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FIFA World Cup 2022: क्रिकेट के बाजारवाद के चक्कर में भारत फुटबाल जैसे लोकप्रिय खेल में क्यों पिछड़ गया?

FIFA World Cup 2022: हमारे यहां टी-20 क्रिकेट का शोर है लेकिन दुनियाभर में इस समय फुटबाल विश्व कप का शोर है। सेमीफाइनल में इंग्लैण्ड से बुरी तरह हारने के बाद हो सकता है अब हम क्रिकेट की चर्चा कुछ दिन न करें लेकिन क्रिकेट तो हमारे लिए एक नशे की तरह है, जो कुछ समय के अंतराल के बाद फिर दिमाग पर छा जाता है।

FIFA World Cup 2022 why Ignoring Football for Cricket craze

लेकिन दुनिया पर इस समय फुटबाल का बुखार चढा हुआ है। इसका कारण ये है कि फुटबॉल का महाकुंभ फीफा वर्ल्ड कप 20 नवंबर 2022 से कतर में शुरु होने जा रहा है। दुनिया के चुनिंदा 32 देशों की फुटबॉल टीमें इस मेगा इवेंट में शामिल हो रही हैं।

जहां भारत में क्रिकेट के पीछे दीवानगी है, वहीं अन्य खेलों में आम लोगों और मीडिया की नाम मात्र की दिलचस्पी दिखती है। फुटबॉल को लेकर तो अपने यहां विकट हालत है। खेल महासंघों की कपट राजनीति ने माहौल खराब कर रखा है। सुनील छेत्री और बाईचुंग भूटिया जैसे धुआंधर फुटबॉल खिलाड़ियों के देश में कायदे की टीम तक नहीं है जो विश्व कप तो बड़ी बात है, एशिया में भी अपनी छाप छोड़ सके।

अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ पर कब्जे की लड़ाई का हालिया विवाद मिसाल है। अदालत के हस्तक्षेप से नाराज दुनिया की अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल फेडरेशन फीफा ने भारत की सदस्यता तक को कुछ दिनों के लिए निलंबित कर दिया था।

पिछले माह अक्टूबर में भारत में 17 साल से कम उम्र की महिला विश्व कप फुटबॉल टूर्नामेंट का आयोजन तय था। आयोजन से पहले ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन के नेतृत्व में बदलाव की प्रक्रिया शुरू करने से फीफा नाराज हो गया। विवाद की वजह से आयोजकों का उत्साह ठंडा ही रहा।

कम प्रचार के बीच 30 अक्टूबर को कोलकाता के सॉल्ट लेक स्टेडियम में फाइनल मैच खेला गया। स्पेन की लड़कियों ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए जूनियर फीफा विश्व कप पर कोलंबिया को हराकर कब्जा जमा लिया। आयोजक देश होने के कारण भारत को पहली बार जूनियर महिला फीफा विश्व कप में खेलने का विशेष मौका मिला। भारत की लड़कियों का प्रदर्शन प्रभावी नहीं रहा, लेकिन उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने का अनुभव जरूर मिला।

हम क्रिकेट के क्रेज में फंसे हैं, और दुनिया फ़ुटबॉल की दीवानी है। फुटबॉल के फैन्स अपने हीरो लियोनेल मैसी और क्रिस्टियानो रोनाल्डो को विश्व कप में आखिरी बार प्रदर्शन करते देखने के लिए कतर पहुंचने लगे हैं। दोनों फुटबॉलर उम्र के उस पड़ाव पर हैं जहां लोग संन्यास ले लेते हैं। हर चार साल बाद फीफा वर्ल्ड कप का आयोजन होता है। अगली बार दोनों में से शायद ही कोई दिग्गज मैदान में होगा।

फीफा वर्ल्ड कप के महंगे टिकट हासिल करने और कतर में रुकने का जुगाड जो नहीं कर पाएं हैं, वे अपने इलाके के बड़े स्क्रीन पर मैच दिखाने के सार्वजनिक आयोजनों की बुकिंग कराने में लगे हैं। प्रशंसकों पर फुटबॉल की दीवानगी सिर चढ़कर बोल रही है। स्टार खिलाड़ियों और देशों के समर्थक उत्साह और उमंग से भरे पड़े हैं। मगर हम फुटबाल के इस महाकुंभ के मैदान से नदारद हैं।

वैसे क्रिकेट एक मंहगा खेल है। खेलने के लिए बैट, बॉल, विकेट, पैड, ग्लव्स, हेलमेट और अंतःरक्षक गार्ड का इंतजाम करना पड़ता है। इसलिए व्यवस्थित रूप से खेले जाने वाला क्रिकेट अमीरों के खेल की श्रेणी में आता है। आम गरीब सिर्फ कामचलाऊ क्रिकेट खेल कर संतोष कर लिया करते हैं। जबकि फुटबॉल आम जन का खेल है। एक मैदान और दो गोल पोस्ट की जरूरत है जहां 22 खिलाड़ी पूरे मैच में एक गेंद की गति पर कब्ज़ा करने के शारीरिक सौष्ठव व चातुर्य का प्रदर्शन निरंतर कर रहे होते हैं।

फुलबाल में एक सीमा के बाद राष्ट्र नहीं खिलाड़ी महत्वपूर्ण हो जाता है। विश्व फुटबॉल में सबसे अधिक गोल दागने वाले प्रमुख खिलाड़ियों में क्रिस्टियानो रोनाल्डो, लियोनेल मेसी और रॉबर्ट लिवानडोवस्की शामिल हैं जो इस बार के विश्व कप में खेलेंगे।

फुटबॉल के सर्वकालिक महान खिलाड़ियों में गिने जाने वाले पेले ब्राज़ील के खिलाड़ी थे तो अर्जेंटीना के स्टार फुटबॉलर डिएगो माराडोना और ब्राज़ील के रोनाल्डो नज़ारियो को शानदार ड्रिबलिंग के लिए आज भी याद किया जाता है। अन्य सर्वकालिक महान खिलाड़ियों में योहान क्रोएफ (नीदरलैंड), माइकल प्लाटिनी व जिनेडाइन जिडान (फ्रांस) और फ्रांज बेकेनबावर (जर्मनी) को फुटबॉल के दीवाने आज भी उनके कलात्मक खेल के लिए याद करते हैं।

बीसीसीआई जैसी संस्थाओं के फैलाए बाजारवाद ने भारत को क्रिकेट में ही फंसा रखा है। हम महज पाकिस्तान से जीतने का रोमांस पाने के लिए क्रिकेट के अलावा किसी और खेल को देखने में समय लगाने को तैयार ही नहीं हैं। हॉकी, टेनिस और अन्य खेलों में हमारे खिलाड़ियों का प्रदर्शन चर्चा में ही नहीं आता, क्योंकि मीडिया ने क्रिकेट को अप्रतिम राष्ट्रवाद से जोड़ दिया गया है।

उपनिवेशवाद की याद और विभाजन की पीड़ा में क्रिकेट को हम पाकिस्तान से जीत हार के संदर्भ में देखते हैं। कूटनीति भी इस पिच पर ही तैयार होती है कि पकिस्तान के सुधरने तक हम वहां जाकर कोई मैच नहीं खेलेंगे, न ही उसे यहां बुलाएंगे। लेकिन अन्य देशों में पाकिस्तान से खेलने में हर्ज नहीं है।

ऐसा नहीं है कि फीफा के पास इंटरनेशनल क्रिकेट क्लब (आईसीसी) से कम पैसा है। बल्कि सच्चाई यह है कि फीफा की आमदनी और खर्च से आईसीसी के बजट की कोई तुलना हो ही नहीं सकती। फीफा वर्ल्ड कप 2022 के लिए फुटबॉलर्स को दी जाने वाली इनाम की कुल रकम 3,592 करोड़ रुपए है जबकि ऑस्ट्रेलिया में चल रहे आईसीसी के टी 20 विश्व कप 2022 की इनाम राशि महज 45 करोड़ 71 लाख रुपए ही है।

क्रिकेट टी 20 विश्व कप का 13 नवंबर को मेलबर्न में फाइनल खेला जाएगा। इसके बाद 20 नवंबर से कतर में फुटबॉल वर्ल्ड कप का बिगुल बजेगा। फीफा फाइनल मैच 18 दिसंबर को खेला जाएगा। टी20 वर्ल्ड कप विजेता टीम को जहां भारतीय करेंसी के हिसाब से लगभग 13 करोड़ रुपए मिलेंगे, वहीं फीफा वर्ल्ड कप विजेता टीम के खाते में 367 करोड़ रुपए से भी ज्यादा आएंगे।

खैर, हम क्रिकेट के अलावा कुछ देख नहीं पा रहे हैं। हम हर समय नए तेंदुलकर, कोहली और धोनी को गढ़ने की सोचते रहते हैं। इसकी वजह है कि क्रिकेट में सर्वाधिक आमदनी प्रवासी भारतीय दर्शकों से आती है। मेलबर्न हो या इंग्लैंड, स्टेडियम में भारतीय मूल के ही सर्वाधिक दर्शक मैच देखने पहुंचते हैं। जहां क्रिकेट दुनिया के गिने चुने उन देशों में खेली जाती है जहां बीते सदी तक ब्रिटेन का उपनिवेश था। जबकि सीमित संसाधन वाले खेल फुटबाल की धुन पर समूची दुनिया थिरकती है।

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(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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