आधुनिकता की भ्रमित मानसिकता और चंडीगढ़ का हॉस्टल वीडियो कांड
चंडीगढ़ युनिवर्सिटी में एक लड़की ने हॉस्टल में अपनी ही साथी लड़कियों का चोरी से उस वक्त वीडियो बना लिया जब वो नहा रही थीं। यह बात सामने आयी तो हंगामा मच गया। इस मामले में उस विडियो बनाने वाली लड़की सहित तीन लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। अनेक लड़कियां हॉस्टल छोड़कर जा चुकी है।

चंडीगढ में जो कुछ भी हुआ वह एक क्षण को तो हैरान करने वाला है, परन्तु जैसे ही चेतना अपने रूप में वापस आती है, वैसे ही आपको लगता है कि क्या वास्तव में यह नया है या बाजार बनते हमारे समाज में इसकी तैयारी वर्षों से हो रही है? क्या ऐसी घटनाओं की आहट पिछले कई वर्षों से नहीं सुनाई दे रही है? जाहिर है कि यह आहटें हमें सुनाई दे रही थीं मगर या तो हम आँखें मूंदकर बैठे रहे या फिर आँखें फेर लीं।
कथित आधुनिक तकनीक एवं शिक्षा के चलते जो मूल्य दैनिक जीवन से तिरोहित होते जा रहे हैं, वह कहीं न कहीं हमें इशारा कर रहे थे कि यह होने वाला है, परन्तु आधुनिकता की एक अंधी दौड़ है, स्त्रीवादी कविताओं का जो शोर है, कथित व्यक्तिवाद व निजता का जो हाइप है, उसने परिस्थितियों को इस प्रकार मोड़ दिया है कि कुछ दिखाई ही नहीं दिया।
भ्रमित और बिखरे हुए समाज की कहानी है चंडीगढ कांड
चंडीगढ़ में जो हो रहा है, वह दरअसल एक भ्रमित और बिखरे हुए समाज की महिलाओं की कहानी कहता है, जिन्हें आधुनिक शिक्षा में कथित रूप से आधुनिक तो कर दिया है, परन्तु आधुनिकता क्या होती है, यह उन्हें पता तक नहीं है। चंडीगढ़ में जो अब बातें निकलकर आ रही हैं, उससे कहीं न कहीं यही कहानी सामने आ रही है कि लड़की को ब्लैकमेल करके एमएमएस वीडियो मांगे जा रहे थे।
अब यहीं पर पेच आता है, कि लड़की इतनी आधुनिक है कि वह अपना वीडियो भेज सकती है, परन्तु उसके भीतर आधुनिकता बोध इतना नहीं है कि यदि उसका वह वीडियो वायरल भी हो गया तो क्या हुआ? विवाह से पहले ही अगर प्यार करना, शारीरिक सम्बन्ध बनाना आधुनिकता है, तो यह सभी को पता चल भी जाए तो क्या फर्क पड़ता है?
परन्तु भारत में फर्क पड़ता है क्योंकि यहाँ पर आधुनिकता का सम्बन्ध मात्र शारीरिक संबंध बनाने तक रह गया है। इससे इतर भी कुछ आधुनिक हो सकता है, यह शायद आधुनिकतावादियों को पता ही नहीं है। हमारे बच्चों को मात्र इतना ही आधुनिक होना सिखाया जा रहा है कि वह अपने शरीर से कपड़े उतार दें। देह की सीमाएं तोड़ने को ही आजादी मान लिया गया है, लेकिन सवाल है कि उसके बाद क्या?
देह की सीमाएं जब टूटती हैं, तो टूटती ही जाती हैं, और उस उम्र में जब यौवन अपने चरम पर होता है। तब तो यह सीमाएं टूटकर अपराध की ओर चली जाएं तो भी हैरानी नहीं होनी चाहिए। देह की सीमाओं के टूटने को ही आधुनिकता बताने का जो ट्रेंड है, उसके चलते ही लड़कियां उस ट्रैप में फंसती हैं, जो अपने साथ कई और लड़कियों के जीवन को भी बर्बाद करने की क्षमता रखता है।
चंडीगढ़ वाले मामले में यह भी सूचना अपुष्ट रूप से आई कि कुछ लड़कियों ने इन वीडियो की बात आने पर आत्महत्या का प्रयास किया। हालांकि पुलिस एवं युनिवर्सिटी प्रशासन इसे नकार रहा है परन्तु इस बात का उत्तर नहीं दे रहा कि आखिर आधी रात के बाद युनिवर्सिटी में एम्बुलेंस क्यों आई थी? आत्महत्या वाली सूचना निश्चित रूप से आहत करने वाली सूचना थी क्योंकि जो हुआ उसमें इन लड़कियों की गलती नहीं थी। फिर, इस प्रकरण में ऐसा क्या हुआ कि उन्हें आत्महत्या के बारे में सोचना पड़ा?
आधुनिकता और देह की शुचिता का घालमेल
ऐसा इसलिए हुआ कि उनके दिमाग में आधुनिकता और देह की शुचिता दोनों का घोल बराबर मात्रा में डाला गया और इन दोनों ने उन्हें इतना भ्रमित कर दिया कि इस कल्पना मात्र से कि उनकी देह कोई देख लेगा तो अनर्थ हो जाएगा। परन्तु यही आधुनिक लडकियां किसी भी ब्यूटी कंटेस्ट में बिकनी राउंड को देखती हैं, और उसमें यदि भाग लेने का अवसर मिले तो वह भी करना चाहेंगी, तो उसमे भी देह दिखेगी? या फिर नहीं दिखेगी?
यदि मॉडलिंग करने का अवसर मिला तो साबुन आदि के विज्ञापन के लिए नहाने का दृश्य मिला, तो वह भी करेंगी, और आधुनिकता के नाम पर और भी कुछ करना पड़े तो करेंगी। फिर ऐसा इन वीडियोज में भी रहा होगा तो फिर उसको वो स्वीकार क्यों नहीं कर पा रही हैं? उन्हें अपना दैहिक मर्यादा का ऐसा संकोच है कि आत्महत्या करने का प्रयास तक कर लिया?
वास्तव में हम अपनी बच्चियों को जिन मायनों में आधुनिक बना रहे वह ऐसी भ्रमित पीढ़ी बन रही है, जो एक ओर कथित शुचितावादी गैंग के चलते अपने नहाने की वीडियो बाहर जाने की आशंका मात्र से मरने की ओर कदम बढ़ा लेती है और दूसरी ओर मॉडर्निटी की मांग के आधार पर सार्वजनिक रूप से अपना देह प्रदर्शन करके आधुनिक होने भी निकल पड़ती है। आखिर इन बालिकाओं के पास आधुनिकता की कितनी समझ है, क्या कभी इस पर विचार किया है?
उनका पालन पोषण जिस आधुनिकता की अधकचरी मानसिकता के साथ हो रहा है, वह कल्पना ही घातक है। इस आधुनिकता में स्पष्टता नहीं है। यहां पर कम उम्र में ही ब्वॉयफ्रेन्ड बनाने का शौक पाल लेना और नासमझी में फ्री सेक्स की चाहत रखना आधुनिकता का पर्यायवाची बन गया है।
यदि किसी लड़की का बॉयफ्रेंड नहीं है, तो वह आधुनिक नहीं है। बस लड़कियों के लिए बाजारवादी आधुनिकता को यहीं तक सीमित कर दिया गया है। इसमें किसका दोष है? जब रेयान इंटरनेशनल स्कूल गुरुग्राम में एक बच्चे का खून उसी के विद्यालय के छात्र ने कर दिया था और फिर बाद में कई कहानियां सामने आई थीं, जिनमें यौन सम्बन्ध से लेकर पीटीएम टालने तक की कहानियाँ थीं। तो फिर उस अबोध बच्चे के साथ जो हुआ उसका दोषी कौन है?
पोर्न के टैग से डरती है आधुनिकता?
ऐसे ही कुछ साल पहले दिल्ली पब्लिक स्कूल आरके पुरम में भी एक सेक्स स्कैंडल सामने आया था, वह तो इतना चर्चित हुआ था कि उस पर फ़िल्म तक बन गईं। दिल्ली मेट्रो में तो अश्लील हरकतों की बाढ़ आई रहती है, और यदि इन जोड़ों को रोका जाए, तो वह वही बात करते हैं कि वह आधुनिक है। मगर इन्हीं गतिविधियों का वीडियो किसी पोर्न साईट पर चला जाएगा तो फिर कथित शुचिता उन पर हावी हो जाएगी।
तो क्या आधुनिकता पोर्न के टैग से डरती है? यह सवाल इसलिए क्योंकि लड़कियों के लिए आधुनिकता के दायरे में मॉई बॉडी माई च्वाइस का तर्क भी आता है। पैसों के बदले बिकनी पहनने या फिर न्यूड पेंटिंग के लिए तैयार होने या फिर कन्डोम तक के विज्ञापन में आना आधुनिकता है तो यही आधुनिकता उन्हें इतना मजबूत क्यों नहीं बनाती कि वो देह की सीमाओं के पार चली जाएं। जैसा कि यूरोप और अमेरिका में दिखता है। देह स्त्रियों के लिए अब कोई कमजोरी नहीं रह गया है। भारत में आधुनिक लड़कियां भी ऐसे मामलों में नैतिक क्यों हो जाती है? आधुनिकता में तो नैतिकता के लिए कोई जगह ही नहीं होती।
दरअसल चंडीगढ जैसी घटनाएं आधुनिकता की अधकचरी समझ से उपजती हैं जिसने हमारी नौजवान पीढ़ी को नशे, सेक्स, आदि का टूल बना दिया है। वह और कुछ नहीं मात्र बाजार के हाथों में खेल रहा है। सही कहा जाए तो वह समाज की सीमाओं को तोड़कर बाजार में ही खड़े दिखाई देते हैं। पश्चिम की आधुनिकता के बाहरी आवरण को तो हमने ओढ़ लिया, परन्तु देह के प्रति दृष्टिकोण को नहीं बदल पाए, यही हमारी पीड़ा का कारण है।
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(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)
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