है। इसके बाद से ही दोनों गैंग एक दूसरे को ठिकाने लगाने की कोशिश में जुट गये।
पुष्पराज एवं तारिक की हत्या के बाद आशंका जताई जा रही थी कि मुख्तार गैंग एवं मुन्ना बजरंगी जवाबी हमला करेंगे। पुलिस को भी गैंगवार की आशंका लगातार सताये जा रही थी। बरेली एवं बागपत जेल में रहते हुए मुन्ना बजरंगी की दोस्ती मुकीम काला समेत कई अपराधियों से हो गई। मुकीम ने मुन्ना बजरंगी की मदद भी की। मुख्तार एवं मुन्ना बजरंगी गैंग पुष्पजीत और तारिक की हत्या का बदला लेता, इसी बीच 9 जुलाई 2018 को बागपत जेल में मुन्ना बजरंगी की भी हत्या हो गई। हत्या का आरोप जेल में बंद पश्चिमी यूपी के अपराधी सुनील राठी पर लगा। मुन्ना की पत्नी ने पूर्व सांसद धनंजय सिंह पर हत्या कराने का आरोप लगाया। मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद मुख्तार अंसारी गैंग को बड़ी चोट लगी।
मुन्ना बजरंगी की हत्या ने मुख्तार अंसारी और उसके गैंग को अंदर से हिलाकर रख दिया। इस बीच, योगी आदित्यनाथ की सरकार भी अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई के साथ उनके आर्थिक साम्राज्य को हिलाने का काम शुरू कर चुकी थी। मुख्तार अंसारी चौतरफा हमलों से बुरी तरह घबरा गया। उसने कांग्रेस में मौजूद अपने सिस्टम का इस्तेमाल किया और पंजाब के एक मामले में रोपड़ जेल चला गया। वह पंजाब से किसी कीमत पर यूपी नहीं आना चाहता था। मुख्तार की इस इच्छा का सम्मान करते हुए पंजाब की कांग्रेस सरकार भी उसे किसी कीमत पर यूपी भेजने को तैयार नहीं थी। पंजाब की तत्कालीन कांग्रेस सरकार मुख्तार को यूपी जाने से बचाने के लिये करोड़ों रुपये खर्च कर सुप्रीम कोर्ट तक मामले को खींच ले गई।
खैर, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मुख्तार को यूपी लाया गया। इसी बीच, मुख्तार गैंग को एक और बड़ा झटका लग गया। तारिक की हत्या के बाद मुख्तार गैंग का छिटपुट कारोबार संभाल रहे मेराज एवं मुकीम काला की 14 मई 2021 को चित्रकूट जेल में गोली मारकर हत्या कर दी गई। मेराज और मुकीम दोनों बजरंगी के नजदीकी थे तथा मुख्तार गैंग के लिये काम करते थे। इन दोनों की हत्या का आरोप अंशु दीक्षित पर लगा। अंशु दीक्षित कभी मुन्ना बजरंगी के लिये काम करता था, जिसकी बाद में सुनील राठी से दोस्ती हो गई थी। अंशु पैसे लेकर हत्यायें करने वाला अपराधी था। हालांकि चित्रकूट जेल में गोलीबारी के बीच पुलिस की गोली से अंशु दीक्षित भी मारा गया, लेकिन मरने से पहले वह मुख्तार गैंग को बड़ी चोट दे गया।
इसके पहले मुख्तार के नजदीकी एवं मऊ के मोहम्मदाबाद गोहना के पूर्व प्रमुख अजीत सिंह की हत्या 7 जनवरी 2021 को लखनऊ में कर दी गई थी। अजीत की हत्या का आरोप आजमगढ़ जेल में बंद माफिया ध्रुव सिंह कुंटू और गिरधारी विश्वकर्मा पर लगा। अजीत की पत्नी ने आरोप लगाया कि बसपा के पूर्व विधायक सर्वेश सिंह की हत्या में गवाही से रोकने के लिये ध्रुव सिंह उर्फ कुंटू ने गिरधारी के जरिये यह हत्या कराई है। अजीत सिंह हत्याकांड के छींटे पूर्व सांसद धनंजय सिंह पर भी पड़े। लेकिन अब जीवा की हत्या के बाद मुख्तार गैंग की कमर पूरी तरह टूट चुकी है। मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद संजीव जीवा के ठिकाने लगने से अब मुख्तार गैंग की ताकत बहुत घट गई है।
मुख्तार के तमाम शूटर जेलों में हैं तो अतीकुर्रहमान उर्फ बाबू फरार है। संजीव जीवा की हत्या करने वाला विजय यादव उर्फ आनंद यादव भी कोई हार्ड कोर अपराधी नहीं है। 24 साल के विजय पर नाबालिग युवती से रेप करने तथा पराली जलाने का मामला दर्ज था। रेप वाला मुकदमा भी आपसी सहमति से खत्म हो चुका है। परंतु, जिस तरीके से अतीक एवं अशरफ को मारा गया, ठीक उसी अंदाज में जीवा की हत्या भी की गयी है। अभी जीवा की हत्या करने का मकसद पता नहीं चल पाया है, लेकिन जिस तरीके से नये अपराधी बड़े-बड़े अपराधियों को धराशायी कर रहे हैं, वह जरूर चिंता की बात है। अतीक-अशरफ के बाद जीवा की पुलिस कस्टडी में हत्या पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था पर भी बड़ा सवालिया निशान खड़ा करती है।
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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