Film Release: क्या बदले माहौल में सहमे हुए हैं एजेंडा फिल्मकार?
कश्मीर फाइल्स, केरला स्टोरी या फिर दक्षिण की फिल्मों की उत्तर में सफलता ने बॉलीवुड के बड़े बडे दिग्गजों को डरा दिया है। वो अपनी फिल्में इस डर से रिलीज करने से बच रहे हैं कि कहीं बदले माहौल में उनकी फिल्में पिट न जाएं।

Film Release: अजय देवगन की आने वाली फिल्म 'मैदान' की रिलीज की तारीख फिर से आगे बढ़ा दी गई है, और ऐसा आठवीं बार हुआ है। अजय देवगन ही नहीं बॉलीवुड के तमाम सितारों की ढेरों फिल्में डब्बाबंद भी होती आई हैं, रिलीज की तारीखें भी बदलती हैं। लेकिन डब्बाबंद न होकर सात आठ बार रिलीज की तारीख बदलना कोई छोटी बात नहीं। केवल अजय देवगन की ही फिल्म नहीं शाहरुख खान की फिल्म 'जवान' के साथ भी ऐसा हो रहा है। तीसरी बार शाहरुख की इस मूवी की रिलीज तारीख आगे बढ़ी है। कई और फिल्मकार अपनी रिलीज की तारीखें आगे बढ़ा रहे हैं। ऐसे में सबके मन में सवाल उठ रहा है कि माजरा क्या है?
एक दौर कोविड का ऐसा भी आया कि तमाम फिल्मकार अपनी मूवीज ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर रिलीज करने लगे। उस समय सिनेमा हॉल्स में जनता आने का नाम ही नहीं ले रही थी। कुछ लोगों ने रिस्क लिया तो उन्हें बड़ा घाटा भी हुआ। हालांकि कश्मीर फाइल्स, पठान जैसी कुछ फिल्में चली भीं। माना गया कि दोनों ही फिल्मों को अलग अलग समुदायों का समर्थन भी अभूतपूर्व कामयाबी की बड़ी वजह बना।
ऐसे में अब जब कोरोना काल नहीं है तब लगातार रिलीज की तारीखें बढ़ाते जा रहे फिल्मकारों की दुविधा समझनी होगी। ये भी जानना जरूरी है कि कुछ फिल्मकार ऐसे भी हैं, जिनको आज के हालात में फिल्में रिलीज करने का वक्त सबसे अच्छा लग रहा है। जैसे आदिपुरुष, 72 हूरें और अजमेर 92। 'कश्मीर फाइल्स' जैसी ही कामयाबी जब 'दी केरला स्टोरी' को मिलीं तो ऐसे सभी फिल्मकार सक्रिय हो गए, जो मिलते जुलते विषयों पर फिल्में बना रहे थे। बॉलीवुड में आमतौर पर ऐसे विषयों पर फिल्में बनाना वर्जित समझा जाता रहा है, बल्कि उन्हें सांप्रदायिक फिल्में भी कहा जाता था।
लेकिन 'कश्मीर फाइल्स' और 'दी केरला स्टोरी' को पसंद करने वाले लोगों का मानना है कि भले ही ये फिल्में हिंदुत्व के नजरिए से बनाई गई हों, लेकिन साथ ही में ऐसे मुद्दों का खुलासा करती हैं, जिनको जानबूझकर जनता से छुपाया गया और इस तरह की फिल्में बनाने की कोशिश करने वालों को भी हतोत्साहित किया गया। फिल्म इंडस्ट्री में आज भी ऐसे लोग हैं जो इन फिल्मों को खुलासा या सच्चाई की बजाय प्रोपेगेंडा कहते हैं। नसीरुद्दीन शाह के ताजा बयानों से भी उसे समझा जा सकता है।
अब जानिए कि अजय देवगन और शाहरुख खान जैसे लोग क्यों फिल्में रिलीज करने से बच रहे हैं। अजय देवगन की फिल्म का नाम है 'मैदान', जो ऐसे फुटबॉल कोच की कहानी है, जो 1950 से 1963 तक भारतीय फुटबॉल टीम का मैनेजर भी रहा। तब भारत ने दो बार एशियाड गेम्स में गोल्ड मेडल भी जीते, और 1956 समर ओलंपिक मेलबर्न के सेमीफाइनल में पहुंचने वाला पहला एशियाई देश बना। उस कोच का नाम था सैय्यद अब्दुल रहीम। हिन्दुत्व की आंधी में कहीं रहीम की बायोपिक मूवी न उड़ जाए, शायद यही डर बार बार मूवी की रिलीज को टालने को मजबूर कर रहा है कि ऐसी फिल्म के लिए अभी माहौल अनुकूल नहीं है।
यूं शाहरुख ने अभी तक तमिल निर्देशक एटली की मूवी 'जवान' की कहानी को जगजाहिर नहीं किया है, लेकिन बताया जा रहा है कि 2006 में रिलीज हुई तमिल मूवी पेरारासू की कहानी पर बनी है। इसमें एक जज की किडनैपिंग के केस पर काम करते हुए, एक सीबीआई ऑफिसर पर शक जाता है कि वो विलेन के साथी पुलिस ऑफिसर्स की हत्या कर रहा है। बाद में पता चलता है कि ये काम सीबीआई ऑफिसर के हमशक्ल भाई का है। शाहरुख का भी डबल रोल है। हालांकि ये मूवी यूं किसी हिंदुत्ववादी को नाराज करने वाली लगती नहीं, किंतु भगवा रंग पर डॉन और पठान में कमेंट करने वाले शाहरुख पर उनका शक हमेशा रहता आया है। ऐसे में शाहरुख कोई रिस्क लेना नहीं चाहते होंगे। ये अलग बात है कि अभी तक फिल्म की रिलीज तारीख बार बार बदलने की वजह ना अजय देवगन बता रहे हैं और ना ही शाहरुख खान।
आमतौर पर हिंदी फिल्मों से साउथ की फिल्मों को कोई खतरा नहीं होता लेकिन आजकल जब ऐसी फिल्में साउथ में बन रही हैं, जो हिंदी में भी रिलीज होंगी ही, तो उन्हें भी हिंदी फिल्मों के दर्शकों का मूड, यहां की बड़ी फिल्मों की रिलीज तारीख देखनी होती है। ऐसे में सूर्या की मूवी 'कंगुवा' तो पहली ऐसी मूवी बन चुकी हैं, जो रिलीज से पहले ही सभी तरह के राइट्स आदि बेचकर 500 करोड़ पक्के कर चुकी है।
स्पेशल इफैक्ट्स और एनीमेशन से भरपूर इस मूवी के टाइटल कंगुआ का अर्थ होता है ऐसा मानव जिसमें अग्नि की शक्तियां हों। जाहिर है इतने बड़े पैमाने पर कोई मूवी बनेगी, तो हिंदी फिल्मों में रणनीति को भी ध्यान में रखा जाएगा। अब खबर आई है कि ये मूवी जो पहले नवम्बर 2023 में रिलीज होनी थी, जनवरी 2024 तक इसकी तारीख बढ़ाई गईं, अब फिर अनिश्चितकालीन टाल दी गई है।
किसान आंदोलन में खुलकर सरकार के खिलाफ जाने वाले पंजाबी हीरो दलजीत दोसांझ से तो वैसे ही हिंदुत्ववादी ताकतें नाराज बताई जाती हैं। ऐसे में पंजाबी गायक अमर सिंह चमकीला की दूसरी बीवी अमरजोत कौर के साथ रिश्तों पर बनी पंजाबी फिल्म 'जोड़ी' भी निशाने पर आ सकती थी। चमकीला विवादास्पद लेकिन एक दौर के मशहूर पंजाबी गायक थे। 5 मई को ये मूवी रिलीज होने जा रही थी, लेकिन अब इसे अनिश्चित काल के लिए टाल दिया गया है।
ऐसे में वो फिल्में भी प्रभावित हो रही हैं, जिनको हिंदुत्ववादी पक्के तौर पर पसंद करेंगे। उनमें से एक है साउथ में बन रही 'हनुमैन'। प्रशांत वर्मा की ये मूवी हिंदी समेत कई भाषाओं में रिलीज होगी, इसमें तेजा सज्जा एक ऐसे व्यक्ति की भूमिका में हैं, जिसे हनुमान की ताकत मिल जाती है। शानदार टीजर और रिलीज की तारीख 12 मई घोषित होने के बावजूद फिल्म की रिलीज टाल दी गई। माना जा रहा है कि अभी प्रभास की मूवी 'आदिपुरुष' का जो माहौल है, और जो लगाव आम आदमी को उससे हुआ है, उसका असर समझने के बाद ही 'हनुमैन' रिलीज की जाएगी। 'आदिपुरुष' के निर्देशक ओम राउत ने अपील की है कि हर शो में हनुमानजी के लिए एक कुर्सी खाली रखी जाए, सो हनुमान भक्तों को ये बात अंदर तक असर कर गई है।
इधर रणवीर कपूर और साई पल्लवी को राम-सीता के रोल में लेकर मूवी 'रामायण' बना रहे मधु मंटेना की मूवी की भी रिलीज तारीख टलने की खबरें हैं। हालांकि मधु ने कोई तारीख दी भी नहीं थी लेकिन उनको भी आदिपुरुष का इंतजार तो होगा ही। हालांकि उन्होंने आदिपुरुष से बने माहौल को भुनाने के लिए एक नया रास्ता खोज निकाला है। रणवीर कपूर ने ऐलान कर दिया है कि वो आदिपुरुष की 10,000 टिकटें गरीब बच्चों के लिए खरीदेंगे।
'आदिपुरुष' 16 जून को रिलीज हो रही है, तो अजमेर के युवक कांग्रेस नेताओं से जुड़े लड़कियों के ब्लैकमेल और रेप कांड पर बनी मूवी 'अजमेर 92' भी 14 जुलाई को रिलीज हो रही है। "72 हूरें" जो दो साल से बनकर रिलीज के इंतजार में थी, वो भी 7 जुलाई को रिलीज होने जा रही है। केरला स्टोरी की सफलता और आदिपुरुष में किये गये बदलाव से ऐसी फिल्मों को अपने लिए अनुकूल माहौल लग रहा है। लेकिन इस बीच हिन्दुओं को निशाना बनाती भीड़, फराज और अफवाह जैसी फिल्में कब आयी और चली गयी किसी को पता नहीं चला। ऐसे में बाकी फिल्मकार घाटे के डर से सहमे हुए हैं तो यह बदले हुए माहौल का ही असर है।
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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