Anil Antony: एंटनी का भाजपा में शामिल होना छोटी घटना नहीं
भाजपा को पता है कि केरल में पैर पसारना है तो चर्च के समर्थन के साथ साथ किसी ऐसे ईसाई चेहरे को भी सामने लाना होगा, जिसके लिए वहां के लोगों में भावनात्मक लगाव भी हो।

देश के पूर्व रक्षा मंत्री, केरल के पूर्व मुख्यमंत्री, कांग्रेस के पूर्व कोषाध्यक्ष ए.के. एंटनी के बेटे अनिल एंटनी के भाजपा में शामिल होने को सिर्फ इस नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए कि इतने बड़े कांग्रेसी नेता का बेटा भाजपा में शामिल हुआ है| ए.के. एंटनी आत्मग्लानि के शिकार हैं, क्योंकि उनके बेटे ने भाजपा में शामिल होते समय सभी काग्रेसियों को गांधी परिवार का गुलाम बता दिया, जिनमें वह खुद भी शामिल हैं| ए.के. एंटनी ने अपनी झेंप मिटाने और वफादारी दिखाने के लिए कांग्रेस मुख्यालय में जाकर मीडिया के सामने सफाई दी|

इस सफाई में उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने बेटे को हमेशा देश के लिए काम करना सिखाया है, न कि एक परिवार के लिए| लेकिन उसने एक अलग रास्ता चुना, वह एक ऐसी पार्टी में शामिल हो गया है जो देश को सांप्रदायिक आधार पर बांटने और देश के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने को नष्ट करने की कोशिश कर रही है| वह इस फैसले को स्वीकार नहीं कर सकते, उनके लिए यह गलत और पीड़ादायक है|
ए.के. एंटनी को यह घटना दिल पर नहीं लेनी चाहिए, उन्हें गांधी परिवार के सामने जाकर सफाई देने की जरूरत नहीं थी| उन्हें याद करना चाहिए कि उन्होंने खुद 2014 का लोकसभा चुनाव हारने के बाद गांधी परिवार को क्या रिपोर्ट सौंपी थी। उन्होंने उस रिपोर्ट में कहा था कि कांग्रेस को मुस्लिमपरस्ती बंद करनी चाहिए| कांग्रेस के उन नेताओं पर नकेल डालनी चाहिए, जिन्होंने कांग्रेस की छवि हिन्दू विरोधी पार्टी की बना दी है| अल्पसंख्यकों को खुश करने की कांग्रेस की नीति का उलटा असर पड़ा, हिन्दू कांग्रेस से बेहद नाराज हो गए, जिसका भाजपा को फायदा मिला|
हालांकि यह रिपोर्ट अब कांग्रेस मुख्यालय के किसी कोने में धूल फांक रही होगी| लेकिन एंटनी ने अपने बेटे के भाजपा में शामिल होने के बाद भाजपा को साम्प्रदायिक पार्टी कह कर अपनी रिपोर्ट की याद दिला दी, जिसमें उन्होंने खुद लिखा था कि कांग्रेस ने मुस्लिम तुष्टिकरण करके अपनी धर्मनिरपेक्ष छवि को नुकसान पंहुचाया है| जब वह भाजपा को साम्प्रदायिक पार्टी कह रहे हैं, तो उन्हें याद रखना चाहिए कि उन्होंने खुद कांग्रेस को साम्प्रदायिक कहा था|
लेकिन अनिल एंटनी के भाजपा में शामिल होने को इस नजरिए से देखा ही नहीं जाना चाहिए कि 50 साल से कांग्रेस परिवार का हिस्सा रहे एक परिवार का सदस्य भाजपा में शामिल हुआ है| इस घटना को इसकी पृष्ठभूमि से समझना चाहिए, और पृष्ठभूमि यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हत्यारा और दंगाई बताते हुए जब बीबीसी ने उनके खिलाफ एक डाक्यूमेंट्री जारी की थी, तब उन्होंने बीबीसी के खिलाफ स्टैंड लिया था, जिस पर कांग्रेस खफा हो गई थी|
उनका स्टैंड यह था कि कांग्रेस का भारतीय न्यायपालिका के फैसलों को दरकिनार करके बीबीसी जैसे विदेशी संस्थान को महत्व देना देश हित में नहीं है| जबकि कांग्रेस भारतीय अदालतों के फैसलों को दरकिनार करके बीबीसी की डाक्यूमेंट्री को मुद्दा बना रही थी, क्योंकि इस डाक्यूमेंट्री में दंगों के लिए मोदी को कसूरवार ठहराया गया था, जो 2002 से कांग्रेस का स्टैंड रहा था| ए.के. एंटनी ने कहा है कि उन्होंने अपने बेटे को हमेशा देश के लिए काम करना सिखाया है, न कि एक परिवार के लिए, तो उनके बेटे अनिल ने जनवरी में बीबीसी के खिलाफ स्टैंड लेकर अपने पिता की शिक्षा के अनुसार ही काम किया था| क्योंकि उस समय अनिल ने कहा था कि बीबीसी का समर्थन करने से हमारी राष्ट्रीय सम्प्रभुता कमजोर होगी|
अनिल एंटनी का भाजपा में शामिल होना कोई मामूली घटना नहीं है, इसे न तो सिर्फ एक परिवार के नजरिए से देखना चाहिए, न ही राष्ट्र के स्वाभिमान और सम्प्रभुता के नजरिए से देखना चाहिए| अलबत्ता राजनीतिक नजरिए से भी देखना चाहिए| दो साल पहले कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए टॉम वडक्कन के साथ जोड़कर देखना चाहिए, यह भाजपा की ईसाईयों को अपने साथ लाने की बड़ी योजना का हिस्सा है|
गोवा और पूर्वोतर में ईसाईयों का दिल जीतने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केरल के ईसाईयों को जोड़ने का फैसला किया है| सितंबर 2022 में प्रधानमंत्री ने खुद कोच्ची में केरल भाजपा की कोर कमेटी की बैठक ली थी| इस बैठक में उन्होंने केरल यूनिट द्वारा अपने जनाधार को न बढ़ा पाने पर नाराज़गी का इज़हार किया था| वह इस बात से खफा थे कि 2016 में जहां भाजपा विधानसभा की एक सीट जीत गई थी, वहीं 2021 में एक भी सीट नहीं जीत पाई| मोदी ने इस बैठक में ईसाई समुदाय पर ध्यान केन्द्रित करने का मन्त्र दिया था|
ऐसा पहली बार नहीं था कि मोदी ने ईसाई समुदाय तक पहुंच बढ़ाने की ज़रूरत पर बल दिया था, इससे पहले जुलाई 2022 में भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में भी उन्होंने पार्टी नेताओं को ग़ैर-हिंदुओं से संपर्क बढ़ाने की सलाह दी थी| इस बैठक में उन्होंने उत्तरपूर्वी प्रांतों के भाजपा नेताओं से कहा था कि वे केरल का दौरा करें, और ईसाई समुदाय के हितों के संरक्षण के लिए पार्टी की ओर से किए जा रहे प्रयासों को उजागर करें| कोच्चि बैठक में मोदी की झिड़की के एक हफ्ते के बाद, भाजपा ने मिशन ईसाई के साथ पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को केरल में पार्टी के मामलों का प्रभारी नियुक्त कर दिया|
पिछले महीने सायरो मालाबार कैथलिक चर्च के आर्कबिशप जोसफ के उस बयान ने खलबली मचा दी थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर भाजपा किसानों की समस्याओं पर विचार करे तो केरल के ईसाई भाजपा का समर्थन कर सकते हैं| उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ़ भी की थी| आर्क बिशप का यह बयान ईसाईयों का दिल जीतने के मोदी के प्रयासों का नतीजा था| दक्षिण भारत में कर्नाटक को छोड़कर भाजपा तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु या केरल में कहीं भी अपने पाँव कभी नहीं जमा पाई| इसमें भी केरल में उसका जनाधार इन बाकी दक्षिणी राज्यों की तुलना में सबसे कम है|
भाजपा को पता है कि केरल में पैर पसारना है तो चर्च के समर्थन के साथ साथ किसी ऐसे ईसाई चेहरे को भी सामने लाना होगा, जिसके लिए वहां के लोगों में भावनात्मक लगाव भी हो और इसके लिए एंटनी परिवार से बेहतर कोई और नहीं हो सकता था| इसलिए अनिल एंटनी का भाजपा में शामिल होना भाजपा के बड़े प्लान का हिस्सा है| उनके पिता ए.के. एंटनी तीन बार केरल के मुख्यमंत्री रहे हैं|
भाजपा अरसे से यह अच्छी तरह समझ रही थी कि केरल में वह तभी मजबूत हो पाएगी, जब कांग्रेस वहां कमजोर होगी| अभी भी कांग्रेस पर यहां की जनता का भरोसा बाकी राज्यों की तुलना में ज्यादा है| यही वजह है कि बाकी राज्यों में बहुत खराब प्रदर्शन करने के बावजूद 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस केरल की 20 में से अकेले 15 सीटें जीतने में कामयाब रही थी| यही नहीं उसकी अगुवाई वाली यूडीएफ को कुल मिलाकर 19 सीटें मिल गईं थीं| इससे अंदाजा लगा सकते हैं कि केरल में कांग्रेस का अभी भी जनाधार मजबूत है और भाजपा इसे खत्म किए बिना यहां खुद को स्थापित नहीं कर सकती| केरल में कांग्रेस पर बढ़त बढ़ाने के लिए अनिल एंटनी का ये कदम बीजेपी को फायदा पहुंचा सकता है|
यह भी पढ़ें: Samajwadi Party: क्या सपा की 'यादवपरस्त' राजनीति पर भरोसा करेगा दलित?
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)
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