राजस्थान के किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी! फसल बीमा क्लेम के नियम बदले, अब नहीं काटने होंगे अदालतों के चक्कर

Rajasthan PMFBY PM Fasal Bima Yojana: प्राकृतिक आपदाओं से खेती को होने वाले नुकसान के बीच किसानों के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत अब दिवंगत किसानों के परिवारों को बीमा क्लेम लेने के लिए लंबी कानूनी प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा। राज्य सरकार ने फसल बीमा दावों की प्रक्रिया को आसान बनाते हुए बीमा कंपनियों को लंबित मामलों का तेजी से निपटारा करने के निर्देश दिए हैं।

अब तक कई किसान परिवार सिर्फ इसलिए बीमा राशि से वंचित रह जाते थे क्योंकि उत्तराधिकारी प्रमाण पत्र बनवाने में समय और खर्च दोनों ज्यादा लगते थे। सरकार के नए फैसले के बाद अब कम दस्तावेजों में ही क्लेम राशि मिलने का रास्ता साफ हो गया है। माना जा रहा है कि इससे हजारों परिवारों को जल्द आर्थिक मदद मिल सकेगी।

आसान हुई बीमा क्लेम प्रक्रिया

कृषि विभाग के अनुसार अब फसल बीमा योजना में किसान की मृत्यु होने के बाद उसके परिवार को राहत देने के लिए प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। पहले बीमा राशि लेने के लिए न्यायालय से उत्तराधिकारी प्रमाण पत्र लाना जरूरी होता था। इसी कारण कई दावे लंबे समय तक अटके रहते थे। कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने बताया कि अब बीमा कंपनियों को नए निर्देश जारी कर दिए गए हैं ताकि किसानों के परिवारों को जल्द भुगतान मिल सके।

नामित सदस्य को सीधे मिलेगा पैसा

अगर किसान ने राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल पर पहले से किसी परिवार सदस्य का नाम दर्ज किया है तो बीमा राशि सीधे उसी सदस्य के खाते में भेजी जाएगी। इससे परिवारों को अतिरिक्त दस्तावेजी प्रक्रिया से राहत मिलेगी।

वारिसनामा भी होगा मान्य

जिन मामलों में किसी सदस्य का नाम दर्ज नहीं है, वहां तहसीलदार या पटवारी द्वारा जारी वारिसनामा मान्य होगा। इसके अलावा न्यायालय का उत्तराधिकार प्रमाण पत्र भी स्वीकार किया जाएगा। सरकार ने यह भी व्यवस्था दी है कि यदि परिवार में किसी तरह का विवाद नहीं है तो सभी सदस्य मिलकर एक व्यक्ति को अधिकृत कर सकते हैं। इसके लिए 50 रुपए के नोटरी स्टाम्प पर शपथ पत्र देना होगा। इसके बाद बीमा कंपनी सीधे अधिकृत सदस्य के बैंक खाते में क्लेम राशि जमा करेगी।

अब इन दस्तावेजों से होगा काम

फसल बीमा क्लेम के लिए अब कुछ जरूरी दस्तावेज ही पर्याप्त माने जाएंगे। इनमें मृत्यु प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, बैंक खाते की कॉपी और परिवार की सहमति वाला शपथ पत्र शामिल है। कृषि विभाग ने बीमा कंपनियों से कहा है कि दिवंगत किसानों के मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाए ताकि प्रभावित परिवारों को जल्द आर्थिक सहायता मिल सके।

हजारों लंबित मामलों को मिल सकती है राहत

सरकार का मानना है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद लंबे समय से रुके हजारों फसल बीमा दावों का निपटारा तेजी से हो सकेगा। कृषि मंत्रालय भारत सरकार ने भी राज्य सरकार की इस पहल की सराहना की है। बदलते मौसम, ओलावृष्टि, चक्रवाती बारिश और कटाई के बाद खेत में रखी फसल खराब होने जैसी परिस्थितियों में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों के लिए बड़ी सुरक्षा बनकर सामने आ रही है। नई व्यवस्था से अब किसान परिवारों को आर्थिक मदद पाने में पहले जैसी परेशानी नहीं होगी।

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