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India Canada Trade: व्यापार पर विवाद भारी तो शांति का संदेश जारी

India Canada Trade: भारत आतंकवाद और अलगाववाद का मुखर विरोधी रहा है। दुनिया के हर मंच पर भारत ने ऐसी ताकतों का एकजुट होकर विरोध करने का आह्वान किया है। कनाडा भारत का अंतरंग कारोबारी देश रहा है। ऐसे में भारत कनाडा को एक दूसरा पाकिस्तान क्यों होने देना चाहेगा, जहां आईएसआई के इशारे पर खालिस्तानी अलगाववादी बेधड़क पाले पोसे जाएं। इसलिए भारत ने कनाडा से बार-बार खालिस्तानियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

भारत की मांग पर कोई ठोस कार्यवाही करने के बजाय कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रुडो ने न सिर्फ भारत पर बिना किसी सबूत के खालिस्तानी आतंकी निज्जर की हत्या का आरोप लगा दिया बल्कि अधिक उतावलेपन में कनाडा सरकार ने एक भारतीय राजनयिक को निकालने की कार्रवाई भी कर दी। भारत ने कड़ा रूख अपनाते हुए 10 अक्टूबर तक कनाडा के 40 राजनयिकों को भारत छोड़ने के लिए कह दिया है।

canada message of peace after trade Dispute over india canada row

भारत के आईना दिखाने के बाद कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रुडो के कस-बल ढीले पड़ने लगे हैं। दबाव बढ़ता देख उनकी बोली भी बदल गई। उन्होंने कहा है कि भारत के साथ करीबी संबंधों को लेकर कनाडा बहुत गंभीर है। इस बीच कनाडा की विदेश मंत्री मैलानी जोली ने भारत सरकार के साथ संपर्क साधा है और कहा है कि कनाडा नई दिल्ली के साथ रचनात्मक बातचीत करके राजनयिक बातचीत बढ़ाना चाहता है। दोनों देश अहम भू राजनीतिक भागीदार हैं। ऐसे में जरूरी है कि दोनों देश मिलकर काम करें ताकि दोनों देशों के आर्थिक संबंध पटरी पर बने रहे।

मैलानी की कूटनीतिक शांति विराम की घोषणा उनके गहरे आर्थिक हितों से जुड़ी है। भारत और कनाडा के बीच रिश्तों में आई तल्खी के कारण दोनों देशों के कारोबार-व्यापार के नुकसान का अंदेशा है। हालांकि भारत के कड़े रुख और अपने घरेलू अर्थशास्त्र की जरूरतों को देखते हुए कनाडा अब नरमी का संकेत दे रहा है, लेकिन ईपीटीए (अर्ली प्रोग्रेस ट्रेड एग्रीमेंट) समझौता वार्ता के रुक जाने से दोनों देशों के बीच 17 अरब अमेरिकी डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार का सौदा खटाई में पड़ गया है। यह वार्ता इसी महीने प्रस्तावित थी जिसे दोनों देशों ने तनातनी के कारण अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया है।

भारत और कनाडा के बीच अच्छा खासा व्यापार होता रहा है। कनाडा की कंपनियों ने भारत में बड़े पैमाने पर निवेश किया है, तो भारतीय कंपनियां भी कनाडा की अर्थव्यवस्था में लगातार योगदान देती आई हैं। कनाडा पेंशन फंड का भारतीय शेयर बाजार में भारी निवेश है। उसने फूड डिलीवरी कंपनी जोमेटो से लेकर ब्यूटी ब्रांड नायका तक में इन्वेस्टमेंट किया है। ऐसे में आशंका जताई जा रही थी कि विवाद के चलते कनाडा पेंशन प्लान इन्वेस्टमेंट बोर्ड बिकवाली कर सकता है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

रिपोर्ट्स के अनुसार सितंबर महीने में भारतीय बाजार से विदेशी निवेशकों ने मोटा पैसा निकाला है, लेकिन निकालने वालों की सूची में कनाडा शामिल नहीं है। कनाडा की कंपनियों ने इंडियन स्टॉक मार्केट में अपना निवेश बरकरार रखा है। इसे कनाडा की मजबूरी भी कह सकते हैं और जरूरत भी‌। यदि कनाडा की कंपनियां भारतीय बाजार से पैसा निकालती तो यह संदेश जाता कि कनाडा भारत को आर्थिक चोट पहुंचाने के लिहाज से ऐसा कर रहा है और बात बनने के बजाय और अधिक बिगड़ जाती।

इसके जवाब में यदि भारत और उसकी कंपनियां कनाडा के बाजार से अपने हाथ खींचने लगती तो उसके लिए भारी मुश्किल खड़ी हो जाती, क्योंकि कनाडा की अर्थव्यवस्था में भारतीय कंपनियों का भारी योगदान है। करीब 30 भारतीय कंपनियों ने कनाडा में 10 बिलियन डॉलर से ज्यादा का निवेश किया हुआ है। यह कंपनियां हजारों लोगों को रोजगार दे रही हैं, इसलिए कनाडा चाहकर भी भारत में निवेश किया पैसा फिलहाल नहीं निकाल सकता।

इसके अलावा कनाडा की कंपनियों को भारत में अच्छा रिटर्न मिलता है। इसलिए यहां अपना निवेश कायम रखना उसके लिए जरूरी है। एक अध्ययन के मुताबिक कनाडा पेंशन फंड को इंडियन मार्केट से अच्छा रिटर्न मिल रहा है। पेंशन प्लान इन्वेस्टमेंट बोर्ड के पास कोटक महिंद्रा बैंक में 2.68 प्रतिशत, जोमैटो में 2.3 प्रतिशत, नायका में 1.47 प्रतिशत, इंडस टावर में 2.8 प्रतिशत और डिलीवरी में 6 प्रतिशत की हिस्सेदारी है। इसके अलावा सीपीपीआईबी ने देश की कई अनलिस्टेड कंपनियों में भी निवेश किया हुआ है।

वहीं दोनों देशों के बीच व्यापार की बात करें तो वित्तीय वर्ष 2023 में भारत ने कनाडा को 4.11 अरब डॉलर का सामान निर्यात किया था जबकि इसका आयात 4.7 अरब डॉलर का था। वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान दोनों देशों के बीच सात अरब डॉलर का व्यापार हुआ था। वित्त वर्ष 2022-23 में यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 9 अरब डालर तक पहुंच गया।

कनाडा भारत का बड़ा व्यापारिक साझेदार नहीं है किंतु उसकी अर्थव्यवस्था काफी हद तक भारत पर निर्भर है। कनाडा में बसे भारतीय नागरिकों और छात्रों की वहां की अर्थव्यवस्था में बड़ी भूमिका है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम है। कनाडा में जो भारत के कई बड़े स्टार्टअप है, उनका झुकाव अमेरिका, खाड़ी या अन्य देशों की ओर हो सकता है।

भारत कनाडा से जिन वस्तुओं का आयात करता है उनमें प्रमुख रूप से खनिज ईंधन, खनिज तेल और उनसे संबंधित उत्पाद, विटामिन सब्सटेंस, फर्टिलाइजर और मसूर की दाल प्रमुख है। वही कनाडा भारत से फार्मास्यूटिकल प्रोडक्ट्स, लोहा, इस्पात, मशीनरी, न्यूक्लियर रिएक्टर और बॉयलर का आयात करता है। भारत में पूंजी निवेश की दृष्टि से कनाडा का दसवां स्थान है। वहां के निवेशकों का लगभग पौने दो लाख करोड़ रुपए का निवेश है जिसका 85 प्रतिशत शेयरों में लगा है। वहीं भारत की बड़ी कंपनियों ने वर्ष 2023 तक कनाडा में 41000 करोड़ रुपए का निवेश किया है।

भारतीय कंपनियां अगर अपना कारोबार समेट लेती हैं तो वहां बेरोजगारी का संकट बढ़ जाएगा। वहां बसे भारतीयों का छोटे उद्योग धंधों, ग्रोसरी, होटल रेस्टोरेंट आदि में लगभग 70 हजार करोड़ रूपया लगा है। खेती, डेयरी, फार्मिंग, लघु उद्योग, पर्यटन, आईटी, सार्वजनिक सेवाएं और रिसर्च के क्षेत्र में वहां भारतीयों का बोलबाला है। विदेश मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक कनाडा में प्रवासी भारतीयों की आबादी 16 लाख 89 हजार 595 है। कनाडा में 2 लाख 20 हजार भारतीय छात्र हैं जो वहां पर विदेश से आए छात्रों की कुल संख्या का 41% होता है।

प्रवासी भारतीयों का वहां की अर्थव्यवस्था में लगभग 3 लाख करोड़ रुपए प्रतिवर्ष का योगदान है। अगर भारत सरकार छात्रों को नियंत्रित कर दे तो कनाडा की अर्थव्यवस्था को बड़ा नुकसान हो सकता है। ज्ञात हो कि वर्ष 2015 में पत्रकार जमाल खशोगी की हत्या के बाद राजनीतिक विवाद के कारण सऊदी अरब और कनाडा के रिश्तों में कड़वाहट आई थी। इसके बाद सऊदी अरब ने अपने 15,000 से अधिक छात्रों को कनाडा छोड़ने का आदेश दे दिया था। सऊदी अरब के फैसले से कनाडाई अर्थव्यवस्था को करोड़ों डॉलर का नुकसान हुआ था। कनाडा इस तरह का जोखिम फिर से नहीं उठाना चाहेगा।

कनाडा अच्छी तरह जानता है कि भारत दुनिया की एक उभरती महाशक्ति है। यह तेजी से बढ़ती हुई एक आर्थिक ताकत और एक महत्वपूर्ण भू राजनीतिक देश भी है। वह यह भी जानता है कि भारत के साथ हिंद प्रशांत क्षेत्र में बेहतर संबंधों का होना उसके लिए कितना आवश्यक है। इसीलिए रिश्तों में आई तल्खी के बावजूद कनाडा व्यापार के मोर्चे पर भारत के साथ गहरा संबंध बनाए रखना चाहता है।

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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