Budget 2023-24: सबके विकास के साथ सबको विश्वास में लेनेवाला बजट
वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन के बजट बैग से बच्चे, जवान, बूढ़े, महिलाएं, किसान सबके लिए कुछ न कुछ दिए जाने से यह साफ संकेत मिलता है कि सरकार "सबका साथ सबका विकास" के साथ-साथ सब को विश्वास में भी लेना चाहती है।

Budget 2023-24: तीन राज्यों में विधानसभा चुनाव की चल रही प्रक्रिया के बीच वर्ष 2023-24 का आम बजट पेश हो चुका है। इस वर्ष अभी 6 और राज्यों में विधानसभा के चुनाव होने हैं और अगले साल वर्ष 2024 में लोकसभा का आम चुनाव भी होना है, इसलिए यह आम सोच थी कि बजट लोकलुभावन होगा। मध्यवर्ग को लेकर पहले से ही सकारात्मक संकेत देती आ रही वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस सोच को बहुत हद तक सही साबित किया है।
सरकार ने वित्त वर्ष 2024 में कैपिटल एक्सपेंडिचर में बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा है। यह बहुत बड़ा फैसला है और इससे आधारभूत ढांचा मजबूत होने की आशा है। वित्त मंत्री ने वर्ष 24 के लिए राजकोषीय घाटे का लक्ष्य 5.9% रखा है जो इससे पिछले साल में 6.4% और उसके पिछले साल में 6.8% था। कोरोना महामारी से उबरने के बाद यह एक तरह से संतोषजनक है। अभी आर्थिक रिकवरी को मजबूत बनाने की जरूरत है, इसलिए आने वाले वर्षों में राजकोषीय घाटे को धीरे-धीरे कम किया जा सकता है। सरकार ने पिछले साल के बजट में ही लक्ष्य रखा था कि वर्ष 2025 26 तक राजकोषीय घाटे को 4.5% तक ले आएंगे।
कुल लगभग 45 लाख करोड़ के परिव्यय वाले भारी-भरकम बजट में 27.2 लाख करोड़ की आय कर संग्रह के जरिए होनी है, जबकि 15.4 लाख करोड रुपए सरकार उधार लेगी।
मालूम हो कि देश में चल रहे आजादी के अमृत काल का यह पहला आम बजट है। यह बजट इसलिए भी खास है कि आजादी के बाद पहली बार महिला वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट प्रस्ताव तैयार किया है और महिला राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने इसकी मंजूरी दी है। लाल टेश साड़ी में लाल रंग के बही खाते में बजट लेकर संसद में पहुंची वित्त मंत्री ने व्यक्तिगत आयकर में छूट की सीमा 5 लाख से बढ़ाकर 7 लाख कर करदाताओं के चेहरे पर भी खुशी की लाली लाने की कोशिश की है।
महिलाओं के विकास के लिए इस बजट में खास ध्यान रखा गया है। बजट महिलाओं को स्वयं सहायता समूह के लिए प्रेरित करता है। इसी तरह नये कर प्रावधानों के अनुसार नए ₹7 लाख सालाना आय अर्जित करने वाले को अब कोई कर नहीं देना होगा। इससे मध्यमवर्ग को राहत पहुंचेगी। वरिष्ठ नागरिकों की जमा राशि सीमा को भी साढ़े चार लाख से बढ़ाकर ₹9 लाख कर दिया गया है। कोरोना काल में 28 महीने तक 80 करोड़ लोगों को मुफ्त अनाज देने, 14 करोड़ जनधन खाता खोले जाने, 10 करोड़ घरों में एलपीजी कनेक्शन देने, 12 करोड़ घरों में शौचालय बनवाने, सबको आवास का लक्ष्य हासिल करने तथा प्रति व्यक्ति आय 1.97 लाख यानी लगभग ₹2 लाख सालाना हो जाने का दावा करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि मौजूदा बजट अगले 25 साल के विकास का ब्लूप्रिंट है।
वरिष्ठ नागरिकों के लिए बचत योजना की अधिकतम सीमा 15लाख से बढ़ाकर 30 लाख करने के साथ महिला सम्मान बचत पत्र की शुरुआत की घोषणा वित्त मंत्री ने की है। इसके तहत महिलाएं ₹2 लाख जमा कर सकेंगी, जिस पर उन्हें 7.5% का ब्याज दिया जाएगा।
सरकार ने आधारभूत ढांचे के लिए 10 लाख करोड़ का आवंटन करते हुए हरित खेती हरित ऊर्जा तथा देश में मोटे अनाज को प्राथमिकता देने की बात कही है। किसानों की बेहतरी के लिए कृषि क्रेडिट कार्ड की सीमा 20 लाख करोड़ तक बढ़ा दी गई है। बच्चों और युवाओं के लिए नेशनल डिजिटल लाइब्रेरी के साथ-साथ देश में 157 नए नर्सिंग कॉलेज स्थापित किए जाएंगे। 47 लाख युवाओं को सीधे धन हस्तांतरण का ऐलान करते हुए वित्त मंत्री ने देश में 50 नए एयरपोर्ट बनवाने की घोषणा की।
रेलवे के लिए 2.4 लाख करोड़ का आवंटन किया गया है। बजट में रेलवे को और अधिक स्मार्ट बनाने के लिए नई योजनाएं शुरू की जाएंगी इसके लिए 75000 करोड़ अलग से दिए जाएंगे। खेती में स्टार्टअप को बढ़ावा, डिजिटल ट्रेनिंग के साथ-साथ बागवानी के लिए 2220 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया है। देश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को बढ़ावा देने के लिए विश्वविद्यालयों में केंद्र खोले जाएंगे। कारोबार सुगमता बढ़ाने के लिए कई योजनाएं आरंभ की जाएंगी। जीआईएफटी शहरों पर खास ध्यान तथा राष्ट्रीय वित्तीय सूचना रजिस्टर भी बनाया जाएगा। छोटे उद्योगों को 9000 करोड़ की क्रेडिट गारंटी के साथ-साथ केवाईसी प्रक्रिया को आसान बनाने का लक्ष्य रखा गया है।अदालती मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए ई कोर्ट के लिए 97000 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।
नए भारत के नजरिए से इस बजट में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में भी दूरदर्शिता की नई लकीर खींचने की कोशिश दिखती है। आज दुनिया मेन्यूफैक्चरिंग में चीन का विकल्प तलाश रही है और बजट में हुए प्रावधानों से भरोसा मिलता है कि सरकार इस अवसर को भुनाने की रणनीति पर काफी आगे बढ़ चुकी है। घरेलू उत्पादन को बढ़ाने और आयात बिल को कम करने के लिए सरकार ने कई इंसेंटिव योजनाओं की घोषणा की है। छोटे और मझोले किस्म के उद्योगों को राहत इसके उदाहरण हैं। बजट के प्रावधानों से यह भी संकेत मिलता है कि सरकार मैनुफैक्चरिंग सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए दोहरी रणनीति पर काम कर रही है। इसके तहत लॉजिस्टिक की लागत को कम रखने और घरेलू माल को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए ही मेक इन इंडिया को बढ़ावा दिया जा रहा है।
एमएसएमई के बजट को बढ़ाने के पीछे भी यही महत्वाकांक्षा दिखती है। कृषि के बाद एमएसएमई रोजगार देने वाला दूसरा सबसे बड़ा सेक्टर है और कोरोना की सबसे ज्यादा मार भी इन्हीं सेक्टरों पर पड़ी है। सरकार इन सेक्टरों को फिर से आत्मनिर्भर भारत और वोकल फॉर लोकल योजना के मॉडल के रूप में आगे बढ़ाना चाहती है।आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, पैड अप कैपिटल की सीमा बढ़ाना इस सेक्टर को नई ताकत देने की मंशा दिखा रहा है।
भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने बजट में शहरों में गुणवत्तापूर्ण जीवन की जरूरत को भी पर्याप्त तरजीह दी है। गांव से शहरों की ओर बेलगाम पलायन को देखें तो सरकार की इस पहल का दूरगामी महत्व समझ में आता है। बजट में स्वच्छ पेयजल, सफाई ,पर्यावरण में सुधार, कनेक्टिविटी में सुधार, जैसे मदों के लिए अच्छा खासा प्रावधान किया गया है।
पूरे बजट में दो सेक्टर ऐसे दिखते हैं जहां सरकार को फिर से विचार करने की गुंजाइश है। पहला शिक्षा क्षेत्र और दूसरा स्वास्थ्य का क्षेत्र। सरकार ने शिक्षा का बजट पूर्व के 2.64 लाख करोड़ से घटाकर अब की बार 2.5 लाख करोड़ कर दिया है। इसी तरह स्वास्थ्य क्षेत्र का बजट भी पिछले वर्ष 2.2 लाख करोड़ से घटाकर अब की बार 1.98 लाख करोड़ कर दिया गया है।
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बहरहाल बजट को समग्रता में देखने पर पता चलता है कि सरकार पूंजीगत व्यय के जरिए अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने की कोशिश कर रही है, लेकिन देश में खड़े रोजगार संकट को हल करने, दिन दिन चढ़ती महंगाई पर काबू करने से कहीं अधिक सरकार का ध्यान आसन्न चुनाव पर भी है।
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(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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